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दंगा प्रभावित गांवों में नहीं हुआ ध्रुवीकरण

Mon, 28 May 2018 11:33 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली
ब्यूरो, अमर उजाला/ शामली Updated Mon, 28 May 2018 11:33 PM IST
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Polarization did not happen in riot affected villages
गांव लांक में चुनावी चर्चा करते ग्रामीण। - फोटो : अमर उजाला
शामली में कैराना लोकसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने मुजफ्फरनगर दंगे, दंगों के मुकदमे की वापसी का हवाला दिया। लेकिन जाट बहुल दंगा प्रभावित गांवों में ही यह दांव चलता नहीं दिखा। सोमवार को जब मतदान हुआ, तो दंगा प्रभावित गांवों में तस्वीर पिछली बार से कुछ अलग ही नजर आई। रालोद यहां वापसी करता नजर आया।
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वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान गांव बहावड़ी, लांक और लिसाढ़ में भी घटनाएं हुई थीं। दंगों के दौरान 1500 से ज्यादा लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए थे। जाट बिरादरी के काफी लोग गिरफ्तार कर जेल भेजे गए थे। इसी को लेकर भाजपा ने बड़ा मुद्दा बनाया था। भाजपा नेताओं ने मुकदमे वापसी की प्रक्रिया शुरू कराने की दलीलें भी दी थीं, ताकि जाट बिरादरी के मतदाताओं का रुख भाजपा की तरफ ही रहे। बावजूद इसके सोमवार को जब मतदान हुआ, तो इन तीनों ही गांवों में जाट बिरादरी के मतदाताओं का रुझान भाजपा की तरफ कम, रालोद की तरफ ज्यादा दिखाई दिया। गांव बहावड़ी में विक्रम सिंह, राजेंद्र सिंह, भंवर सिंह, महेंद्र, कजगमेर सिंह, धर्मवीर और रामेश्वर सिंह का कहना था कि इस बार तो हम अपने चौधरी के साथ हैं।
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लिसाढ़ में रहता है एकमात्र मुसलिम परिवार शामली। मुजफ्फरनगर दंगे के दौरान लिसाढ़ गांव से मुसलिमों के परिवार पलायन करके कांधला चले गए थे। उनमें से बशीर अहमद के परिवार को गांव के लोग मनुहार करके गांव में लौटा लाए थे। सोमवार को बशीर अहमद के बेटे इस्लाम और परिवार के अन्य सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया। इस दौरान इस्लाम ने कहा कि हमें गांव में किसी तरह की दिक्कत नहीं है और आराम से रहते हैं। गांव वाले भी पूरा सहयोग करते हैं।
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गुर्जर बहुल गांवों में रही सहानुभूति की लहर शामली। सांसद हुकुम सिंह के निधन के बाद हुए कैराना लोकसभा सीट के उपचुनाव में गुर्जर बहुल गांवों में सहानुभूति की लहर देखने को मिली। खासकर गुर्जर बिरादरी के मतदाताओं ने मतदान में पूरा उत्साह दिखाया। यही वजह रही कि सुबह सात बजे से ही गुर्जर बहुल गांवों में मतदान के लिए मतदाताओं की लाइन लगी और शाम तक लाइन लगी रही। कैराना लोकसभा क्षेत्र में पांचों विधानसभा क्षेत्रों में गुर्जर बिरादरी की करीब डेढ़ लाख वोट मानी जाती है। भाजपा ने भी गुर्जर बिरादरी के मतदाताओं की संख्या और सहानुभूति को देखते हुए पूर्व सांसद दिवंगत बाबू हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को चुनाव मैदान में उतारा। उसका असर गुर्जर बहुल गांवों में काफी हद तक देखने को मिला।
गांव कंडेला में 2017 में विधानसभा चुनाव में जहां 76 प्रतिशत चुनाव हुआ, वही सोमवार को 85 प्रतिशत वोट डाले गए। ऊंचागांव में 65 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि अब 80 प्रतिशत हो गया। इनके अलावा गांव हिंगोखड़ी में 86 प्रतिशत, जगनपुर में 79 प्रतिशत, गांव रामड़ा में 90 प्रतिशत , बुच्चाखेड़ी में 77 प्रतिशत मतदान बताया गया है। इसी तरह सहारनपुर के गांव जानखेड़ा में 75 प्रतिशत और बांदूखेड़ी में 64 प्रतिशत मतदान बताया जा रहा है।
म्हारा बाबूजी नहीं रहा, इब तो या ही म्हारी बाबूजी है... गांव कंड़ेला निवासी 80 वर्ष के बाबा बुंदी ने कहा कि म्हारा बाबूजी हर टेम सुख-दुख में साथ रहता था। भगवान ने उसे अपने पास बुला लिया। इब तो मृगांका ही म्हारी बाबूजी है। यही बात सोचकर हमने वोट डाला।
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