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Shamli News: वादे पर वादा, मगर पूरा एक भी नहीं, नतीजा सड़कों पर उतरा किसान
Tue, 08 Oct 2024 02:38 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 08 Oct 2024 02:38 AM IST
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शामली में कलक्ट्रेट का गेट बंद होने पर हंगामा करते किसान । संवाद
शामली। बकाया गन्ना भुगतान को लेकर शुगर मिल और जिला प्रशासन की हीलाहवाली के कारण ही सोमवार को जिले के किसान मिल से उठकर सड़क पर उतरने को मजबूर हुए। बार-बार वादा खिलाफी किसानों को नागवार गुजरी और गुस्साए किसानों ने दिल्ली-सहारनपुर, मुजफ्फरनगर हाईवे पर धरना दिया। यदि मिल प्रशासन वादा पूरा करने की कोशिश करता तो शायद यह नौबत नहीं आती।
दरअसल, अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल से करीब 75 हजार शामली और आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हुए हैं। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है, जिसमें से मिल 50 हजार क्विंटल से अधिक की पेराई करता है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलो में गिनी जाती है। मगर पिछले करीब दस साल से मिल को किसी की नजर लग गई। किसानों को धरने प्रदर्शन के बाद ही गन्ने का बकाया भुगतान किया जाता है।
हाल ही में सरशादी ग्रुप की शुगर मिल के शेयर त्रिवेणी ग्रुप ने खरीद लिए थे। उस समय किसानों को उम्मीद लगी थी कि अब उनका बकाया भुगतान जल्द ही हो जाएगा। मगर त्रिवेणी ग्रुप के अधिकारी भी बकाया भुगतान करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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करीब ढाई माह पहले ही मिल के पूर्व यूनिट हेड अनिल त्यागी ने 15 अक्तूबर तक किश्तों में किसानों का सम्पूर्ण बकाया भुगतान करने का वायदा किसानों से किया था। मगर नहीं किया गया। अब हाल ही में दूसरे यूनिट हेड ने दो किश्तों में 25 करोड़ रुपये का भुगतान करने का वायदा किया था, मगर उस पर भी अधिकारी खरे नहीं उतरे। जिस पर 11 दिन से मिल परिसर में धरना दे रहे किसानों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। और गुस्साएं किसान सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।
किसान वीरेद्र कुमार, मनीष, सत्यपाल का कहना है कि यदि मिल प्रशासन थोड़ा भी भुगतान किसानों को करता तो उन्हें परेशानी नहीं होती। त्रिवेणी ग्रुप से उन्हें काफी उम्मीद थी मगर अधिकारियों ने उम्मीदोंं पर पानी फेर दिया। अब वह जब तक भुगतान नहीं हो जाता, धरना जारी रखेंगे। उधर, मिल के अधिकारियों का कहना है कि दो किश्तों में किसानों को 25 करोड़ का भुगतान प्रथम चरण में किया जाएगा। संवाद
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इस साल भी 13 बार हुई प्रशासन की मौजूदगी में वार्ता, हल नहीं निकला
इस साल भी बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर एडीएम और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों ने मिल प्रशासन से वार्ता की। मिल प्रशासन ने जल्द भुगतान का वायदा तो हर बार किया मगर भुगतान नही किया गया। जिसको लेकर किसानों में रोष है। किसानों ने बताया कि इस साल 13 से अधिक वार्ता तो प्रशासन की मौजूदगी में हो चुकी है।
चीनी के रेट कम होने पर अधिक खराब हुई मिल की स्थिति
किसान सोहनवीर, प्रकाश का कहना है कि करीब दस साल पूर्व चीनी के रेट अचानक ही कम हो गए थे। जिसके बाद से शामली शुगर मिल की हालत खराब होनी शुरू हो गई थी। इसके अलावा मिल के जो बाॅयलर हाउस और अन्य उपकरण है, वह पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जिसके कारण चलने के बाद समय-समय पर मिल में खराबी आती रहती है। इससे पेराई सत्र प्रभावित होता है।
....
किसानों और एसडीएम के बीच कुछ यूं वार्ता हुई
शामली-सहारनपुर, मुजफ्फरनगर हाईवे पर धरना देकर बैठे किसानों से तीन बार वार्ता करने के लिए एसडीएम हामिद हुसैन और कोतवाली प्रभारी समयपाल अत्री पहुंचे। किसानों और एसडीएम के बीच कुछ यूं वार्ता हुई...
एसडीएम: आपकी क्या मांगे हैं, मैं डीएम साहब के सामने रखता हूं
किसान: सभी को पता है हमारी क्या मांगे हैं, बकाया भुगतान दिला दो, हम यहांं से चले जायेंगे
एसडीएम : पांच किसान वार्ता के लिए कलक्ट्रेट में आ जाइए
किसान : क्यों, सभी किसानों के सामने ही डीएम आए और समस्या का समाधान बताएं
एसडीएम: प्लीज, पांच किसानों का प्रतिनिधि मंडल बना लें, सभी की समस्या का समाधान कराया जाएगा
किसान: नहीं, जो भी कुछ होगा वह किसानों के बीच ही होगा, हम अकेले कहीं नहीं जायेंगे
एसडीएम : बहुत देर हो गई हाईवे जाम को
किसान : तुम अधिकारी पूर्व में भी समाधान का आश्वासन दे चुके हो मगर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है और कुछ नहीं, हम हाईवे से नहीं हटेंगे।
पूर्व में किसानों द्वारा बकाया भुगतान को लेकर किए गए आंदोलन
- वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था।
-वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था।
-वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था।
2020 में 13 से 30 जनवरी तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया ।
: 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था।
: 2024 : में 2 सितंबर से 27 सितंबर तक शामली मिल परिसर में खाप चौधरी और किसानों ने धरना दिया
: 2024 अक्तूबर माह में शामली मिल परिसर में 11 दिन तक धरना चला जो अभी तक चल रहा।
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दरअसल, अपर दोआब शुगर मिल की स्थापना वर्ष 1931 में की गई थी। जबकि मिल 1933 में चालू हुई थी। मिल से करीब 75 हजार शामली और आसपास क्षेत्र के किसान जुड़े हुए हैं। मिल की पेराई क्षमता करीब 75 हजार क्विंटल है, जिसमें से मिल 50 हजार क्विंटल से अधिक की पेराई करता है। मिल एशिया की सबसे पुरानी मिलो में गिनी जाती है। मगर पिछले करीब दस साल से मिल को किसी की नजर लग गई। किसानों को धरने प्रदर्शन के बाद ही गन्ने का बकाया भुगतान किया जाता है।
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हाल ही में सरशादी ग्रुप की शुगर मिल के शेयर त्रिवेणी ग्रुप ने खरीद लिए थे। उस समय किसानों को उम्मीद लगी थी कि अब उनका बकाया भुगतान जल्द ही हो जाएगा। मगर त्रिवेणी ग्रुप के अधिकारी भी बकाया भुगतान करने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
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करीब ढाई माह पहले ही मिल के पूर्व यूनिट हेड अनिल त्यागी ने 15 अक्तूबर तक किश्तों में किसानों का सम्पूर्ण बकाया भुगतान करने का वायदा किसानों से किया था। मगर नहीं किया गया। अब हाल ही में दूसरे यूनिट हेड ने दो किश्तों में 25 करोड़ रुपये का भुगतान करने का वायदा किया था, मगर उस पर भी अधिकारी खरे नहीं उतरे। जिस पर 11 दिन से मिल परिसर में धरना दे रहे किसानों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। और गुस्साएं किसान सड़क पर उतरने को मजबूर हुए।
किसान वीरेद्र कुमार, मनीष, सत्यपाल का कहना है कि यदि मिल प्रशासन थोड़ा भी भुगतान किसानों को करता तो उन्हें परेशानी नहीं होती। त्रिवेणी ग्रुप से उन्हें काफी उम्मीद थी मगर अधिकारियों ने उम्मीदोंं पर पानी फेर दिया। अब वह जब तक भुगतान नहीं हो जाता, धरना जारी रखेंगे। उधर, मिल के अधिकारियों का कहना है कि दो किश्तों में किसानों को 25 करोड़ का भुगतान प्रथम चरण में किया जाएगा। संवाद
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इस साल भी 13 बार हुई प्रशासन की मौजूदगी में वार्ता, हल नहीं निकला
इस साल भी बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर एडीएम और अन्य अधिकारियों की मौजूदगी में किसानों ने मिल प्रशासन से वार्ता की। मिल प्रशासन ने जल्द भुगतान का वायदा तो हर बार किया मगर भुगतान नही किया गया। जिसको लेकर किसानों में रोष है। किसानों ने बताया कि इस साल 13 से अधिक वार्ता तो प्रशासन की मौजूदगी में हो चुकी है।
चीनी के रेट कम होने पर अधिक खराब हुई मिल की स्थिति
किसान सोहनवीर, प्रकाश का कहना है कि करीब दस साल पूर्व चीनी के रेट अचानक ही कम हो गए थे। जिसके बाद से शामली शुगर मिल की हालत खराब होनी शुरू हो गई थी। इसके अलावा मिल के जो बाॅयलर हाउस और अन्य उपकरण है, वह पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जिसके कारण चलने के बाद समय-समय पर मिल में खराबी आती रहती है। इससे पेराई सत्र प्रभावित होता है।
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किसानों और एसडीएम के बीच कुछ यूं वार्ता हुई
शामली-सहारनपुर, मुजफ्फरनगर हाईवे पर धरना देकर बैठे किसानों से तीन बार वार्ता करने के लिए एसडीएम हामिद हुसैन और कोतवाली प्रभारी समयपाल अत्री पहुंचे। किसानों और एसडीएम के बीच कुछ यूं वार्ता हुई...
एसडीएम: आपकी क्या मांगे हैं, मैं डीएम साहब के सामने रखता हूं
किसान: सभी को पता है हमारी क्या मांगे हैं, बकाया भुगतान दिला दो, हम यहांं से चले जायेंगे
एसडीएम : पांच किसान वार्ता के लिए कलक्ट्रेट में आ जाइए
किसान : क्यों, सभी किसानों के सामने ही डीएम आए और समस्या का समाधान बताएं
एसडीएम: प्लीज, पांच किसानों का प्रतिनिधि मंडल बना लें, सभी की समस्या का समाधान कराया जाएगा
किसान: नहीं, जो भी कुछ होगा वह किसानों के बीच ही होगा, हम अकेले कहीं नहीं जायेंगे
एसडीएम : बहुत देर हो गई हाईवे जाम को
किसान : तुम अधिकारी पूर्व में भी समाधान का आश्वासन दे चुके हो मगर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है और कुछ नहीं, हम हाईवे से नहीं हटेंगे।
पूर्व में किसानों द्वारा बकाया भुगतान को लेकर किए गए आंदोलन
- वर्ष 2017 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 17 दिन तक धरना दिया था।
-वर्ष 2018 में बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सवित मलिक के नेतृत्व में किसानों ने कलक्ट्रेट पर 19 दिन तक धरना दिया था। जिसके बाद किसानों को बकाया 120 करोड़ का भुगतान दिया गया था।
-वर्ष 2018 में ही बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर किसानों ने 12 दिन तक धरना दिया था।
2020 में 13 से 30 जनवरी तक किसानों ने बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर धरना दिया ।
: 2022 में तहसील में किसानों ने 6 दिन तक धरना दिया था।
: 2024 : में 2 सितंबर से 27 सितंबर तक शामली मिल परिसर में खाप चौधरी और किसानों ने धरना दिया
: 2024 अक्तूबर माह में शामली मिल परिसर में 11 दिन तक धरना चला जो अभी तक चल रहा।

शामली में कलक्ट्रेट का गेट बंद होने पर हंगामा करते किसान । संवाद