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Shamli News: मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के अंतिम सर्वे का रास्ता साफ
Sat, 20 Jun 2026 01:25 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:25 AM IST
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शामली। 105 किलोमीटर लंबी मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन परियोजना पर जल्द ही काम शुरू हो सकेगा। रेलवे मंत्रालय ने परियोजना के अंतिम सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर ली है।
इसके लिए कश्मीरी गेट मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) को नामित किया गया है, जो विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर रेलवे मंत्रालय को भेजेंगे। अंतिम सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना के तहत निर्माण कार्य हो सकेगा।
मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन की मांग पिछले तीन दशकों से उठती रही है। वर्ष 1995 के बाद से इस परियोजना के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के संबंधित क्षेत्रों से भूमि के सर्किल रेट मंगाए जाते रहे हैं। वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे बजट में इस लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा की थी।
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इसके बाद वर्ष 2016 में केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन कैराना सांसद हुकुम सिंह के प्रयासों से मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और कैथल-करनाल-शामली- मेरठ रेलवे लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा हुई थी।
वर्ष 2019 में कैथल-करनाल-शामली- मेरठ रेलमार्ग का सर्वे रेलवे मंत्रालय को भेजा गया था। वहीं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के प्रयासों से पानीपत के दीवाना से दौराला तक प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए पिलर भी लगाए गए थे। इसके बाद करीब 3500 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नई दिल्ली रेलवे बोर्ड, गति शक्ति यूनिट और नीति आयोग से अनुमोदन प्राप्त कर रेलवे मंत्रालय को भेजी गई थी।
वर्ष 2025-26 की रेलवे पिंक बुक में भी इस परियोजना का उल्लेख किया गया है। इसमें मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का उल्लेख किया गया है। साथ ही दिल्ली-शामली-टपरी रेलखंड के दोहरीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। रेलवे मंत्रालय ने नई लाइन के अंतिम सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर ने बताया कि मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन की अंतिम सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने के लिए कश्मीरी गेट मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) को नामित किया गया है।
सर्वेक्षण के दौरान तय होगा कि किन-किन गांवों और कस्बों में रेलवे स्टेशन, हाल्ट बनाए जाएंगे, रेलवे लाइन का मार्ग क्या होगा तथा अन्य रेलमार्गों और सड़कों के साथ क्रॉसिंग की व्यवस्था किस प्रकार होगी। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट केंद्रीय रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी। संवाद
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इसके लिए कश्मीरी गेट मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) को नामित किया गया है, जो विस्तृत सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार कर रेलवे मंत्रालय को भेजेंगे। अंतिम सर्वे रिपोर्ट तैयार होने के बाद परियोजना के तहत निर्माण कार्य हो सकेगा।
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मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन की मांग पिछले तीन दशकों से उठती रही है। वर्ष 1995 के बाद से इस परियोजना के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश और हरियाणा के संबंधित क्षेत्रों से भूमि के सर्किल रेट मंगाए जाते रहे हैं। वर्ष 2009 में तत्कालीन रेल मंत्री ममता बनर्जी ने रेलवे बजट में इस लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा की थी।
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इसके बाद वर्ष 2016 में केंद्र में भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन कैराना सांसद हुकुम सिंह के प्रयासों से मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत और कैथल-करनाल-शामली- मेरठ रेलवे लाइन के सर्वेक्षण की घोषणा हुई थी।
वर्ष 2019 में कैथल-करनाल-शामली- मेरठ रेलमार्ग का सर्वे रेलवे मंत्रालय को भेजा गया था। वहीं पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री डॉ. संजीव बालियान के प्रयासों से पानीपत के दीवाना से दौराला तक प्रस्तावित रेलवे लाइन के लिए पिलर भी लगाए गए थे। इसके बाद करीब 3500 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर नई दिल्ली रेलवे बोर्ड, गति शक्ति यूनिट और नीति आयोग से अनुमोदन प्राप्त कर रेलवे मंत्रालय को भेजी गई थी।
वर्ष 2025-26 की रेलवे पिंक बुक में भी इस परियोजना का उल्लेख किया गया है। इसमें मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन के लिए 2200 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत का उल्लेख किया गया है। साथ ही दिल्ली-शामली-टपरी रेलखंड के दोहरीकरण के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया गया है। रेलवे मंत्रालय ने नई लाइन के अंतिम सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) हिमांशु शेखर ने बताया कि मेरठ-पानीपत नई रेलवे लाइन की अंतिम सर्वेक्षण रिपोर्ट तैयार करने के लिए कश्मीरी गेट मंडल के उप मुख्य अभियंता (निर्माण) को नामित किया गया है।
सर्वेक्षण के दौरान तय होगा कि किन-किन गांवों और कस्बों में रेलवे स्टेशन, हाल्ट बनाए जाएंगे, रेलवे लाइन का मार्ग क्या होगा तथा अन्य रेलमार्गों और सड़कों के साथ क्रॉसिंग की व्यवस्था किस प्रकार होगी। सर्वेक्षण पूरा होने के बाद रिपोर्ट केंद्रीय रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी। संवाद