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मामौर झील के पानी से धान का दाना हुआ खराब, किसानों के पास बची पराली

Wed, 27 Oct 2021 12:33 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 12:33 AM IST
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Paddy crop turned black due to the water of Mamaur lake
-कैराना में मामौर झील टूटने के दुसरे दिन भी मकानो में भरा झील का पानी - फोटो : SHAMLI
मामौर झील के पानी से धान की फसल पड़ गई काली
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कैराना। दो दिन पहले बारिश के बाद मामौर झील पर लगाई गई मिट्टी की आड़ टूट गई थी, जिसके बाद झील का पानी किसानों की हजारों बीघा धान की फसलों में भर गया। प्रशासन ने झील की आड़ की मरम्मत कराकर पानी को रुकवाया था। दूसरे दिन भी किसानों की धान की फसलों में पानी भरा रहा। पानी में डूबा रहा धान काला पड़ गया है। कुछ किसानों ने पानी के अंदर डूबी धान की बर्बाद फसलों के साथ बची पराली को उठाकर ले गए।
रविवार की शाम हुई बारिश के बाद गांव मामौर स्थित झील के पानी को रोकने के लिए लगाई गई मिट्टी की आड़ झील ओवरफ्लो होने के कारण टूट गई थी। जिस कारण बारिश व झील का गंदा पानी गांव मामौर निवासी दर्जनों किसानों की हजारों बीघा धान की फसलों में घुस गया था। तैयार हो चुकी धान की फसल को कुछ किसानों ने काटकर अपने खेतों में डाल रखा था। कटी हुई फसल भी पानी में पूरी तरह काली पड़ कर खराब हो गई। इसके अलावा खेतों में कटने के लिए तैयार धान की अन्य फसल पानी भरने के कारण गिर कर बर्बाद हो गई। झील टूटने की सूचना पर एसडीएम उद्भव त्रिपाठी प्रशासनिक टीम के साथ मौके पर पहुंचे थे और झील की आड़ की मरम्मत कराकर पानी को रुकवाया था। वहीं दूसरे दिन मंगलवार को भी किसानों की धान की फसलों में पानी भरा रहा। जिसके बाद पानी के अंदर कटी पड़ी धान की बर्बाद फसलों के बाद बची पराली कुछ किसान उठाकर ले गए।
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किसान करनैल सिंह ने बताया कि उसके खेत में धान की फसल पक कर तैयार हो गई थी। तीन चार दिन पहले उसने अपनी फसल को काटकर सूखने के लिए खेत में डाल दिया था, लेकिन उससे पहले फसल में बारिश व झील का पानी घुस गया, जिससे उसकी करीब 40 बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई। किसान ने बताया कि उसने ब्याज पर कर्ज लेकर फसल उगाई थी, लेकिन अब तैयार फसल झील के पानी ने बर्बाद कर दी। वहीं सभी किसानों ने प्रशासन से उनकी फसलों का सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की मांग की है। तहसीलदार प्रियंका जायसवाल ने बताया कि मामौर में जिन किसानों का नुकसान हुआ है, राजस्व विभाग की टीम को किसानों की फसलों का सर्वे व मूल्यांकन कराने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को मुआवजे के लिए रिपोर्ट बनाकर शासन को भेजी जाएगी।
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मकानों में भी भरा रहा पानी, आसमान के नीचे रात गुजारी
झील टूटने के बाद किसानों की फसल तो बर्बाद हो गई। झील के पास करीब 8-10 मकानों के अंदर व बाहर गलियों में दूसरे दिन भी पानी भरा रहा। जिस कारण ग्रामीणों ने मकानों से बाहर रहकर रात गुजारी। किसान अय्यूब ने बताया कि मकान के अंदर बंधे पशुओं को उन्होंने एक दिन पहले खोल लिए थे तथा सुरक्षित स्थान पर अन्य ग्रामीणों के मकानों में वह रहने को मजबूर हैं।
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