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क्रांतिकारी चंद्रशेखर का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान
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क्रांतिकारी चंद्रशेखर का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान
वीवी पीजी कॉलेज में ऑनलाइन मनाई गई आजाद की जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत वीवी पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम व द्वितीय इकाई द्वारा संयुक्त रूप से क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की 116वीं जयंती ऑनलाइन मनाई गई।
कार्यक्रम में शनिवार को मुख्य अतिथि मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. भूपेंद्र कुमार ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के जीवन के बारे में विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर सागर, पंकज, सरवर जंग, अंशु, खुशी, तनुश्री, हनी और द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी गिरीश नारायण यादव ने चंद्रशेखर आजाद के बारे में विचार रखे।
राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. छवि ने बताया कि चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा गांव में हुआ था। बचपन में बालक चंद्रशेखर ने खूब धनुष बाण चलाए। जिससे उन्होंने निशानेबाजी बचपन में ही सीख ली थी। बालक चंद्रशेखर आजाद का मन देश को आजाद कराने के अहिंसात्मक उपायों से हटकर सशस्त्र क्रांति की ओर मुड़ गया था। उन्होंने वीरता की नई परिभाषा लिखी थी। उनसे प्रेरणा लेकर हजारों युवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सेदारी की। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए उन्हें याद किया गया तथा देशभक्ति को अपने भीतर समाहित करने की प्रेरणा सभी के अंदर जागृत की गई।
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वीवी पीजी कॉलेज में ऑनलाइन मनाई गई आजाद की जयंती
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत वीवी पीजी कॉलेज की राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम व द्वितीय इकाई द्वारा संयुक्त रूप से क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की 116वीं जयंती ऑनलाइन मनाई गई।
कार्यक्रम में शनिवार को मुख्य अतिथि मां शाकंभरी विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना के समन्वयक डॉ. भूपेंद्र कुमार ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के जीवन के बारे में विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि ऐसे महान क्रांतिकारियों का स्वाधीनता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस अवसर पर सागर, पंकज, सरवर जंग, अंशु, खुशी, तनुश्री, हनी और द्वितीय इकाई के कार्यक्रम अधिकारी गिरीश नारायण यादव ने चंद्रशेखर आजाद के बारे में विचार रखे।
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राष्ट्रीय सेवा योजना की प्रथम इकाई की कार्यक्रम अधिकारी डॉ. छवि ने बताया कि चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को भाबरा गांव में हुआ था। बचपन में बालक चंद्रशेखर ने खूब धनुष बाण चलाए। जिससे उन्होंने निशानेबाजी बचपन में ही सीख ली थी। बालक चंद्रशेखर आजाद का मन देश को आजाद कराने के अहिंसात्मक उपायों से हटकर सशस्त्र क्रांति की ओर मुड़ गया था। उन्होंने वीरता की नई परिभाषा लिखी थी। उनसे प्रेरणा लेकर हजारों युवकों ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सेदारी की। इस दौरान चंद्रशेखर आजाद से जुड़े विभिन्न प्रसंगों पर चर्चा करते हुए उन्हें याद किया गया तथा देशभक्ति को अपने भीतर समाहित करने की प्रेरणा सभी के अंदर जागृत की गई।
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