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आजादी के दीवाने यातनाएं सहकर भी नहीं हटे पीछे
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जलालाबाद में स्वत्रंता सेनानियों की याद में बना इन्द्रा गेट।
- फोटो : SHAMLI
आजादी के दीवाने यातनाएं सहकर भी नहीं हटे पीछे
शामली, जलालाबाद। देश की आजादी की लड़ाई में कस्बे के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का मुख्य योगदान रहा है। वर्ष 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरे भारत में जोरों पर था, जिससे जलालाबाद कस्बा भी अछूता नहीं रहा। कस्बे के नौजवान आजादी की लड़ाई में घर-परिवार छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम के मैदान में कूद पड़े।
कस्बे के पंडित नवल किशोर शर्मा, लाला ज्योति प्रसाद, लाला निहाल चंद, पंडित रामरतन शर्मा, जगन्नाथ प्रसाद, लाला ओंकार प्रसाद, सत्य प्रकाश, बाबू ताराचंद, अंबिका प्रसाद वाजपेयी, बलराम भाई आदि ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे भारत में नमक बनाकर कानून को तोड़ा, जिसका अंग्रेजों ने बहुत विरोध किया, जगह-जगह छापामारी की। युवकों को पकड़-पकड़ कर अंग्रेज पुलिस ने पिटाई की। उन्हें चौराहे पर खड़े पेड़ से बांधकर पिटाई की और घावों पर नमक डाला गया, ताकि अन्य कोई व्यक्ति आंदोलन में हिस्सा नहीं ले सके।
कस्बे के प्राचीन जैन मंदिर के सामने पिलखन के पेड़ के नीचे नमक बनाकर सन 1942 में नमक कानून को तोड़ा जो इतिहास बन गया। जलालाबाद कस्बा उन चुनिंदा जगहों में एक था, जहां यह कानून तोड़ा गया था। महात्मा गांधी की जय के साथ क्रांतिकारी आगे बढ़ते गए। कस्बे का पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन, अन्य सरकारी स्थानों पर तिरंगा फहराया था, जिससे अंग्रेजों ने चिढ़कर क्रांतिकारियों को जेल में डाला। इन 10 क्रांतिकारियों को उस समय जुर्माने के साथ साथ छह-छह माह की जेल भी हुई थी। यह लोग अपने परिवार से बिछड़ गए थे, फिर भी स्वतंत्रता आंदोलन में इन लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। कस्बे के मुख्य हाईवे पर इंदिरा गेट के नाम से स्वतंत्रता सेनानियों की याद में राष्ट्रीय एकता संगठन द्वारा इस गेट का निर्माण किया गया। इस पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम उनकी सजा और जुर्माने को भी दर्शाया गया है। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अमृत उत्सव मनाया जा रहा है, तो लोगों ने उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया और कहा कि भारत के आंदोलन में कस्बा जलालाबाद भी पीछे नहीं रहा।
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शामली, जलालाबाद। देश की आजादी की लड़ाई में कस्बे के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का मुख्य योगदान रहा है। वर्ष 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरे भारत में जोरों पर था, जिससे जलालाबाद कस्बा भी अछूता नहीं रहा। कस्बे के नौजवान आजादी की लड़ाई में घर-परिवार छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम के मैदान में कूद पड़े।
कस्बे के पंडित नवल किशोर शर्मा, लाला ज्योति प्रसाद, लाला निहाल चंद, पंडित रामरतन शर्मा, जगन्नाथ प्रसाद, लाला ओंकार प्रसाद, सत्य प्रकाश, बाबू ताराचंद, अंबिका प्रसाद वाजपेयी, बलराम भाई आदि ने स्वतंत्रता आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पूरे भारत में नमक बनाकर कानून को तोड़ा, जिसका अंग्रेजों ने बहुत विरोध किया, जगह-जगह छापामारी की। युवकों को पकड़-पकड़ कर अंग्रेज पुलिस ने पिटाई की। उन्हें चौराहे पर खड़े पेड़ से बांधकर पिटाई की और घावों पर नमक डाला गया, ताकि अन्य कोई व्यक्ति आंदोलन में हिस्सा नहीं ले सके।
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कस्बे के प्राचीन जैन मंदिर के सामने पिलखन के पेड़ के नीचे नमक बनाकर सन 1942 में नमक कानून को तोड़ा जो इतिहास बन गया। जलालाबाद कस्बा उन चुनिंदा जगहों में एक था, जहां यह कानून तोड़ा गया था। महात्मा गांधी की जय के साथ क्रांतिकारी आगे बढ़ते गए। कस्बे का पोस्ट ऑफिस, रेलवे स्टेशन, अन्य सरकारी स्थानों पर तिरंगा फहराया था, जिससे अंग्रेजों ने चिढ़कर क्रांतिकारियों को जेल में डाला। इन 10 क्रांतिकारियों को उस समय जुर्माने के साथ साथ छह-छह माह की जेल भी हुई थी। यह लोग अपने परिवार से बिछड़ गए थे, फिर भी स्वतंत्रता आंदोलन में इन लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। कस्बे के मुख्य हाईवे पर इंदिरा गेट के नाम से स्वतंत्रता सेनानियों की याद में राष्ट्रीय एकता संगठन द्वारा इस गेट का निर्माण किया गया। इस पर स्वतंत्रता सेनानियों के नाम उनकी सजा और जुर्माने को भी दर्शाया गया है। देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर अमृत उत्सव मनाया जा रहा है, तो लोगों ने उन स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद किया और कहा कि भारत के आंदोलन में कस्बा जलालाबाद भी पीछे नहीं रहा।
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