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डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की होगी एलाइजा जांच
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- मौसम में आए बदलाव को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले मेें बारिश की वजह से मौसम में आए बदलाव से बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। खासतौर से इस मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की एलाइजा जांच के लिए रक्त सैंपल लेने पर फोकस बनाया है, ताकि मरीजों का समय पर उपचार किया जा सके।
सरकारी अस्पतालों में वायरल, मलेरिया और टायफाइड के केस पहले से आ रहे हैं। तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण मौसम में बदलाव आने से बुखार के मरीजों के भी संख्या बढ़ने की आशंका बन गई है। बारिश से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर ज्यादा पनपते हैं, जिससे बीमारियों के भी बढ़ने की आशंका रहती है। इस दौरान डेंगू का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। पिछले साल जिले में रिकार्ड 300 केस डेंगू के सामने आए थे। इस साल अब तक मलेरिया के 46 केस, डेंगू और स्क्रब टायफस के पुष्ट दो-दो केस सामने आ चुुके हैं जबकि डेंगू के संभावित 14 केस मिले हैं।
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि सितंबर-अक्तूबर के महीनों में मौसम बदलने लगता है। रात को ठंडा और दिन में मौसम गरम होता है। अब बारिश होने से इस तरह के मौसम में डेंगू का खतरा रहता है। सीएचसी व पीएचसी पर बुखार के मरीजों में अगर किसी में डेंगू के लक्षण नजर आते हैं तो उनकी रैपिड किट से जांच की जाती है। डेंगू पॉजिटिव आने पर मरीज का एलाइजा जांच के लिए रक्त का सैंपल लेने के लिए कहा जाता है। एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि हो पाती है। उन्होंने कहा है कि बुखार होने पर मरीज पहले जांच कराएं और फिर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। जिले मेें बारिश की वजह से मौसम में आए बदलाव से बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ने की आशंका के चलते स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। खासतौर से इस मौसम में डेंगू का खतरा ज्यादा बढ़ गया है। सरकारी अस्पतालों में डेंगू के लक्षण वाले मरीजों की एलाइजा जांच के लिए रक्त सैंपल लेने पर फोकस बनाया है, ताकि मरीजों का समय पर उपचार किया जा सके।
सरकारी अस्पतालों में वायरल, मलेरिया और टायफाइड के केस पहले से आ रहे हैं। तीन दिन से रुक-रुककर हो रही बारिश के कारण मौसम में बदलाव आने से बुखार के मरीजों के भी संख्या बढ़ने की आशंका बन गई है। बारिश से जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर ज्यादा पनपते हैं, जिससे बीमारियों के भी बढ़ने की आशंका रहती है। इस दौरान डेंगू का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। पिछले साल जिले में रिकार्ड 300 केस डेंगू के सामने आए थे। इस साल अब तक मलेरिया के 46 केस, डेंगू और स्क्रब टायफस के पुष्ट दो-दो केस सामने आ चुुके हैं जबकि डेंगू के संभावित 14 केस मिले हैं।
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जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. विनय कुमार ने बताया कि सितंबर-अक्तूबर के महीनों में मौसम बदलने लगता है। रात को ठंडा और दिन में मौसम गरम होता है। अब बारिश होने से इस तरह के मौसम में डेंगू का खतरा रहता है। सीएचसी व पीएचसी पर बुखार के मरीजों में अगर किसी में डेंगू के लक्षण नजर आते हैं तो उनकी रैपिड किट से जांच की जाती है। डेंगू पॉजिटिव आने पर मरीज का एलाइजा जांच के लिए रक्त का सैंपल लेने के लिए कहा जाता है। एलाइजा जांच के बाद ही डेंगू की पुष्टि हो पाती है। उन्होंने कहा है कि बुखार होने पर मरीज पहले जांच कराएं और फिर चिकित्सक की सलाह से उपचार कराएं।
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