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किसान पीला - सफेद तना छेदक कीट से धान की फसल को बचाए, कैसे करे सुरक्षा
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तना छेदक कीट से धान की फसल को बचाएं
शामली। जिले के किसानों को तना छेदक कीट से धान की फसल को नर्सरी से लेकर बाली में दाना बनने तक बचाने की जरूरत है। पीला व सफेद चना छेदक दोनों के द्वारा सामान्यत: 5-10 प्रतिशत नुकसान होता है। अनुकूल वातावरण होने पर यह 50-60 प्रतिशत नुकसान पहुंचा सकता है।
जिले में धान की रोपाई का अंतिम चरण चल रहा है। 70 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है। अगेती धान की प्रजाति में कुछ स्थानों में बाली से दाना बन रहा है। ऐसे समय में तना छेदक कीट से किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर शीशपाल सिंह का कहना है कि यह कीट नर्सरी में धान की पौध की पत्तियों पर अपने अंडे दे देते हैं, जो रोपाई के समय खेतों में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं। शुरूआत में इस कीट की सुंडी तने में छेद करके उसको नष्ट कर देती हैं। बाली निकलते समय भी तनों में छेद कर काट देती है, जो धीरे-धीरे सफेद होकर बाली सूख जाती है। यह कीट अपने अंडे समूह में पत्तियों के ऊपरी सिरे के पास देते हैं।
तना छेदक के प्रकोप को रोकने के उपाय
रोपाई के समय पौध के उपरी भाग (2-3 इंच) को काटकर भूमि में दबा देना, जहां तना छेदक अपने अंडे देता है, वहां एक वर्ग मीटर क्षेत्रफल में केवल 25 पौधों की ही रोपाई करनी चाहिए। रोगों एवं कीटों का प्रकोप कम करने के लिए 10 लाइनों की रोपाई करने के बाद एक लाइन ख़ाली छोड़ना, जिससे खेतों में प्रकाश एवं वायु का पर्याप्त संचार होता रहे। रोपाई के समय पौधे से पौधे और लाइन से लाइन की दूरी 20 सेंटीमीटर बनाए रखे। खेतों एवं मेड़ों को खरपतवारों से मुक्त रखें। रोपाई के 15-20 दिन बाद खेत में हल्का पाटा लगाएं। खेतों में लगातार पानी भरकर न रखें। खेतों की सतह से पानी गायब होने के बाद मिट्टी में दरारें पड़ने से पूर्व सिंचाई करनी चाहिए।
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शामली। जिले के किसानों को तना छेदक कीट से धान की फसल को नर्सरी से लेकर बाली में दाना बनने तक बचाने की जरूरत है। पीला व सफेद चना छेदक दोनों के द्वारा सामान्यत: 5-10 प्रतिशत नुकसान होता है। अनुकूल वातावरण होने पर यह 50-60 प्रतिशत नुकसान पहुंचा सकता है।
जिले में धान की रोपाई का अंतिम चरण चल रहा है। 70 प्रतिशत धान की रोपाई हो चुकी है। अगेती धान की प्रजाति में कुछ स्थानों में बाली से दाना बन रहा है। ऐसे समय में तना छेदक कीट से किसानों को सावधान रहने की आवश्यकता है। शामली कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर शीशपाल सिंह का कहना है कि यह कीट नर्सरी में धान की पौध की पत्तियों पर अपने अंडे दे देते हैं, जो रोपाई के समय खेतों में पहुंचकर अपनी संख्या बढ़ाते रहते हैं। शुरूआत में इस कीट की सुंडी तने में छेद करके उसको नष्ट कर देती हैं। बाली निकलते समय भी तनों में छेद कर काट देती है, जो धीरे-धीरे सफेद होकर बाली सूख जाती है। यह कीट अपने अंडे समूह में पत्तियों के ऊपरी सिरे के पास देते हैं।
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तना छेदक के प्रकोप को रोकने के उपाय
रोपाई के समय पौध के उपरी भाग (2-3 इंच) को काटकर भूमि में दबा देना, जहां तना छेदक अपने अंडे देता है, वहां एक वर्ग मीटर क्षेत्रफल में केवल 25 पौधों की ही रोपाई करनी चाहिए। रोगों एवं कीटों का प्रकोप कम करने के लिए 10 लाइनों की रोपाई करने के बाद एक लाइन ख़ाली छोड़ना, जिससे खेतों में प्रकाश एवं वायु का पर्याप्त संचार होता रहे। रोपाई के समय पौधे से पौधे और लाइन से लाइन की दूरी 20 सेंटीमीटर बनाए रखे। खेतों एवं मेड़ों को खरपतवारों से मुक्त रखें। रोपाई के 15-20 दिन बाद खेत में हल्का पाटा लगाएं। खेतों में लगातार पानी भरकर न रखें। खेतों की सतह से पानी गायब होने के बाद मिट्टी में दरारें पड़ने से पूर्व सिंचाई करनी चाहिए।
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