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ज्येष्ठ दशहरा आज, यमुना में जल नहीं
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Tue, 14 Jun 2016 12:05 AM IST
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कैराना में यमुना नदी में फैली गंदगी और दूषित पानी।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली के ज्येष्ठ दशहरे पर यमुना नदी में पानी की कमी के चलते श्रद्धालुओं को इस बार प्रदूषित पानी में स्नान करने के लिए मजबूर होना पडे़गा। वहीं करनाल रोड पर मंगलवार और बुधवार को होने वाले मेले की तैयारियां पूर्ण हो गईं। मेले में दुकानें सजकर तैयार हैं।
यमुना नदी में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण यह बरसाती नदी बनकर रह गई है। होली के बाद यमुना में पानी की कमी होती चली आती है, मई-जून में नाममात्र का पानी बचता है। पिछले दो माह से बारिश न होने से यमुना में मौजूद पानी प्रदूषित हो गया है, जो स्नान करने योग्य नहीं है। इस बार ज्येष्ठ दशहरा 14, 15 जून को पड़ रहा है।
दशहरा और पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना में स्नान करने के लिए जाते हैं। पानीपत, करनाल और शामली जिले के श्रद्धालु कैराना-बिड़ौली में यमुना स्नान करते हैं। ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता केपी सिंह का कहना है कि हथिनीकुंड ताजेवाला बैराज से मात्र 160 क्यूसेक पानी प्रतिदिन जीव जंतुओं के लिए छोड़ा जाता है।
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इसके अलावा अतिरिक्त पानी की उपलब्धता संभव नहीं है। यमुना में पानी की उपलब्धता पहाड़ों पर बारिश होने से ही संभव है। मानसून आने के बाद यमुना में पानी आने की संभावना है। अधिशासी अभियंता शिवराज सिंह ने बताया कि यमुना नदी में 352 क्यूसेक पानी है, जो सहारनपुर तक ही खत्म हो जाता है।
शामली और बागपत तक यमुना में पानी नहीं पहुंच पाता है। उधर, करनाल रोड पर मिट्टी के बर्तन, खिलौने और अन्य आवश्यक चीजों की दुकानें सजकर तैयार हैं। यहां लंबे समय से पूर्वी यमुना नहर पर ज्येष्ठ दशहरे पर तीन दिवसीय मेला लगता आ रहा है।
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यमुना नदी में पानी की उपलब्धता कम होने के कारण यह बरसाती नदी बनकर रह गई है। होली के बाद यमुना में पानी की कमी होती चली आती है, मई-जून में नाममात्र का पानी बचता है। पिछले दो माह से बारिश न होने से यमुना में मौजूद पानी प्रदूषित हो गया है, जो स्नान करने योग्य नहीं है। इस बार ज्येष्ठ दशहरा 14, 15 जून को पड़ रहा है।
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दशहरा और पूर्णिमा पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना में स्नान करने के लिए जाते हैं। पानीपत, करनाल और शामली जिले के श्रद्धालु कैराना-बिड़ौली में यमुना स्नान करते हैं। ड्रेनेज खंड के अधिशासी अभियंता केपी सिंह का कहना है कि हथिनीकुंड ताजेवाला बैराज से मात्र 160 क्यूसेक पानी प्रतिदिन जीव जंतुओं के लिए छोड़ा जाता है।
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इसके अलावा अतिरिक्त पानी की उपलब्धता संभव नहीं है। यमुना में पानी की उपलब्धता पहाड़ों पर बारिश होने से ही संभव है। मानसून आने के बाद यमुना में पानी आने की संभावना है। अधिशासी अभियंता शिवराज सिंह ने बताया कि यमुना नदी में 352 क्यूसेक पानी है, जो सहारनपुर तक ही खत्म हो जाता है।
शामली और बागपत तक यमुना में पानी नहीं पहुंच पाता है। उधर, करनाल रोड पर मिट्टी के बर्तन, खिलौने और अन्य आवश्यक चीजों की दुकानें सजकर तैयार हैं। यहां लंबे समय से पूर्वी यमुना नहर पर ज्येष्ठ दशहरे पर तीन दिवसीय मेला लगता आ रहा है।