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सरकार के पैकेज से शामली के उद्यमियों को आस
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शामली। केंद्र सरकार द्वारा घोषित पैकेज से शामली के उद्यमियों को बहुत आस लगी है। उन्होंने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि सरकार के पैकेज से जिले की 95 फीसदी औद्योगिक इकाईयां लाभान्वित होंगी।
शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि अभी तक केवल पांच करोड़ टर्न ओवर वाले उद्योग लघु की श्रेणी में थे, लेकिन अब 50 करोड़ की टर्न ओवर वाली यूनिट इस दायरे में होंगी। इसी तरह मध्यम उद्योग में पहले 10 करोड़ टर्न ओवर वाले उद्योग आते थे, लेकिन अब ये दायरा 100 करोड़ कर दिया है। जिले में करीब 300 छोटी बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं और 95 प्रतिशत इस दायरे में आएंगी और सरकारी पैकेज का लाभ उठा सकेंगी।
वहीं, उद्यमी अनुज गर्ग कहते हैं कि सरकार के इस फैसले से उन उद्योगों को लाभ होगा, जिन्होंने पहले लोन लिया था, लेकिन किसी वजह से समय पर लोन ना चुकाने पर खाता एनपीए हो गया है। ऐसे उद्योगों को फिर से लोन का मौका दिया गया है। यानी उस उद्यमी के पास फिर से मजबूती से खड़े होने के विकल्प होंगे। वहीं, किसान नेता सवित मलिक ने कहा कि सरकार ने उद्योगों को तो पैकेज दिया है, लेकिन किसानों की भी सोचे। गन्ना भुगतान नहीं हो रहा। मौसम की मार से फसलों को नुकसान है। लॉकडाउन में फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल रहे। उन्होंने सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की मांग उठाई।
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शामली इंडस्ट्रियल एस्टेट मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकित गोयल ने बताया कि अभी तक केवल पांच करोड़ टर्न ओवर वाले उद्योग लघु की श्रेणी में थे, लेकिन अब 50 करोड़ की टर्न ओवर वाली यूनिट इस दायरे में होंगी। इसी तरह मध्यम उद्योग में पहले 10 करोड़ टर्न ओवर वाले उद्योग आते थे, लेकिन अब ये दायरा 100 करोड़ कर दिया है। जिले में करीब 300 छोटी बड़ी औद्योगिक इकाईयां हैं और 95 प्रतिशत इस दायरे में आएंगी और सरकारी पैकेज का लाभ उठा सकेंगी।
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वहीं, उद्यमी अनुज गर्ग कहते हैं कि सरकार के इस फैसले से उन उद्योगों को लाभ होगा, जिन्होंने पहले लोन लिया था, लेकिन किसी वजह से समय पर लोन ना चुकाने पर खाता एनपीए हो गया है। ऐसे उद्योगों को फिर से लोन का मौका दिया गया है। यानी उस उद्यमी के पास फिर से मजबूती से खड़े होने के विकल्प होंगे। वहीं, किसान नेता सवित मलिक ने कहा कि सरकार ने उद्योगों को तो पैकेज दिया है, लेकिन किसानों की भी सोचे। गन्ना भुगतान नहीं हो रहा। मौसम की मार से फसलों को नुकसान है। लॉकडाउन में फसलों के वाजिब दाम नहीं मिल रहे। उन्होंने सरकार ने किसानों के कर्ज माफ करने की मांग उठाई।
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