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संगीत की सरजमीं को किसकी लगी नजर
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Wed, 15 Jun 2016 12:02 AM IST
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उस्ताद वाहिद खान
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में बेशक आज पलायन प्रकरण को लेकर कैराना सुर्खियों में है, मगर शास्त्रीय संगीत के लिए प्रसिद्ध किराना (कैराना) घराना ने देश ही नहीं, बल्कि दुनियाभर में कैराना को शोहरत दिलाई। कैराना की ऐसी धरोहरें भी हैं, जिन्होंने शास्त्रीय संगीत के जरिए कैराना को पूजनीय बना दिया। कैराना घराने
(वर्तमान में किराना घराना) के नाम से मशहूर परिवार ने सुर, लय और तान के साथ शास्त्रीय संगीत की जो शोहरत दिलाई है, वह बेमिसाल है।
इस घराने के जनक अब्दुल करीम खां कैराना में 11 नवंबर 1872 को काले खां के घर पैदा हुए थे।
अब्दुल करीम खां ने अपने पिता काले खां और चाचा अब्दुल्ला खां से शास्त्रीय संगीत का ककहरा सीखा था। इसके बाद वह बड़ौदा एंड मैसूर कोर्ट में म्यूजिशियन के पद पर कार्यरत हुए थे और सरदार मारुतिराव माणे की बेटी ताराबाई माणे से विवाह रचाने के बाद कर्नाटक के चिकराऊ में शिफ्ट हो गए थे।
अब्दुल करीम खां को सारंगी, वीणा (बीना), सितार और तबला बजाने में महारत हासिल था। अब्दुल करीम खां की कामयाबी का ही कारण था कि एचएमवी के ग्रामोफोन रिकार्डर वाले स्टीकर (लोगो) पर भी कैराना का कुत्ता छपवाया गया था, जो लोगो आज तक चल रहा है। बताया जाता है कि अब्दुल करीम खां का कुत्ता भी उनके शास्त्रीय संगीत से इतना प्रभावित था कि एक बार कुत्ते ने भी कला का परिचय देकर सबको चौंका दिया था।
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(वर्तमान में किराना घराना) के नाम से मशहूर परिवार ने सुर, लय और तान के साथ शास्त्रीय संगीत की जो शोहरत दिलाई है, वह बेमिसाल है।
इस घराने के जनक अब्दुल करीम खां कैराना में 11 नवंबर 1872 को काले खां के घर पैदा हुए थे।
अब्दुल करीम खां ने अपने पिता काले खां और चाचा अब्दुल्ला खां से शास्त्रीय संगीत का ककहरा सीखा था। इसके बाद वह बड़ौदा एंड मैसूर कोर्ट में म्यूजिशियन के पद पर कार्यरत हुए थे और सरदार मारुतिराव माणे की बेटी ताराबाई माणे से विवाह रचाने के बाद कर्नाटक के चिकराऊ में शिफ्ट हो गए थे।
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अब्दुल करीम खां को सारंगी, वीणा (बीना), सितार और तबला बजाने में महारत हासिल था। अब्दुल करीम खां की कामयाबी का ही कारण था कि एचएमवी के ग्रामोफोन रिकार्डर वाले स्टीकर (लोगो) पर भी कैराना का कुत्ता छपवाया गया था, जो लोगो आज तक चल रहा है। बताया जाता है कि अब्दुल करीम खां का कुत्ता भी उनके शास्त्रीय संगीत से इतना प्रभावित था कि एक बार कुत्ते ने भी कला का परिचय देकर सबको चौंका दिया था।
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