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ना सामान आया ,ना काम हुआ, कर दिया 21 लाख का भुगतान
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शामली। विकास कार्यों के नाम पर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। कांधला ब्लाक की 19 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत विकास कार्यों के लिए निर्माण सामग्री खरीद के बाबत करीब 21 लाख रुपये का भुगतान पांच फर्मों को कर दिया गया, जबकि न सामान आया और न काम कराया गया। घोटाला उजागर होने पर डीएम ने खंड विकास अधिकारी, सहायक लेखाकार के निलंबन की संस्तुति कर दी है। संविदा लेखाकार की सेवाएं समाप्त कर दी गईं हैं, जबकि तकनीकी सहायक की भूमिका की जांच हो रही है। संबंधित फर्मों से भी भुगतान की रिकवरी कर उन्हें ब्लैक लिस्टेड करने के नोटिस जारी कर दिए गए हैं।
जिला ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक ज्ञानेश्वर तिवारी के अनुसार कांधला ब्लॉक के गांवों में वर्ष 2019-20 में मनरेगा के कार्यों में शिकायतें मिल रही थीं। विकास कार्यों के लिए खरीदी गई सामग्री के भुगतान का सत्यापन मुख्य विकास अधिकारी ने तीन अधिकारियों से कराया। जांच में पता चला कि 19 ग्राम पंचायतों में कार्यों पर 21 लाख 669 रुपये का भुगतान बिना किसी सामग्री आपूर्ति और बिना कार्य कराए फर्जी ढंग से पांच वेंडरों को कर दिया गया है। ये रकम उनके खाते में ट्रांसफर की गई थी। मौके पर कोई काम नहीं हुआ था। ना ही किसी वेंडर को कोई ऑर्डर दिया गया था। पांचों वेंडरों से पूछा तो पता चला कि उनके द्वारा निर्माण सामग्री ही नहीं दी गई है। जांच अधिकारियों ने सीडीओ को रिपोर्ट दी, जिसे जिलाधिकारी को भेजा गया।
जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बताया कि पांचों वेंडरों के खाते फ्रिज कर उन्हें नोटिस जारी किए गए। वेंडरों ने भुगतान की रकम 21,00,669 रुपये शासकीय खाते में जमा करा दी है। प्रकरण में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कांधला सुभाषचन्द्र को जिला मुख्यालय से संबद्ध करते हुए निलंबन की संस्तुति शासन से की गई है। कांधला ब्लॉक के सहायक लेखाकार राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति करते हुए निदेशक, आंतरिक लेखा, लखनऊ को रिपोर्ट भेजी है। संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर समीर की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। पूर्व तकनीकी सहायक विनीत कुमार की संलिप्तता की जांच हेतु अलग से समिति गठित की गई है। सभी वेंडरों को ब्लैक लिस्ट किए जाने के नोटिस भेजे हैं।
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उधर, इस संबंध में आरोपी बीडीओ सुभाष चंद्र ने खुद को निर्दोष बताया। कहा कि मुझ पर एकतरफा कार्रवाई की गई है।
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जिला ग्राम्य विकास विभाग के परियोजना निदेशक ज्ञानेश्वर तिवारी के अनुसार कांधला ब्लॉक के गांवों में वर्ष 2019-20 में मनरेगा के कार्यों में शिकायतें मिल रही थीं। विकास कार्यों के लिए खरीदी गई सामग्री के भुगतान का सत्यापन मुख्य विकास अधिकारी ने तीन अधिकारियों से कराया। जांच में पता चला कि 19 ग्राम पंचायतों में कार्यों पर 21 लाख 669 रुपये का भुगतान बिना किसी सामग्री आपूर्ति और बिना कार्य कराए फर्जी ढंग से पांच वेंडरों को कर दिया गया है। ये रकम उनके खाते में ट्रांसफर की गई थी। मौके पर कोई काम नहीं हुआ था। ना ही किसी वेंडर को कोई ऑर्डर दिया गया था। पांचों वेंडरों से पूछा तो पता चला कि उनके द्वारा निर्माण सामग्री ही नहीं दी गई है। जांच अधिकारियों ने सीडीओ को रिपोर्ट दी, जिसे जिलाधिकारी को भेजा गया।
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जिलाधिकारी जसजीत कौर ने बताया कि पांचों वेंडरों के खाते फ्रिज कर उन्हें नोटिस जारी किए गए। वेंडरों ने भुगतान की रकम 21,00,669 रुपये शासकीय खाते में जमा करा दी है। प्रकरण में खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) कांधला सुभाषचन्द्र को जिला मुख्यालय से संबद्ध करते हुए निलंबन की संस्तुति शासन से की गई है। कांधला ब्लॉक के सहायक लेखाकार राजेन्द्र प्रसाद के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई और निलंबन की संस्तुति करते हुए निदेशक, आंतरिक लेखा, लखनऊ को रिपोर्ट भेजी है। संविदा कंप्यूटर ऑपरेटर समीर की सेवाएं समाप्त कर दी हैं। पूर्व तकनीकी सहायक विनीत कुमार की संलिप्तता की जांच हेतु अलग से समिति गठित की गई है। सभी वेंडरों को ब्लैक लिस्ट किए जाने के नोटिस भेजे हैं।
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उधर, इस संबंध में आरोपी बीडीओ सुभाष चंद्र ने खुद को निर्दोष बताया। कहा कि मुझ पर एकतरफा कार्रवाई की गई है।