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Shamli News: अब माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाया जाएगा लैंगिक समानता का पाठ
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- कक्षा 6 से कक्षा 12 तक के छात्रों को प्रार्थना के समय दी जाएगी जानकारी
- लैंगिक समानता के प्रति छात्र-छात्राओं की समझ विकसित करने को पहल शुरू की
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। लैंगिक समानता का छात्र-छात्राओं को पता नहीं होने के कारण समाज में अधिक भेदभाव हो रहा है और इसको खत्म करने के लिए अब माध्यमिक स्कूलों में लैंगिक समानता का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके लिए सुबह कक्षा छह से 12 तक के छात्र-छात्राओं को प्रार्थना के समय जानकारी देकर भेदभाव को दूर किया जाएगा, ताकि छात्रों की समझ को विकसित किया जा सकें।
जिले के कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अब लैंगिक समानता के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षा विभाग ने कदम उठाया है। माध्यमिक स्कूलों में लैंगिक समानता के प्रति छात्र-छात्राओं की समझ विकसित करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। स्कूलों में प्रार्थना के समय प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षक छात्र-छात्राओं को बताएंगे कि लैंगिक विषय से जुड़े प्रेरक प्रसंग, कहानियां आदि छात्र-छात्राओं को सुनाई जाएंगी। ऐसी महिलाओं के बारे में भी बताया जाएगा, जिन्होंने विभिन्न कीर्तिमान स्थापित कर विश्व में ख्याति प्राप्त की है।समानता क्या है? उन्हें महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों में समानता और समान अवसरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
लैंगिक समानता विशेषकर महिलाओं एवं लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने से है, ताकि उन्हें परंपरागत सोच पर आधारित सामाजिक, शैक्षिक असमानता के दायरे से बाहर लाकर उनको समुचित विकास का अवसर प्रदान किया जा सकें। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी माध्यमिक स्कूलों को पत्र लिख दिया है, ताकि छात्र-छात्राओं को इसकी जानकारी मिल सकें। डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि यह नई पहल शुरू की है। इससे भेदभाव भी कम होगा। छात्र-छात्राओं को लैंगिक समानता की जानकारी होना भी जरूरी है। इसलिए उनको प्रार्थना के समय यह जानकारी देने का आदेश दिया है।
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- लैंगिक समानता के प्रति छात्र-छात्राओं की समझ विकसित करने को पहल शुरू की
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। लैंगिक समानता का छात्र-छात्राओं को पता नहीं होने के कारण समाज में अधिक भेदभाव हो रहा है और इसको खत्म करने के लिए अब माध्यमिक स्कूलों में लैंगिक समानता का पाठ पढ़ाया जाएगा। इसके लिए सुबह कक्षा छह से 12 तक के छात्र-छात्राओं को प्रार्थना के समय जानकारी देकर भेदभाव को दूर किया जाएगा, ताकि छात्रों की समझ को विकसित किया जा सकें।
जिले के कक्षा छह से 12वीं तक के विद्यार्थियों को अब लैंगिक समानता के प्रति जागरूक करने के लिए शिक्षा विभाग ने कदम उठाया है। माध्यमिक स्कूलों में लैंगिक समानता के प्रति छात्र-छात्राओं की समझ विकसित करने के लिए यह पहल शुरू की गई है। स्कूलों में प्रार्थना के समय प्रधानाचार्य और अन्य शिक्षक छात्र-छात्राओं को बताएंगे कि लैंगिक विषय से जुड़े प्रेरक प्रसंग, कहानियां आदि छात्र-छात्राओं को सुनाई जाएंगी। ऐसी महिलाओं के बारे में भी बताया जाएगा, जिन्होंने विभिन्न कीर्तिमान स्थापित कर विश्व में ख्याति प्राप्त की है।समानता क्या है? उन्हें महिलाओं और पुरुषों के अधिकारों में समानता और समान अवसरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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लैंगिक समानता विशेषकर महिलाओं एवं लड़कियों को समान अवसर प्रदान करने से है, ताकि उन्हें परंपरागत सोच पर आधारित सामाजिक, शैक्षिक असमानता के दायरे से बाहर लाकर उनको समुचित विकास का अवसर प्रदान किया जा सकें। इसके लिए शिक्षा विभाग ने सभी माध्यमिक स्कूलों को पत्र लिख दिया है, ताकि छात्र-छात्राओं को इसकी जानकारी मिल सकें। डीआईओएस सरदार सिंह ने बताया कि यह नई पहल शुरू की है। इससे भेदभाव भी कम होगा। छात्र-छात्राओं को लैंगिक समानता की जानकारी होना भी जरूरी है। इसलिए उनको प्रार्थना के समय यह जानकारी देने का आदेश दिया है।
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