फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   politics Moving around the Chabutra and Choupal

चबूतरा और चौपाल के इर्द गिर्द घूमती रही है कैराना की सियासत

Mon, 07 May 2018 12:11 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Mon, 07 May 2018 12:11 AM IST
विज्ञापन
politics Moving around the Chabutra and Choupal
कैराना की कलस्यान चौपाल। - फोटो : अमर उजाला
शामली के कैराना में हिंदू गुर्जरों की कलस्यान चौपाल और मुस्लिम गुर्जरों का चबूतरा, इन्हीं के इर्द गिर्द कैराना की सियासत घूमती रही है। सियासत एक बार फिर इतिहास को दोहरा रही है। कैराना की राजनीति के धुर विरोधी हुुकम सिंह और मुनव्वर हसन जब आमने-सामने होते थे तो चौपाल और चबूतरा पर ही सारी रणनीति तय की जाती थी। इस बार इन्हीं दोनों परिवार की महिलाएं चुनावी मैदान में आमने सामने हैं। चुनाव तो दो जिलों की पांच विधान सभाओं में लड़ा जाएगा, लेकिन वार रूम चौपाल और चबूतरा ही होंगे।
विज्ञापन
कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा की तरफ से मृगांका सिंह प्रत्याशी हैं, तो गठबंधन की तरफ से तबस्सुम हसन प्रत्याशी घोषित हो चुकी हैं। तबस्सुम हसन रालोद के सिंबल पर चुनाव लड़ेंगी। खास बात यह है कि मृगांका सिंह अपनी राजनीतिक सफर का दूसरा चुनाव लड़ रही हैं, तबस्सुम हसन भी दूसरी बार लोकसभा के चुनाव में दूसरी बार उतरी हैं। दोनों ही महिलाओं को राजनीतिक समझ विरासत में मिली है। मृगांका सिंह के पिता बाबू हुकुम सिंह कैराना सीट से सात बार विधायक और एक बार सांसद चुने गए। वह 1985 में कांग्रेस की प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। बाद में भाजपा में आने पर राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री काल में मंत्री रहे और फिर विधान मंडल दल के उपनेता और नेता भी रहे।
विज्ञापन
तबस्सुम हसन के ससुर चौधरी अख्तर हसन सांसद रह चुके हैं। उनके पति मुनव्वर हसन कैराना से दो बार विधायक, दो बार सांसद, एक-एक बार राज्य सभा और विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं। हिन्दू गुर्जरों की निष्ठा कलस्यान चौपाल में है, तो मुसलिम गुर्जरों की चबूतरे पर। यह बात अलग है कि दोनों ही कलस्यान खाप से हैं। इन्हीं दोनों स्थानों पर कैराना की राजनीतिक केंद्रित रही। अब फिर से तय हो गया है कि कैराना सीट के उपचुनाव में भी परिणाम चाहे जो भी हों, जीत भाजपा की हो या गठबंधन प्रत्याशी की, लेकिन कैराना की सियासत का रिमोट तो चौपाल और चबूतरे के हाथ में ही रहेगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
हुकुम परिवार सियासी सफर 1974 में पहली बार हुकुम सिंह कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने। 1980 में जनता पार्टी (एस) और 1985 में फिर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। इसके बाद भाजपा में आने पर 1996, 2002, 2007, 2012 में कैराना सीट से विधायक चुने गए। 2014 के लोकसभा चुनाव में कैराना सीट से सांसद चुने गए। इसके बाद हुकुम सिंह ने राजनीतिक विरासत को बेटी मृगांका सिंह के हाथ में सौंपने का निर्णय लिया और 2017 के विधानसभा चुनाव में मृगांका सिंह को कैराना विधानसभा सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन मृगांका सिंह चुनाव जीत नहीं सकीं। हुकुम सिंह का निधन होने के बाद खाली हुई कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में अब मृगांका सिंह भाजपा प्रत्याशी के तौर पर चुनाव मैदान में आ चुकी हैं।
हसन परिवार का सियासी सफर 1984 में चौधरी अख्तर हसन कांग्रेस के टिकट पर सांसद चुने गए। उनकी राजनीतिक विरासत उनके बेटे चौधरी मुनव्वर हसन ने संभाली और 1991 में पहली बार कैराना सीट से विधानसभा चुनाव लड़कर विधायक बने, तब उन्होंने हुकुम सिंह को हराया था। इसके बाद 1993 में भी मुनव्वर हसन विधायक बने। 1996 में कैराना लोकसभा सीट से सपा के टिकट पर और फिर 2004 में सपा-रालोद गठबंधन के टिकट पर मुजफ्फरनगर से सांसद चुने गए। इसके अलावा राज्य सभा और विधान परिषद सदस्य भी रहे। वहीं, 2009 में मुनव्वर हसन की पत्नी तबस्सुम हसन बसपा के टिकट पर कैराना लोकसभा सीट से सांसद चुनी गईं। वहीं, 2014 में सांसद बनने पर हुकुम सिंह के इस्तीफे के कारण खाली हुई कैराना विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हुआ, तो उसमें तबस्सुम हसन के बेटे नाहिद हसन विधायक बने और फिर 2017 के विधानसभा चुनाव में भी सपा के टिकट पर नाहिद हसन चुनाव जीतकर विधायक बने।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed