{"_id":"6186c0a3edbe83498f509970","slug":"poison-increasing-in-the-air-aqi-reached-beyond-300-shamli-news-mrt56376330","type":"story","status":"publish","title_hn":"हवा में बढ़ता जा रहा जहर, 300 के पार पहुंचा एक्यूआई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हवा में बढ़ता जा रहा जहर, 300 के पार पहुंचा एक्यूआई
विज्ञापन
शामली में शनिवार रात छाई धुंध के बीच गुजरते वाहन।
- फोटो : SHAMLI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली। दीपावली के बाद हवा में जहर निरंतर बढ़ता जा रहा है। शनिवार को भी सुबह के समय आसमान में स्मॉग छाया रहा। जिले का एक्यूआई 308 तक पहुंच गया। सुबह सैर सपाटे पर निकलने वाले लोगों की संख्या भी कम रही। खासतौर से वह लोग बाहर निकलने से बच रहे हैं, जिनको हृदय और श्वांस संबंधी बीमारियां हैं। स्मॉग से आंखों में जलन, सांस संबंधी परेशानियां, फेफड़ों में संक्रमण, घबराहट, सिरदर्द, तनाव, अनिद्रा, चिड़चिड़ापन और त्वचा संबंधी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। निजी चिकित्सकों के यहां मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
इस लिए छाई है धुंध
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक विकास मलिक के अनुसार निर्माण कार्य, वाहनों के धुएं और फसलों का वेस्ट जलाने के कारण पार्टीकुलेट मेटर निकलते हैं जो हवा में घुल जाते हैं। अमूमन हवा चलने और मौसम में कम नमी होने के कारण यह कण बह जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों हवा की गति 0-3 किमी. प्रति घंटा है। धूल के कणों के साथ मिलकर इसकी एक लेयर वातावरण में बन जाती हैै। इस कारण सूरज की रोशनी भी पूरी नहीं आ पाती। ओस के साथ इसके कण नीचे आते हैं। इसलिए सुबह-सुबह बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है।
सेहत के लिए बेहद खतरनाक
स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है और हवा की गति कम होती है, यह धुआं और धुंध एक जगह स्थिर होकर स्मॉग बनाती है।
विज्ञापन
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ.पंकज गर्ग ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर बुखार भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह होते हैं। दिल के मरीजों के लिए भी यह काफी खतरनाक है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि स्मॉग से आंखों की नमी प्रभावित होती है। इससे आंखों में चिकनाहट कम होने लगती है और सूखापन आने लगता है। आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, सूजन, जलन, खुजली जैसी तमाम समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इससे बचने के लिए दिन में आंखों को कई बार धोएं। घर से निकलते समय गॉगल्स का प्रयोग जरूर करें। आई ड्रॉप के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।
ये सावधानियां बरतें
- सुबह- शाम टहलने से बचें, घरों की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें
- बाहर से आने पर गुनगुने पानी से मुंह-आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और नियमित लें
जिले का एक्यूआई
1 नवंबर 210
2 नवबर 212
3 नवंबर 221
4 नवंबर 235
5 नवंबर 275
6 नवंबर 308
नोट: एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई ) पीएम 10 और पीएम 2.5 की औसत वेल्यू दर्शाता है।
हवा की गुणवत्ता: 0-50 अच्छा, 51-100 औसत, 101-200 मॉडरेट, 201-300 बुरा, 301-400 बहुत बुरा, 401 से अधिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक
विज्ञापन
इस लिए छाई है धुंध
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक विकास मलिक के अनुसार निर्माण कार्य, वाहनों के धुएं और फसलों का वेस्ट जलाने के कारण पार्टीकुलेट मेटर निकलते हैं जो हवा में घुल जाते हैं। अमूमन हवा चलने और मौसम में कम नमी होने के कारण यह कण बह जाते हैं। उन्होंने बताया कि इन दिनों हवा की गति 0-3 किमी. प्रति घंटा है। धूल के कणों के साथ मिलकर इसकी एक लेयर वातावरण में बन जाती हैै। इस कारण सूरज की रोशनी भी पूरी नहीं आ पाती। ओस के साथ इसके कण नीचे आते हैं। इसलिए सुबह-सुबह बाहर निकलना खतरनाक हो सकता है।
विज्ञापन
सेहत के लिए बेहद खतरनाक
स्मॉग में पानी की बूंदों के साथ धूल और हवा में मौजूद जहरीले तत्व जैसे नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑर्गेनिक कंपाउंड मिलकर नीचे की तरफ गहरी परत बना लेते हैं। सर्दियों के दौरान जब भारी यातायात, उच्च तापमान आदि के कारण वातावरण में प्रदूषण बढ़ता है और हवा की गति कम होती है, यह धुआं और धुंध एक जगह स्थिर होकर स्मॉग बनाती है।
विज्ञापन
छाती रोग विशेषज्ञ डॉ.पंकज गर्ग ने बताया कि स्मॉग से खांसी, गले और छाती में संक्रमण आदि बीमारियां हो सकती हैं। जिन लोगों को अस्थमा है उनके लिए यह काफी खतरनाक है। स्मॉग के कारण सांस लेने में दिक्कत होने पर बुखार भी हो सकता है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, सांस के मरीजों के लिए ये कण ज्यादा नुकसानदेह होते हैं। दिल के मरीजों के लिए भी यह काफी खतरनाक है।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. सफल कुमार ने बताया कि स्मॉग से आंखों की नमी प्रभावित होती है। इससे आंखों में चिकनाहट कम होने लगती है और सूखापन आने लगता है। आंखों से पानी आना, आंखें लाल होना, सूजन, जलन, खुजली जैसी तमाम समस्याएं पैदा होने लगती हैं। इससे बचने के लिए दिन में आंखों को कई बार धोएं। घर से निकलते समय गॉगल्स का प्रयोग जरूर करें। आई ड्रॉप के लिए विशेषज्ञ से सलाह लें।
ये सावधानियां बरतें
- सुबह- शाम टहलने से बचें, घरों की खिड़कियां-दरवाजे बंद रखें
- घर से बाहर निकलें तो मुंह पर रुमाल या मास्क लगा लें
- प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरी सब्जियों व पौष्टिक आहार का सेवन करें
- बाहर से आने पर गुनगुने पानी से मुंह-आंखें और नाक साफ करें। हो सके तो भाप लें
- अस्थमा और दिल के मरीज अपनी दवाएं वक्त पर और नियमित लें
जिले का एक्यूआई
1 नवंबर 210
2 नवबर 212
3 नवंबर 221
4 नवंबर 235
5 नवंबर 275
6 नवंबर 308
नोट: एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई ) पीएम 10 और पीएम 2.5 की औसत वेल्यू दर्शाता है।
हवा की गुणवत्ता: 0-50 अच्छा, 51-100 औसत, 101-200 मॉडरेट, 201-300 बुरा, 301-400 बहुत बुरा, 401 से अधिक स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक