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दिल्ली सीमा पर आंदोलन, किसान खेतों में
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दिल्ली बार्डर पर धरने पर बैठे शामली क्षेत्र के किसान।
- फोटो : SHAMLI
दिल्ली सीमा पर आंदोलन, किसान खेतों में व्यस्त
शामली: किसान आंदोलन की जन्मभूमि रहे शामली के किसानों ने अपनी एकजुटता से सरकारों को झुकाया है। इस समय दिल्ली सीमा पर आंदोलन चल रहा है, लेकिन जिले के आम किसानों की इसमें भागीदारी कम हो रही है। किसान इन दिनों गन्ने की कटाई और गेहूं की बुवाई में व्यस्त हैं। इसलिए किसान संगठनों के पदाधिकारियों के साथ ही कुछ ही किसान दिल्ली पहुंचे हैं। जिले से 300 से 400 किसानों के ही आंदोलन में शामिल होने का अनुमान है।
कई दिनों से किसान संगठनों का दिल्ली सीमा पर आंदोलन चल रहा है। शामली जनपद भाकियू की जन्मभूमि है, जबकि अन्य संगठनों से भी बड़ी संख्या में किसान जुड़े हैं, लेकिन इस समय पर आंदोलन में शामिल हो पाना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है। किसान गेहूं बुवाई के लिए गन्ने की कटाई कर खेत खाली करने में लगे हैं। जिन किसानों ने खेत खाली कर लिए हैं वे गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। एक-एक दिन की भी देरी आगामी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती है। यही कारण है कि सामान्य किसानों की दिल्ली सीमा पर चल रहे आंदोलन में भागीदारी कम है।
सुबह जाकर शाम को लौट रहे पदाधिकारी
शामली। किसान संगठनों के आंदोलन में ज्यादातर पदाधिकारी ही शामिल हो रहे हैं। इनमें से कई तो सुबह जाते हैं और रात तक लौट आते हैं। खुफिया विभाग भी जनपद से 150 से 200 किसानों के आंदोलन में जाने का अनुमान लगा रहा है, जबकि आंदोलन में शामिल भाकियू के जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान ने फोन पर बताया कि बृहस्पतिवार को जिले से करीब 400 किसान शामिल हुए हैं। आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुधवार रात यमुना खादर क्षेत्र के कई गांवों के किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों से दिल्ली रवाना हुए थे।
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बोले किसान...
इन दिनों किसान को खेतों में काफी काम है। इसके बावजूद काफी संख्या में किसान दिल्ली गए हैं। यदि गन्ने की कटाई और गेहूं की बुवाई का सीजन न होता तो बड़ी तादाद में किसान दिल्ली कूच करते।
- अमरेश, किसान।
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सरकार के निर्णयों से किसान बेहद परेशान हैं। किसान आंदोलन में जाना चाहते हैं, लेकिन इस समय काम से समय नहीं मिल पा रहा। लोग किसान आंदोलन की पल-पल की जानकारी रख रहे हैं। यदि जरूरत हुई तो एकजुट होकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
- प्रमोद कुमार, किसान।
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केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून बनाए हैं, उसमें किसानों का ख्याल नहीं रखा गया है। किसानों की हालत पहले ही बदतर थी, लेकिन नए कृषि कानूनों के बाद मंडी में किसान की फसल का कोई निश्चित मूल्य किसान को नहीं मिलेगा। इस बार की फसल भी निश्चित मूल्य होनेे के बाद भी बहुत कम भाव में बिकी है।
- बेदपाल सिंह, किसान।
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शामली: किसान आंदोलन की जन्मभूमि रहे शामली के किसानों ने अपनी एकजुटता से सरकारों को झुकाया है। इस समय दिल्ली सीमा पर आंदोलन चल रहा है, लेकिन जिले के आम किसानों की इसमें भागीदारी कम हो रही है। किसान इन दिनों गन्ने की कटाई और गेहूं की बुवाई में व्यस्त हैं। इसलिए किसान संगठनों के पदाधिकारियों के साथ ही कुछ ही किसान दिल्ली पहुंचे हैं। जिले से 300 से 400 किसानों के ही आंदोलन में शामिल होने का अनुमान है।
कई दिनों से किसान संगठनों का दिल्ली सीमा पर आंदोलन चल रहा है। शामली जनपद भाकियू की जन्मभूमि है, जबकि अन्य संगठनों से भी बड़ी संख्या में किसान जुड़े हैं, लेकिन इस समय पर आंदोलन में शामिल हो पाना किसानों के लिए मुश्किल हो रहा है। किसान गेहूं बुवाई के लिए गन्ने की कटाई कर खेत खाली करने में लगे हैं। जिन किसानों ने खेत खाली कर लिए हैं वे गेहूं की बुवाई कर रहे हैं। एक-एक दिन की भी देरी आगामी फसल के लिए नुकसानदायक हो सकती है। यही कारण है कि सामान्य किसानों की दिल्ली सीमा पर चल रहे आंदोलन में भागीदारी कम है।
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सुबह जाकर शाम को लौट रहे पदाधिकारी
शामली। किसान संगठनों के आंदोलन में ज्यादातर पदाधिकारी ही शामिल हो रहे हैं। इनमें से कई तो सुबह जाते हैं और रात तक लौट आते हैं। खुफिया विभाग भी जनपद से 150 से 200 किसानों के आंदोलन में जाने का अनुमान लगा रहा है, जबकि आंदोलन में शामिल भाकियू के जिलाध्यक्ष कपिल खाटियान ने फोन पर बताया कि बृहस्पतिवार को जिले से करीब 400 किसान शामिल हुए हैं। आंदोलन में शामिल होने वाले किसानों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बुधवार रात यमुना खादर क्षेत्र के कई गांवों के किसान ट्रैक्टर-ट्रालियों से दिल्ली रवाना हुए थे।
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बोले किसान...
इन दिनों किसान को खेतों में काफी काम है। इसके बावजूद काफी संख्या में किसान दिल्ली गए हैं। यदि गन्ने की कटाई और गेहूं की बुवाई का सीजन न होता तो बड़ी तादाद में किसान दिल्ली कूच करते।
- अमरेश, किसान।
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सरकार के निर्णयों से किसान बेहद परेशान हैं। किसान आंदोलन में जाना चाहते हैं, लेकिन इस समय काम से समय नहीं मिल पा रहा। लोग किसान आंदोलन की पल-पल की जानकारी रख रहे हैं। यदि जरूरत हुई तो एकजुट होकर दिल्ली के लिए रवाना होंगे।
- प्रमोद कुमार, किसान।
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केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून बनाए हैं, उसमें किसानों का ख्याल नहीं रखा गया है। किसानों की हालत पहले ही बदतर थी, लेकिन नए कृषि कानूनों के बाद मंडी में किसान की फसल का कोई निश्चित मूल्य किसान को नहीं मिलेगा। इस बार की फसल भी निश्चित मूल्य होनेे के बाद भी बहुत कम भाव में बिकी है।
- बेदपाल सिंह, किसान।