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सीमा विवाद सुलझने की उम्मीद बढ़ी
शामली/ ब्यूरो/ अमर उजाला
Updated Sun, 17 Jan 2016 12:47 AM IST
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शामली। हरियाणा में गठित हुई भाजपा की सरकार में हरियाणा-यूपी सीमा एवं परिवहन विवाद सुलझने के आसार बनने लगे हैं। भाजपा सांसद हुकुम सिंह और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री संजीव बालियान दोनों प्रदेशों के विवाद सुलझाने के लिए हरियाणा के मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से मिलेंगे। दोनों प्रदेश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श करेंगे।
यूपी और हरियाणा के किसान सीमा एवं परिवहन विवाद से त्रस्त हैं। भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों प्रदेश के किसानों में कई बार टकराव हो चुका है। स्थाई हल के लिए दोनों प्रांतों के मंडलायुक्त से लेकर एसडीएम-सीओ स्तर के अधिकारी वार्ता करके यथावत स्थिति बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन आज तक दोनों प्रांतों के मुख्यमंत्री स्तर तक की संयुक्त बैठक आज तक नहीं हुई।
हालात यह है कि दोनों प्रांतों के किसान इलाहाबाद उच्च न्यायालय और चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में वाद दायर करके न्याय की उम्मीद में है। हरियाणा से दूसरा सीमा विवाद परिवहन विभाग का है। करनाल-शामली जिलों के बीच यमुना नदी पुल बनने के पंद्रह साल के बाद भी सीधी बस सेवा चालू नहीं हो पाई है। परिवहन विवाद के चलते ही पंजाब रोडवेज की शामली तक चली बस पूर्व ही बंद हो चुकी है।
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मुजफ्फरनगर डिपो की तीन बसों का करनाल जिले के परमिट होने के बाद रोडवेज बस शामली से पानीपत से करनाल होकर जाती है। सीधी बस सेवा शामली-करनाल के बीच नहीं होने कारण दोनों प्रांतों की बस यमुना नदी के पुल के अपने क्षेत्रों में बस स्टाप बने हुए है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और कैराना सांसद हुकुम सिंह ने बताया कि वह शीघ्र ही इस मुद्दे पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर एवं परिवहन मंत्री से वार्ता करेंगे।
क्या है हरियाणा सीमा-परिवहन विवाद
जिले के 32 गांवों की 7198.78 एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश से हरियाणा में हस्तांतरित हुई। हरियाणा की पानीपत-करनाल जिलों के 15 गांवों की 163.40 एकड़ भूमि हरियाणा से यूपी के शामली जिले को हस्तांतरित हुई। भू मानचित्र में ओवर लेपिंग होने से भूस्वामित्व को लेकर विवाद है।
सीमा से पिलर्स गायब होने से दोनों तरफ के किसानों में टकराव है। गत 15 सितंबर 2015 को विधानसभा आश्वासन समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश-हरियाणा सीमा विवाद का मुद्दा उठा था, मगर स्थाई हल का निदान आज तक नहीं हुआ। मेरठ-करनाल मार्ग पर हरियाणा-यूपी के परिवहन के परमिट नहीं होने से दोनों प्रांतों की रोडवेज-प्राइवेट बसें सीमा पर यमुना नदी के पुल के दोनों ओर रूक जाती है। हरियाणा के लोगों को यमुना पुल पर उतर पैदल चलकर यूपी की बसो में बैठकर यात्रा करनी पड़ती है, यही हाल यूपी का है।
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यूपी और हरियाणा के किसान सीमा एवं परिवहन विवाद से त्रस्त हैं। भूमि स्वामित्व को लेकर दोनों प्रदेश के किसानों में कई बार टकराव हो चुका है। स्थाई हल के लिए दोनों प्रांतों के मंडलायुक्त से लेकर एसडीएम-सीओ स्तर के अधिकारी वार्ता करके यथावत स्थिति बनाने का प्रयास करते हैं, लेकिन आज तक दोनों प्रांतों के मुख्यमंत्री स्तर तक की संयुक्त बैठक आज तक नहीं हुई।
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हालात यह है कि दोनों प्रांतों के किसान इलाहाबाद उच्च न्यायालय और चंडीगढ़ उच्च न्यायालय में वाद दायर करके न्याय की उम्मीद में है। हरियाणा से दूसरा सीमा विवाद परिवहन विभाग का है। करनाल-शामली जिलों के बीच यमुना नदी पुल बनने के पंद्रह साल के बाद भी सीधी बस सेवा चालू नहीं हो पाई है। परिवहन विवाद के चलते ही पंजाब रोडवेज की शामली तक चली बस पूर्व ही बंद हो चुकी है।
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मुजफ्फरनगर डिपो की तीन बसों का करनाल जिले के परमिट होने के बाद रोडवेज बस शामली से पानीपत से करनाल होकर जाती है। सीधी बस सेवा शामली-करनाल के बीच नहीं होने कारण दोनों प्रांतों की बस यमुना नदी के पुल के अपने क्षेत्रों में बस स्टाप बने हुए है। केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान और कैराना सांसद हुकुम सिंह ने बताया कि वह शीघ्र ही इस मुद्दे पर हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर एवं परिवहन मंत्री से वार्ता करेंगे।
क्या है हरियाणा सीमा-परिवहन विवाद
जिले के 32 गांवों की 7198.78 एकड़ भूमि उत्तर प्रदेश से हरियाणा में हस्तांतरित हुई। हरियाणा की पानीपत-करनाल जिलों के 15 गांवों की 163.40 एकड़ भूमि हरियाणा से यूपी के शामली जिले को हस्तांतरित हुई। भू मानचित्र में ओवर लेपिंग होने से भूस्वामित्व को लेकर विवाद है।
सीमा से पिलर्स गायब होने से दोनों तरफ के किसानों में टकराव है। गत 15 सितंबर 2015 को विधानसभा आश्वासन समिति की बैठक में उत्तर प्रदेश-हरियाणा सीमा विवाद का मुद्दा उठा था, मगर स्थाई हल का निदान आज तक नहीं हुआ। मेरठ-करनाल मार्ग पर हरियाणा-यूपी के परिवहन के परमिट नहीं होने से दोनों प्रांतों की रोडवेज-प्राइवेट बसें सीमा पर यमुना नदी के पुल के दोनों ओर रूक जाती है। हरियाणा के लोगों को यमुना पुल पर उतर पैदल चलकर यूपी की बसो में बैठकर यात्रा करनी पड़ती है, यही हाल यूपी का है।