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छोटे किसानों का कर्जा हुआ माफ, बड़े किसानों से मुंह फेरा

Wed, 05 Apr 2017 12:21 AM IST
शामली, अमर उजाला ब्यूरो
शामली, अमर उजाला ब्यूरो Updated Wed, 05 Apr 2017 12:21 AM IST
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Small farmers get loan, sorry for big farmers
गेहूं खरीद - फोटो : amar ujala
शामली। भाजपा द्वारा विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए कर्ज माफ करने संबंधी वादे को लेकर मंगलवार को पहली कैबिनेट बैठक पर किसानों की नजर रही। प्रदेश सरकार ने लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफी की घोषणा की, जिसे किसानों ने धोखा बताया है। उनका कहना है कि कर्ज माफी का लाभ सभी किसानों को दिया जाना चाहिए था। 
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यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वादा किया था कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने पर पहली ही कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज माफी का निर्णय लिया जाएगा। मंगलवार को प्रदेश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक हुई, तो शामली जिले के किसान भी टकटकी लगाकर प्रदेश सरकार के निर्णय का इंतजार करते रहे।
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शाम 6.30 बजे प्रदेश सरकार की तरफ से सिद्धार्थनाथ सिंह और श्रीकांत शर्मा ने प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि लघु एवं सीमांत किसानों का एक लाख रुपये तक का कर्ज माफ कर दिया जाएगा। साथ ही आलू उत्पादक किसानों के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर किसानों को लाभ देने की बात कही गई। इसको लेकर किसानों में चर्चा शुरू हो गई। छोटे किसानों में प्रदेश सरकार के निर्णय को लेकर जहां खुशी रही, तो ज्यादातर नेताओं ने प्रदेश सरकार के निर्णय को बहकावा बताया। 
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 प्रदेश में दो करोड़ 30 लाख किसान निवास करते हैं। प्रदेश सरकार के निर्णय का लाभ सिर्फ 37 प्रतिशत किसानों को मिलेगा, जबकि 63 प्रतिशत किसान इससे वंचित रह जाएंगे। यह किसानों के साथ धोखा है, क्योंकि चुनाव के दौरान एक लाख रुपये तक के ऋण माफ करने जैसी शर्त नहीं रखी गई थी। -- सुधीर पंवार, यूपी योजना आयोग के पूर्व सदस्य 

 प्रदेश सरकार के पिटारे से जो निकला वह सिर्फ छलावा है। बहुत कम किसानों को इससे फायदा होगा। प्रदेश सरकार को समस्त किसानों का ऋण माफ करना चाहिए था। भाजपा भी पूर्व की सरकारों की तरह किसानों के साथ धोखा करने पर उतर आई है। -- ऋषिराज राझड, जिलाध्यक्ष रालोद 

 भाजपा ने किसानों के साथ धोखा किया है। प्रदेश सरकार का निर्णय ऊंट के मुंह में जीरा सरीखा है। क्योंकि सभी लघु सीमांत किसानों का फसली ऋण एक लाख करोड़ बनता है, जबकि एक लाख रुपये ऋण के दायरे में समेटने से बहुत कम किसानों को ही इस निर्णय से लाभ मिल पाएगा। -- कुलदीप पंवार, प्रदेश प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन 


प्रदेश सरकार की नजर में किसान भी अलग हो गए हैं। एक लाख रुपये तक के ऋण माफी की जगह समस्त लघु एवं सीमांत किसानों का फसली ऋण माफ होना चाहिए था। सत्ता हासिल करने के बाद राजनीतिक दलों का रुख कैसे बदलता है, वही भाजपा ने दिखा दिया है। -- अनिल मलिक, किसान नेता
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