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Shamli News: किसानों की अतिरिक्त अधिग्रहित भूमि के मुआवजे की प्रक्रिया शुरु
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- लंबे अरसे तक किसानों ने अतिरिक्त भूमि के मुआवजे के लिए किया था आंदोलन
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित अतिरिक्त भूमि के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरु हो गई है। बुधवार को एनएचएआई की ओर से 13 हेक्टेयर से अधिक भूमि के विवरण का गजट जारी कर किसानों से 21 दिन के भीतर आपत्ति मांगी हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद मुआवजा निर्धारित कर वितरण किया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए एनएचएआई को 22 गांव की 215.74 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना था। किसानों का आरोप था कि एनएचएआई ने चिन्हित भूमि से अधिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया था। जिसके विरोध में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन शुरु कर दिया था। लंबे आंदोलन के बाद प्रशासन की ओर से भूमि की पैमाइश कराई गई। जिसमें करीब 13.87 हेक्टेयर भूमि अतिरिक्त अधिग्रहित मिली। जिसके बाद प्रशासन ने इस भूमि का मुआवजा जारी करने का प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा था। किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक ने बताया कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को एनएचएआई ने मान लिया है।
2024 तक निर्माण का लक्ष्य किया गया था निर्धारित
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे भारत माला परियोजना के तहत प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले 13 हजार करोड़ रुपये की लागत के इस हाईवे के निर्माण की घोषणा की थी। वर्ष 2024 तक इसके निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया था। मुआवजे वृद्धि व अन्य मांगों को लेकर किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। वह निर्माण कंपनी को कार्य शुरू नहीं करने दे रहे थे।
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बुटराड़ा में 48 दिन तक किसानों ने धरना दिया था। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू हो गया था। यहां भी किसानों की मुआवजे संबंधी समस्याओं के निस्तारण की मांग उठी थी। पानीपत-खटीमा हाईवे पर चक्का जाम के बाद प्रशासन ने कई मांगों पर सहमति जताई थी। जिसके बाद राकेश टिकैत ने धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी थी।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए अधिग्रहित अतिरिक्त भूमि के मुआवजा वितरण की प्रक्रिया शुरु हो गई है। बुधवार को एनएचएआई की ओर से 13 हेक्टेयर से अधिक भूमि के विवरण का गजट जारी कर किसानों से 21 दिन के भीतर आपत्ति मांगी हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद मुआवजा निर्धारित कर वितरण किया जाएगा।
दिल्ली-देहरादून ग्रीन फील्ड इकोनॉमिक कॉरिडोर के लिए एनएचएआई को 22 गांव की 215.74 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करना था। किसानों का आरोप था कि एनएचएआई ने चिन्हित भूमि से अधिक भूमि का अधिग्रहण कर लिया था। जिसके विरोध में किसान संघर्ष समिति के बैनर तले आंदोलन शुरु कर दिया था। लंबे आंदोलन के बाद प्रशासन की ओर से भूमि की पैमाइश कराई गई। जिसमें करीब 13.87 हेक्टेयर भूमि अतिरिक्त अधिग्रहित मिली। जिसके बाद प्रशासन ने इस भूमि का मुआवजा जारी करने का प्रस्ताव एनएचएआई को भेजा था। किसान संघर्ष समिति के सचिव विदेश मलिक ने बताया कि किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग को एनएचएआई ने मान लिया है।
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2024 तक निर्माण का लक्ष्य किया गया था निर्धारित
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर एक्सप्रेसवे भारत माला परियोजना के तहत प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के मंत्री नितिन गडकरी ने वर्ष 2019 में लोकसभा चुनाव से पहले 13 हजार करोड़ रुपये की लागत के इस हाईवे के निर्माण की घोषणा की थी। वर्ष 2024 तक इसके निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया था। मुआवजे वृद्धि व अन्य मांगों को लेकर किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया था। वह निर्माण कंपनी को कार्य शुरू नहीं करने दे रहे थे।
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बुटराड़ा में 48 दिन तक किसानों ने धरना दिया था। भाकियू प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में कलक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू हो गया था। यहां भी किसानों की मुआवजे संबंधी समस्याओं के निस्तारण की मांग उठी थी। पानीपत-खटीमा हाईवे पर चक्का जाम के बाद प्रशासन ने कई मांगों पर सहमति जताई थी। जिसके बाद राकेश टिकैत ने धरना समाप्त करने की घोषणा कर दी थी।