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श्रीमद्भागवत कथा मनुष्य को जीवन में सुख ही सुख प्रदान करती है -- श्री हनुमानधाम में श्रीमद्ध भागवत कथा दूसरे दिन--------
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शामली हनुमान धाम पर प्रवचन करते कथा वाचक
- फोटो : SHAMLI
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श्रीमद्भागवत कथा अनमोल औषधि : सुमित कृष्ण
शामली। संत सुमित कृष्ण ठाकुर ने श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसा मीठा फल है, जिसको चख लेने से भूख और बढ़ जाती है, जो कभी शांत नहीं होती है। जीवन में सुख ही सुख प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी औषधि है, जो अनमोल खर्च करके भी खरीदी नहीं जा सकती।
सोमवार को हनुमान धाम के मंदिर प्रांगण में गुजरात से आए संत सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भाव ऐसा होना चाहिए, जो भक्ति में हो, वरना स्वार्थ की दुनिया है। चारों तरफ दुख ही दुख के अलावा कुछ भी नहीं नजर आता है। भक्ति महारानी के बारे में बताया कि किस प्रकार उसके दो पुत्र ज्ञान वैराग्य अचेत अवस्था में पड़े हुए हैं और वह वृंदावन में रहती है, उस पर संत रूपी देव ऋषि नारद की कृपा होती है। वह बताते हैं की श्रीमद्भागवत कथा सुनने से तुम्हारे पुत्र अचेत अवस्था से बाहर आ जाएंगे।
ऐसा ही होता है और भक्ति महारानी अपने पुत्रों सहित भक्तों के हृदय में निवास करती है। कथा व्यास कहते हैं कि मृत्यु ऐसा भय है जिसे राजा रंक फकीर सभी डरते हैं, परंतु उस डर को निकालने के लिए हमें भगवान की शरण प्राप्त करनी होगी। उससे मृत्यु का डर अपने आप समाप्त हो जाता है। कथा का संचालन डॉक्टर कृष्णगोपाल ने किया। श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक इंद्रसेन गुप्ता, पंकज गुप्ता, नवनीत गुप्ता, रश्मि गर्ग, नरेंद्र धीमान, संजय गोयल, महेश धीमान, संजीव शर्मा, संजय जैन, आर्यन गर्ग, रोबिन गर्ग आदि मौजूद रहे।
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शामली। संत सुमित कृष्ण ठाकुर ने श्रीमद्भागवत कथा की अमृत वर्षा करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसा मीठा फल है, जिसको चख लेने से भूख और बढ़ जाती है, जो कभी शांत नहीं होती है। जीवन में सुख ही सुख प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा ऐसी औषधि है, जो अनमोल खर्च करके भी खरीदी नहीं जा सकती।
सोमवार को हनुमान धाम के मंदिर प्रांगण में गुजरात से आए संत सुमित कृष्ण ठाकुर ने कहा कि भगवान को प्राप्त करने के लिए भाव ऐसा होना चाहिए, जो भक्ति में हो, वरना स्वार्थ की दुनिया है। चारों तरफ दुख ही दुख के अलावा कुछ भी नहीं नजर आता है। भक्ति महारानी के बारे में बताया कि किस प्रकार उसके दो पुत्र ज्ञान वैराग्य अचेत अवस्था में पड़े हुए हैं और वह वृंदावन में रहती है, उस पर संत रूपी देव ऋषि नारद की कृपा होती है। वह बताते हैं की श्रीमद्भागवत कथा सुनने से तुम्हारे पुत्र अचेत अवस्था से बाहर आ जाएंगे।
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ऐसा ही होता है और भक्ति महारानी अपने पुत्रों सहित भक्तों के हृदय में निवास करती है। कथा व्यास कहते हैं कि मृत्यु ऐसा भय है जिसे राजा रंक फकीर सभी डरते हैं, परंतु उस डर को निकालने के लिए हमें भगवान की शरण प्राप्त करनी होगी। उससे मृत्यु का डर अपने आप समाप्त हो जाता है। कथा का संचालन डॉक्टर कृष्णगोपाल ने किया। श्रीमद्भागवत कथा के आयोजक इंद्रसेन गुप्ता, पंकज गुप्ता, नवनीत गुप्ता, रश्मि गर्ग, नरेंद्र धीमान, संजय गोयल, महेश धीमान, संजीव शर्मा, संजय जैन, आर्यन गर्ग, रोबिन गर्ग आदि मौजूद रहे।
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