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जलसे में 165 तलबाओं की दस्तारबंदी
ब्यूरो/अमर उजाला, शामली
Updated Wed, 04 May 2016 11:20 PM IST
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Dastarbandi
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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जलालाबाद। कस्बे के मदरसा मिफताहुल उलूम में तलबाओं को बुखारी शरीफ का आखिरी दर्स दिया गया। जिसमें इस साल फारिग हुए 165 तलबाओं की दस्तारबंदी की गई।
बुधवार को मदरसा मिफताहुल उलूम में बुखारी शरीफ का आगाज कारी मौहम्मद उमर साहब द्वारा कुराने करीम की तिलावत के साथ किया गया। बुखारी शरीफ का आखिरी सबक मौलाना अकीलुर्रहमान साहब द्वारा तलबाओं को पढ़ाया गया। मौलाना अकीलुर्रहमान साहब ने कहा कि बुखारी शरीफ हदीस की सबसे बड़ी किताब है, इसलिए इसकी बातों पर अमल कर दीन के रास्ते पर चलें और इसे दुनिया में आम करें। हजरत इमाम बुखारी ने अपनी पूरी जिंदगी हदीस को हासिल करने व लोगों तक पहुंचाने में खर्च कर दी।
इस दौरान तलबाओं को नसीहत देते हुए कहा कि आप लोगों पर पूरे मुल्क की नहीं, दुनिया की जिम्मेदारी है। इस्लाम धर्म शांति का पैगाम देता है। इस दौरान 165 तलबाओं की दस्तारबंदी की गई। जिसमें 15 हाफिज, 33 मुफ्ती, 117 मौलवी फारिग हुए। इस दौरान मदरसे के मोहतमीम मौलाना हफीउल्लाह शेरवानी, मौलाना वलीउल्लाह उस्ताद, कारी गुलजार, मौलवी रिजवान, मौलवी रफीउज्जमा, मौहम्मद शब्बीर, मौलाना अब्दुर्रहीम, मौलाना नजीलुर्रहमान, मौहम्मद याकूब आदि मौजूद रहे।
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बुधवार को मदरसा मिफताहुल उलूम में बुखारी शरीफ का आगाज कारी मौहम्मद उमर साहब द्वारा कुराने करीम की तिलावत के साथ किया गया। बुखारी शरीफ का आखिरी सबक मौलाना अकीलुर्रहमान साहब द्वारा तलबाओं को पढ़ाया गया। मौलाना अकीलुर्रहमान साहब ने कहा कि बुखारी शरीफ हदीस की सबसे बड़ी किताब है, इसलिए इसकी बातों पर अमल कर दीन के रास्ते पर चलें और इसे दुनिया में आम करें। हजरत इमाम बुखारी ने अपनी पूरी जिंदगी हदीस को हासिल करने व लोगों तक पहुंचाने में खर्च कर दी।
इस दौरान तलबाओं को नसीहत देते हुए कहा कि आप लोगों पर पूरे मुल्क की नहीं, दुनिया की जिम्मेदारी है। इस्लाम धर्म शांति का पैगाम देता है। इस दौरान 165 तलबाओं की दस्तारबंदी की गई। जिसमें 15 हाफिज, 33 मुफ्ती, 117 मौलवी फारिग हुए। इस दौरान मदरसे के मोहतमीम मौलाना हफीउल्लाह शेरवानी, मौलाना वलीउल्लाह उस्ताद, कारी गुलजार, मौलवी रिजवान, मौलवी रफीउज्जमा, मौहम्मद शब्बीर, मौलाना अब्दुर्रहीम, मौलाना नजीलुर्रहमान, मौहम्मद याकूब आदि मौजूद रहे।
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