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Shamli: यमुना का रुख बदला, कई गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, सिर्फ कागजों में बना दी चौकियां

Thu, 04 Sep 2025 05:53 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, शामली
अमर उजाला नेटवर्क, शामली Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Thu, 04 Sep 2025 05:53 PM IST
सार

यमुना का पानी खतरे के निशान पर है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन के दावे हवाई हैं। मौके पर बाढ़ चौकी मौजूद नहीं हैं। जबकि किसानों की फसलें डूब चुकी हैं। कर्ज से किसान पहले ही परेशान हैं। 

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Shamli: Yamuna's direction changed, danger of flood looms over many villages, checkpoints made only on paper
चौसाना में खोखरी नदी के बीच से आते मदरसे के छात्र। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

यमुना नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर और रुख बदलने से चौसाना क्षेत्र के कई गांव बाढ़ की चपेट में आने लगे हैं। हरियाणा की ओर बहने वाली यमुना अब उत्तर प्रदेश की ओर मुड़ गई है, जिससे खेतों में कटान बढ़ रहा है। हजारों बीघा फसलें डूब चुकी हैं। किसानों पर आर्थिक संकट टूट पड़ा है। वहीं प्रशासन के दावे हवाई साबित हो रहे हैं। बाढ़ चौकियां सिर्फ कागजों में चल रही हैं। जिलाधिकारी ने मामले की जांच कराने की बात कहीं है।
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Shamli: Yamuna's direction changed, danger of flood looms over many villages, checkpoints made only on paper
चौसाना क्षेत्र के गांव भडी मुस्तफाबाद में खेतों में बढ़ता हुआ कटान। - फोटो : अमर उजाला
पहाड़ों और मैदानी इलाकों में बारिश से हथिनीकुंड बैराज पर जलस्तर बढ़ा। सोमवार को बैराज से 3.29 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे मंगलवार और बुधवार को यमुना 232 मीटर तक बह निकली, जबकि खतरे का निशान 231.50 मीटर है। बृहस्पतिवार को भी जलस्तर 231.40 मीटर पर रहा, जो खतरे के निशान पर है।
 
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भडी गांव में ठोकर टूटी, संकट गहराया
भडी गांव के पास एक नंबर ठोकर टूटने से उपजाऊ जमीन यमुना में समा रही है। इसके चलते पुरानी भडी, भडी कोरियान, नाई नगला और उद्पुर गांव खतरे की जद में हैं। किसान सरफराज ने चेताया कि यदि यह ठोकर पूरी तरह ध्वस्त हो गई तो भारी तबाही होगी।
 
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बाढ़ चौकियां सिर्फ कागजों में
कैराना तहसील में यमुना में आने वाली बाढ़ से सुरक्षा के लिए तहसील प्रशासन द्वारा चार बाढ़ चौकी बनाई गई हैं। लेकिन चारों बाढ़ चौकी केवल नाम के लिए ही हैं। किसी भी बाढ़ चौकी का कोई आफिस मौजूद नहीं है। राजस्व निरिक्षक अरुण कुमार ने बताया कि तहसील में फतेहपुर, इस्सोपुर खुरगान, रामडा व डुंडुखेडा बाढ़ चौकी है। पड़ताल के दौरान कहीं पर भी बाढ़ चौकी नहीं मिली। अधिकारियों ने कहा कि वह यमुना नदी पर नजर रख रहे हैं। सकौती बाढ़ सुरक्षा चौकी के अधीन कुल 6 गांव आते हैं। सकौती, चौसाना, चौसाना जदीद, भड़ी, मुस्तफाबाद और साल्हापुर। जबकि सकौती में धरातल पर कोई सुरक्षा चौकी नहीं मिली। 
 

ग्रामीणों का आक्रोश
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन सिर्फ कागजों पर सक्रिय है। न चौकियां, न बचाव दल और न ही ठोस इंतजाम दिखाई दिए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो हालात विकराल हो जाएंगे।

डीएम बोले
डीएम अरविंद कुमार चौहान ने कहा कि बाढ़ चौकियों पर तैनात कर्मचारियों को अलर्ट किया गया है। यदि लापरवाही मिली तो कार्रवाई की जाएगी
 
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