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बिजली अफसरों पर 2.10 लाख जुर्माना
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Tue, 10 Jan 2017 12:04 AM IST
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शामली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने विद्युत निगम के तीन अफसरों पर 2.10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। गांव राजपुर छाजपुर जिला मुजफ्फरनगर निवासी स्वतंत्रवीर आर्य ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अवर अभियंता, अधिशासी अभियंता द्वितीय खंड, अधीक्षण अभियंता मुजफ्फरनगर हाल निवासी शामली को आरोपी बनाकर वाद दायर किया गया।
किसान के मुताबिक उसने खेतों की सिंचाई के लिए विद्युत कनेक्शन लिया था। जिसकी लाइन गांव से होकर जा रही विद्युत लाइन से जुड़ी थी। वोल्टेज कम होने और ट्रांसफार्मर बार-बार फुंक जाने से खेतों की सिंचाई नहीं हो रही थी। अधिकारियों से शिकायत के साथ-साथ अधिवक्ताओं से नोटिस भिजवाए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
सिंचाई के अभाव में 1999 में फसल सूख जाने से उसे 3.60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। किसान ने मानसिक क्षति पूर्ति 50 हजार समेत कुल धनराशि 5,60495 रुपये और 16 अप्रैल 1991 के बाद से विद्युत कनेक्शन न होने के कारण किसी प्रकार की वसूली रोकने की मांग की।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव, सदस्य श्रवण कुमार ने मामले की सुनाई करते हुए खेतों की सिंचाई में खर्च के नुकसान की क्षतिपूर्ति 1.50 लाख, मानसिक क्षतिपूर्ति 50 हजार रुपये, वाद व्यय 10 हजार तीस दिन में आरोपियों से पीड़ित को अदा करने के आदेश दिए। ऐसा नहीं करने पर कुल देय धनराशि 2.10 लाख रुपये पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करेंगे।
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किसान के मुताबिक उसने खेतों की सिंचाई के लिए विद्युत कनेक्शन लिया था। जिसकी लाइन गांव से होकर जा रही विद्युत लाइन से जुड़ी थी। वोल्टेज कम होने और ट्रांसफार्मर बार-बार फुंक जाने से खेतों की सिंचाई नहीं हो रही थी। अधिकारियों से शिकायत के साथ-साथ अधिवक्ताओं से नोटिस भिजवाए गए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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सिंचाई के अभाव में 1999 में फसल सूख जाने से उसे 3.60 लाख रुपये का नुकसान हुआ। किसान ने मानसिक क्षति पूर्ति 50 हजार समेत कुल धनराशि 5,60495 रुपये और 16 अप्रैल 1991 के बाद से विद्युत कनेक्शन न होने के कारण किसी प्रकार की वसूली रोकने की मांग की।
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जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम के अध्यक्ष एसकेएस यादव, सदस्य श्रवण कुमार ने मामले की सुनाई करते हुए खेतों की सिंचाई में खर्च के नुकसान की क्षतिपूर्ति 1.50 लाख, मानसिक क्षतिपूर्ति 50 हजार रुपये, वाद व्यय 10 हजार तीस दिन में आरोपियों से पीड़ित को अदा करने के आदेश दिए। ऐसा नहीं करने पर कुल देय धनराशि 2.10 लाख रुपये पर 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज अदा करेंगे।