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पीएफआई और खालिस्तानी समर्थकों का गढ़ बन रहा शामली

Mon, 03 Feb 2020 11:54 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Mon, 03 Feb 2020 11:54 PM IST
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PFI racket in the district, police searching for supporters
शामली। एनआरसी और सीएए के विरोध में हिंसा भड़कने के बाद सुर्खियों में आई पीएफआई का शामली में भी बड़ा रेकेट काम कर रहा है। पीएफआई से जुडी विंग भी यहां सक्रिय है। जिला पुलिस के मुताबिक 19 दिसंबर से अब तक जिले में कुल 23 पीएफआई समर्थक पकड़े जा चुके हैं जबकि ओर लोगों के भी यहां सक्रिय होने के इनपुट मिल रहे हैं जिनकी तलाश में पुलिस और खुफिया एजेंसियां लगी हैं।
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एनआरसी के विरोध में देश भर में हुई हिंसा के बाद पीएफआई चर्चाओं में आ गई थी। पुलिस के अनुसार इस हिंसा में पीएफआई समर्थित लोगों की भूमिका सामने आई थी। जिले में भी
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19 दिसंबर को एनआरसी के विरोध में थानाभवन सहित कई जगहों से एक वर्ग विशेष के लोग शहर में एकत्रित हो रहे थे। इनमें कुछ दिल्ली रोड स्थित एक मदरसे के पास जमा हुए थे जबकि कुछ थानाभवन से आ रहे थे। खुफिया तंत्र से मिले इनपुट के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर दो दर्जन से अधिक युवकों को पकड़ लिया था। इनके पास से पुलिस ने कई पोस्टर और मोबाइल फोन आदि मिले थे। 20 दिसंबर को शामली के आजाद चौक और कैराना के ईदगाह में भी विरोध में भीड़ जमा हुई थी ।
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एसपी विनीत जयसवाल के अनुसार इन तीनों मामलों में शामली और कैराना थाने में तीन केस दर्ज किए ग्ए थे। बकौल एसपी इस प्रकरण में 19 दिसंबर से अब तक कुल 23 पीएफआई समर्थकों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जबकि तीनों ही केस की विवेचना में कुछ ओर लोगों के नाम भी प्रकाश में आ रहे हैं जिन पर शक है कि वह भी पीएफआई से जुड़े हो सकते हैं। उन्हें चिंहित किया जा रहा है। खुफिया एजेंसियां और पुलिस इसमें लगी हैं।
बेहद खतरनाक थे इनके इरादे
बकौल एसपी गिरफ्तारी के दौरान यह पता नहीं होता कि ये लोग किस संस्था या संगठन से जुड़े हैं। ना ही इनके पास पीएफआई का कोई आईकार्ड आदि होता है। इसके पास मिल रहे पोस्टर और मोबाइल में दर्ज प्रचार सामग्री के आधार पर इन्हें पीएफआई और एसडीपीआई से जुड़ा माना जा रहा है। एसपी ने बताया कि हालांकि एनआरसी के विरोध में जिले में कोई हिंसा नहीं हुई लेकिन गिरफ्तार लोगों सेमिले पोस्टर और मोबाइल में दर्ज सामग्री में इस तरह आपत्तिजनक और भड़काऊ चीजें मौजूद हैं जिससे पता चलता है कि इनका इरादा कितना खतरनाक है। इन आपत्तिजनक सामग्री में बेहद भड़काऊ, हिंसक और बदला लेने जैसी बातें लिखी हैं। जिससे इनकी मंशा हिंसा फैलाकर माहौल खराब करने की थी। यही वजह है कि इनमें इनके खिलाफ दर्ज मुकदमों में शांतिभंग करने, धार्मिक भावनाएं भड़काना, हिंसा भड़काने की कोशिश आदि धाराओं में मामला दर्ज हुआ है।
समय रहते पकड़े गए वरना बिगड़ सकता था माहौल
शामली। एसपी के अनुसार खुफिया एजेंसियों के माध्यम से यह इनपुट मिल चुका था कि 19 और 20 दिसंबर को कुछ लोग एनआरसी के विरोध की आड़ में जमा होकर माहौल खराब करने की कोशिश कर सकते हैं लिहाजा पुलिस पहले से ही अलर्ट थी। थानाभवन से कुछ लोगों के शामली कलेक्ट्रेट पर आने की सूचना पर उन्हें बनत में पहले ही पकड़ लिया गया था। इसी तरह शामली के दिल्ली रोड स्थित मदरसे के पास भी इनके जमा होने की जानकारी मिल चुकी थी। इसलिए इन्हें समय से पकड़ लिया गया यदि ये लोग अपने पंपलेट और प्रचार सामग्री सहित विरोध प्रदर्शन और जुलूस में सफल हो जाते तो माहौल गर्मा सकता था।

गुपचुप काम करते हैं इनके समर्थक
शामली। एसपी के अनुसार एसडीपीआई ,पीएफआई का ही एक राजनीतिक विंग है। इसी तरह उनके कुछ विंग हैं। यह लोग बेहद गुपचुप ढंग से काम करते हैं। एनआरसी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिसंबर में जब खुफिया एजेंसियां इनसे नजर रखे थी तो ये लोग बेहद शातिराना अंदाज में घर से ही लापता हो जाते थे। फोन तक बंद कर लेते थे और गुपचुप ढंग से जनंसपर्क और सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की भीड़ जुटाते थे। ये कभी विरोध प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं लेते।
रोहित अग्रवाल
नोट-खालिस्तानी समर्थक और रोहिंग्या भी सक्रिय हें जिले में -अगली फाइल से -
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