{"_id":"5e5ff3118ebc3ef3f450a2e9","slug":"people-trapped-in-limitations-yearn-for-amenities-shamli-news-mrt472185944","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीमाओं के फेर में फंसे लोग सुविधाओं के लिए तरसे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीमाओं के फेर में फंसे लोग सुविधाओं के लिए तरसे
विज्ञापन
झिझाना वार्ड 12 की बदहाल। हालत
- फोटो : SHAMLI
सीमाओं के फेर में फंसे लोग सुविधाओं के लिए तरसे
झिंझाना। गाडीवाला चौराहे से लेकर ऊन रोड पर सड़क किनारे बाई ओर लगने वाले मोहल्ला सलारा, शेखो मैदान, साजिद नगर और ज्ञानपुरी चारों बस्तियां जमालपुर के रकबे में आते हैं। इन बस्तियों के लोगों की सुविधाएं ग्राम पंचायत स्तर पर मिलती है। हालांकि यहां के लोगों को बिजली कनेक्शन और बैनामे आदि अन्य सरकारी सुविधा में टैक्स वसूली शहरी दर से होती है। अमर उजाला टीम ने इन बस्तियों में जाकर लोगों से बात की तो हकीकत सामने आई। ग्रामीणों ने अपने मन की पीड़ा बताई और सिस्टम पर सवाल दागे। बताया कि उनकी बस्ती में नगर पंचायत की ओर से सफाई तक नहीं कराई जा रही। सरकारी सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता।
2012 तक नगर पंचायत के चुनावों में वोट डालने का अधिकार था, सभी सुविधाएं भी मिल रही थी। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में वह वोट नहीं डाल सके। बताया गया कि वह लोग ग्राम पंचायत जमालपुर में आ गए हैं।
मोहम्मद इस्लाम
हमें ये ही नहीं पता चल रहा है कि वह नगर पंचायत की सीमा में हैं या ग्राम पंचायत की। बस्ती में गंदगी का ढेर लगा है, लेकिन पालिका वाले कहते हैं कि उनका क्षेत्र नगर पंचायत की सीमा में नहीं है। बताओ वे क्या करें।
विज्ञापन
हासिम ग्रामीण
जब हमारा मोहल्ला दोनो में से किसी की परिधि में नही आ रहा है, तो नगर पंचायत कर्मी लोगों से गृहकर क्यों वसूल रहे हैं। बिजली के बिल भी कस्बे के हिसाब से लिए जा रहे हैं तो सुविधा नगर पंचायत क्यों नहीं दे रहा।
मास्टर अहसान
उनका मोहल्ला ग्राम समाज जमालपुर में बताया जा रहा है , लेकिन यहां प्लाट खरीदना पड़े तो स्टांप शुल्क शहरी क्षेत्र के हिसाब से लिया जाता है, जो ग्राम समाज से लगभग 12 प्रतिशत बढ़ा हुआ है। तो फिर उनकी बस्ती में नगर पंचायत स्तर की सुविधा क्यों नही दी जा रही।
याकूब राणा
नगर पंचायत कहती है कि उनका क्षेत्र जमालपुर ग्राम पंचायत में है तो जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र नगर पंचायत द्वारा क्यों बनाए जा रहे है। मोहल्लों में सड़कें बदहाल है। नालियों में जलनिकासी नहीं है।
शहनवाज राणा
मोहल्ला सलारा और शैखो मैदान ग्राम पंचायत जमालपुर के रकबे में हैं, लेकिन वोट का अधिकार उन्हें नही है। मात्र मोहल्ला ज्ञानपुरी चंदनपुरी के लोगों ने वोट दिया है। वहीं विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
शिवकुमार चौहान, प्रधानपति जलालपुर ग्राम पंचायत
मोहल्ला सलारा और शैखोमैदान ग्राम पंचायत जमालपुर के रकबे में हैं, लेकिन सामाजिकता के नाते
वहां समय समय पर सफाई कर्मी भेज कर सफाई कराई जा रही है। गृहकर और अन्य टैक्स लेने पर फिलहाल रोक लगाई हुई है।
नौशाद ठेकेदार, चेयरमैन झिंझाना नगर पंचायत
अप्रैल माह में सीमा विस्तार कर सभी चारों मोहल्लों को नगर पंचायत की परिधि में लेकर वहां विकास कार्य कराएं जाएंगे।
योगेंद्र सिंह ईओ नगर पंचायत
विज्ञापन
झिंझाना। गाडीवाला चौराहे से लेकर ऊन रोड पर सड़क किनारे बाई ओर लगने वाले मोहल्ला सलारा, शेखो मैदान, साजिद नगर और ज्ञानपुरी चारों बस्तियां जमालपुर के रकबे में आते हैं। इन बस्तियों के लोगों की सुविधाएं ग्राम पंचायत स्तर पर मिलती है। हालांकि यहां के लोगों को बिजली कनेक्शन और बैनामे आदि अन्य सरकारी सुविधा में टैक्स वसूली शहरी दर से होती है। अमर उजाला टीम ने इन बस्तियों में जाकर लोगों से बात की तो हकीकत सामने आई। ग्रामीणों ने अपने मन की पीड़ा बताई और सिस्टम पर सवाल दागे। बताया कि उनकी बस्ती में नगर पंचायत की ओर से सफाई तक नहीं कराई जा रही। सरकारी सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं मिलता।
2012 तक नगर पंचायत के चुनावों में वोट डालने का अधिकार था, सभी सुविधाएं भी मिल रही थी। वर्ष 2017 के निकाय चुनाव में वह वोट नहीं डाल सके। बताया गया कि वह लोग ग्राम पंचायत जमालपुर में आ गए हैं।
विज्ञापन
मोहम्मद इस्लाम
हमें ये ही नहीं पता चल रहा है कि वह नगर पंचायत की सीमा में हैं या ग्राम पंचायत की। बस्ती में गंदगी का ढेर लगा है, लेकिन पालिका वाले कहते हैं कि उनका क्षेत्र नगर पंचायत की सीमा में नहीं है। बताओ वे क्या करें।
विज्ञापन
हासिम ग्रामीण
जब हमारा मोहल्ला दोनो में से किसी की परिधि में नही आ रहा है, तो नगर पंचायत कर्मी लोगों से गृहकर क्यों वसूल रहे हैं। बिजली के बिल भी कस्बे के हिसाब से लिए जा रहे हैं तो सुविधा नगर पंचायत क्यों नहीं दे रहा।
मास्टर अहसान
उनका मोहल्ला ग्राम समाज जमालपुर में बताया जा रहा है , लेकिन यहां प्लाट खरीदना पड़े तो स्टांप शुल्क शहरी क्षेत्र के हिसाब से लिया जाता है, जो ग्राम समाज से लगभग 12 प्रतिशत बढ़ा हुआ है। तो फिर उनकी बस्ती में नगर पंचायत स्तर की सुविधा क्यों नही दी जा रही।
याकूब राणा
नगर पंचायत कहती है कि उनका क्षेत्र जमालपुर ग्राम पंचायत में है तो जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र नगर पंचायत द्वारा क्यों बनाए जा रहे है। मोहल्लों में सड़कें बदहाल है। नालियों में जलनिकासी नहीं है।
शहनवाज राणा
मोहल्ला सलारा और शैखो मैदान ग्राम पंचायत जमालपुर के रकबे में हैं, लेकिन वोट का अधिकार उन्हें नही है। मात्र मोहल्ला ज्ञानपुरी चंदनपुरी के लोगों ने वोट दिया है। वहीं विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
शिवकुमार चौहान, प्रधानपति जलालपुर ग्राम पंचायत
मोहल्ला सलारा और शैखोमैदान ग्राम पंचायत जमालपुर के रकबे में हैं, लेकिन सामाजिकता के नाते
वहां समय समय पर सफाई कर्मी भेज कर सफाई कराई जा रही है। गृहकर और अन्य टैक्स लेने पर फिलहाल रोक लगाई हुई है।
नौशाद ठेकेदार, चेयरमैन झिंझाना नगर पंचायत
अप्रैल माह में सीमा विस्तार कर सभी चारों मोहल्लों को नगर पंचायत की परिधि में लेकर वहां विकास कार्य कराएं जाएंगे।
योगेंद्र सिंह ईओ नगर पंचायत