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98 बसों से 4515 प्रवासियों की हुई रवावनी
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शामली रोडवेज बस स्टैंड पर हरियाणा के पानीपत से पहुंचे आजमगढ़ के प्रवासी श्रमिक।
- फोटो : SHAMLI
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कैराना/झिंझाना (शामली)। हरियाणा से प्रवासी श्रमिकों का आना जारी है। सोमवार को हरियाणा से भेजे गए 4515 प्रवासी श्रमिकों को शाम तक 98 बसों से उनके गृह जनपदों को रवाना किया जा चुका था। प्रशासन द्वारा हरियाणा से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए दो शेल्टर हाउस बनाए गए हैं। इनमें पानीपत से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए कैराना के राधा स्वामी सत्संग भवन और करनाल की ओर से आने वाले प्रवासी श्रमिकों के लिए झिंझाना क्षेत्र के अहमदगढ़ गुरुद्वारा के पास व्यवस्था की गई थी।
जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार सोमवार रात तक हरियाणा राज्य से 76 बसों से 2961 प्रवासी आए। सभी की स्केनिंग कराई गई । जलपान खाने की व्यवस्था की गई। छोटे छोटे बच्चों के लिए दूध और बिस्कुट की व्यवस्था कराई। इसके बाद 98 बसों से 4515 प्रवासियों को उत्तर प्रदेश के उनके विभिन्न गृह जनपदों में भेज दिया गया। रात तक ये क्रम जारी था। जो श्रमिक जिस जनपद का था उस जिले के पंडाल में जाकर उसने अपनी स्क्रीनिंग करा ली और कागजी कार्रवाई पूरी कराई। इसके अलावा कई श्रमिक यमुना नदी को पार कर खेतों से होकर झिंझाना के गांव मंसूरा में पहुंचे। जानकारी पर एसडीएम ऊन उद्भव त्रिपाठी और तहसीलदार अजय कुमार को हुई तो उन्होंने श्रमिकों को अहमदगढ़ शेल्टर होम में लाकर स्क्रीनिंग के बाद बस द्वारा उनके गृह जनपद भिजवा दिया।
ट्रेन की बजाय बस से बलिया भेजे गए बिहार के श्रमिक
कैराना। प्रशासन ने ट्रेन की व्यवस्था ना होती देख बिहार राज्य के 135 प्रवासी श्रमिकों को यूपी रोडवेज की बस के माध्यम से बिहार के बॉर्डर पर बलिया जनपद में भेज दिया। शनिवार को प्रशासन ने बिहार के 71 प्रवासी श्रमिकों को सहारनपुर रेलवे स्टेशन भेज दिया था। रविवार को सहारनपुर में हंगामे के बाद प्रशासन ने बिहार के 111 श्रमिकों को कैराना में ही द न्यू हाईटस एकेडमी में बनाये गये शेल्टर होम पर ठहरा दिया था। सोमवार को हरियाणा से बिहार के ओर भी श्रमिक आ गए थे। जिसके बाद प्रशासन ने बिहार के 135 श्रमिकों को यूपी रोडवेज की चार बसों के द्वारा बिहार के बार्डर पर यूपी के जिला बलिया के लिए रवाना कर दिया।
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जिलाधिकारी जसजीत कौर के अनुसार सोमवार रात तक हरियाणा राज्य से 76 बसों से 2961 प्रवासी आए। सभी की स्केनिंग कराई गई । जलपान खाने की व्यवस्था की गई। छोटे छोटे बच्चों के लिए दूध और बिस्कुट की व्यवस्था कराई। इसके बाद 98 बसों से 4515 प्रवासियों को उत्तर प्रदेश के उनके विभिन्न गृह जनपदों में भेज दिया गया। रात तक ये क्रम जारी था। जो श्रमिक जिस जनपद का था उस जिले के पंडाल में जाकर उसने अपनी स्क्रीनिंग करा ली और कागजी कार्रवाई पूरी कराई। इसके अलावा कई श्रमिक यमुना नदी को पार कर खेतों से होकर झिंझाना के गांव मंसूरा में पहुंचे। जानकारी पर एसडीएम ऊन उद्भव त्रिपाठी और तहसीलदार अजय कुमार को हुई तो उन्होंने श्रमिकों को अहमदगढ़ शेल्टर होम में लाकर स्क्रीनिंग के बाद बस द्वारा उनके गृह जनपद भिजवा दिया।
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ट्रेन की बजाय बस से बलिया भेजे गए बिहार के श्रमिक
कैराना। प्रशासन ने ट्रेन की व्यवस्था ना होती देख बिहार राज्य के 135 प्रवासी श्रमिकों को यूपी रोडवेज की बस के माध्यम से बिहार के बॉर्डर पर बलिया जनपद में भेज दिया। शनिवार को प्रशासन ने बिहार के 71 प्रवासी श्रमिकों को सहारनपुर रेलवे स्टेशन भेज दिया था। रविवार को सहारनपुर में हंगामे के बाद प्रशासन ने बिहार के 111 श्रमिकों को कैराना में ही द न्यू हाईटस एकेडमी में बनाये गये शेल्टर होम पर ठहरा दिया था। सोमवार को हरियाणा से बिहार के ओर भी श्रमिक आ गए थे। जिसके बाद प्रशासन ने बिहार के 135 श्रमिकों को यूपी रोडवेज की चार बसों के द्वारा बिहार के बार्डर पर यूपी के जिला बलिया के लिए रवाना कर दिया।

शामली में झिंझाना के अहमदगढ़ गुरुद्वारा शेल्टर हाउस में बैठे प्रवासी श्रमिक।- फोटो : SHAMLI

शामली में झिंझाना के शेल्टर हाउस के बाहर बसों में चढ़ते श्रमिक।- फोटो : SHAMLI

कैराना शेल्टर होम पर अपनी बच्ची को गोद में उठाए प्रवासी श्रमिक।- फोटो : SHAMLI
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