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Shamli News: नवीन कलक्ट्रेट का अतिरिक्त 5.59 करोड रुपये का तीसरी बार एस्टीमेट हुआ तैयार
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- धनराशि स्वीकृति के बाद होगा निर्माण कार्य पूरा, रुपये स्वीकृत होने के बाद निर्माण पूरा होने में लग सकता है छह माह का समय
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। नवीन कलक्ट्रेट का निर्माण पूरा होने में अभी ओर समय लग सकता है। कलक्ट्रेट के लिए शासन से जारी की गई धनराशि कम पड़ गई है। राजकीय निर्माण निगम इकाई की ओर से 5.59 करोड रुपये का तीसरी बार एस्टीमेट तैयार किया गया है। इसकी धनराशि स्वीकृत होने और धनराशि अवमुक्त होने के बाद अगले छह माह में निर्माण कार्य पूरा हो सकता है।
जिला बनने के बाद पूर्वी यमुना नहर के किनारे मुंडेट, बधेव, गोहरनी, भैंसवाल गांव के जगल में 265 एकड़ भूमि में नवीन मुख्यालय के लिए भूमि आरक्षित की गई थी। वर्ष 2015 में नवीन कलक्ट्रेट भवन के निर्माण के लिए शासन से करीब 10.40 करोड़ की धनराशि की स्वीकृति मिलने के बाद कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने कार्य शुरू किया गया। शासन से प्रथम किश्त के रूप में चार करोड़ रुपये, दूसरी किश्त में 4.32 करोड़ और तीसरी किश्त के रूप में 1.56 करोड़ की धनराशि अवमुक्त होने के बाद धनराशि खर्च हो गई। बाद में शासन को 33.33 करोड़ रुपये की धनराशि का दूसरी बार एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया।
वर्ष 2019 में बजट बढ़ने पर शासन की व्यय वित्त समिति ने 29.59 करोड़ की स्वीकृति दी थी। चतुर्थ किश्त के रूप में दो करोड़, पांचवीं किश्त में 2.20 करोड़ रुपये जारी हुए। जबकि छठी किश्त में 4.43 करोड़ रुपये की स्वीकृति हो चुकी है। सातवीं किश्त में 7.39 करोड़ और आठवीं किश्त में 3.67 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए।
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धनराशि खर्च होने के बाद शासन से शामली कलक्ट्रेट के अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृत 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त हुई। राजकीय निर्माण निगम नवीन कलक्ट्रेट भवन के निर्माण पर 28 करोड रुपये खर्च कर चुकी है। नवीन कलक्ट्रेट भवन का ढांचा तैयार है, किंतु शासन से जारी की गई नवीन कलक्ट्रेक्ट की धनराशि सिर्फ जीएसटी की 01. 95 करोड़ रुपये की धनराशि अवशेष है।
डीएम रविंद्र सिंह के नवीन कलक्ट्रेट कार्यालय भवन का निरीक्षण के दौरान राजकीय निर्माण निगम ने धनराशि कम बताकर नया एस्टीमेट शासन को भेजने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि नवीन कलक्ट्रेट की लागत 2016 के अनुरूप तय की गई थी। वर्ष 2023 की लागत धनराशि 5.59 करोड रुपये कम पड़ गई है। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आर के राजा ने बताया कि लागत का तीसरा एस्टीमेट तैयार कराया गया है। जो डीएम के माध्यम से शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। नवीन कलक्ट्रेट का निर्माण पूरा होने में अभी ओर समय लग सकता है। कलक्ट्रेट के लिए शासन से जारी की गई धनराशि कम पड़ गई है। राजकीय निर्माण निगम इकाई की ओर से 5.59 करोड रुपये का तीसरी बार एस्टीमेट तैयार किया गया है। इसकी धनराशि स्वीकृत होने और धनराशि अवमुक्त होने के बाद अगले छह माह में निर्माण कार्य पूरा हो सकता है।
जिला बनने के बाद पूर्वी यमुना नहर के किनारे मुंडेट, बधेव, गोहरनी, भैंसवाल गांव के जगल में 265 एकड़ भूमि में नवीन मुख्यालय के लिए भूमि आरक्षित की गई थी। वर्ष 2015 में नवीन कलक्ट्रेट भवन के निर्माण के लिए शासन से करीब 10.40 करोड़ की धनराशि की स्वीकृति मिलने के बाद कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम ने कार्य शुरू किया गया। शासन से प्रथम किश्त के रूप में चार करोड़ रुपये, दूसरी किश्त में 4.32 करोड़ और तीसरी किश्त के रूप में 1.56 करोड़ की धनराशि अवमुक्त होने के बाद धनराशि खर्च हो गई। बाद में शासन को 33.33 करोड़ रुपये की धनराशि का दूसरी बार एस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा गया।
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वर्ष 2019 में बजट बढ़ने पर शासन की व्यय वित्त समिति ने 29.59 करोड़ की स्वीकृति दी थी। चतुर्थ किश्त के रूप में दो करोड़, पांचवीं किश्त में 2.20 करोड़ रुपये जारी हुए। जबकि छठी किश्त में 4.43 करोड़ रुपये की स्वीकृति हो चुकी है। सातवीं किश्त में 7.39 करोड़ और आठवीं किश्त में 3.67 करोड़ रुपये अवमुक्त हुए।
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धनराशि खर्च होने के बाद शासन से शामली कलक्ट्रेट के अनावासीय भवनों के निर्माण के लिए स्वीकृत 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि अवमुक्त हुई। राजकीय निर्माण निगम नवीन कलक्ट्रेट भवन के निर्माण पर 28 करोड रुपये खर्च कर चुकी है। नवीन कलक्ट्रेट भवन का ढांचा तैयार है, किंतु शासन से जारी की गई नवीन कलक्ट्रेक्ट की धनराशि सिर्फ जीएसटी की 01. 95 करोड़ रुपये की धनराशि अवशेष है।
डीएम रविंद्र सिंह के नवीन कलक्ट्रेट कार्यालय भवन का निरीक्षण के दौरान राजकीय निर्माण निगम ने धनराशि कम बताकर नया एस्टीमेट शासन को भेजने का अनुरोध किया। उनका कहना है कि नवीन कलक्ट्रेट की लागत 2016 के अनुरूप तय की गई थी। वर्ष 2023 की लागत धनराशि 5.59 करोड रुपये कम पड़ गई है। राजकीय निर्माण निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर आर के राजा ने बताया कि लागत का तीसरा एस्टीमेट तैयार कराया गया है। जो डीएम के माध्यम से शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।