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Shamli News: ऊंची, लेजर डीजे और झांकी वाली कांवड़ का अधिक क्रेज
Thu, 01 Aug 2024 03:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Thu, 01 Aug 2024 03:15 AM IST
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सजी कांवड लेकर जाते शिव भक्त
शामली। कांवड़ यात्रा के दौरान इस बार कांवड़ियों के कई रूप देखने को मिल रहे हैं। इस बार लेजर डीजे, डाक, ऊंची और झांकी वाला कांवड़ का क्रेज अधिक है। कार को सजाकर उससे कांवड़ लाने वालों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। नगर पालिका के अनुसार इस बार डाक और झांकी वाली कांवड़ लाने वाले शिवभक्त अधिक है।
डीजे और झांकी कांवड़ लेकर पहुंचे पानीपत के सिंभालखा निवासी सोहनवीर, राधे, बलराम, शेखर आदि ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले ही कांवड़ यात्रा लाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। उनकी 30 लोगों की टोली है। डाक कांवड़ में वे बिना रुके अपनी यात्रा को दौड़कर पूरी करते हैं। उनके पास जनरेटर से लेकर डीजे का पूरा सेटअप है। बताया कि अत्याधुनिक डीजे पौने दो लाख रुपये के किराये पर है, यात्रा पर 8 लाख से अधिक रुपये खर्च हो होंगे।
फतेहाबाद के जाखल निवासी सोनू ने अपने साथी सुमित, बब्लू, विक्की, सोनू कुमार, संदीप, मोहित, राहुल, नीतिश, सागर, रवि आदि के साथ झांकी और लेजर डीजे के साथ कांवड़ लेकर पहुंचे। बताया कि वे अमरनाथ की बर्फानी वाली गुफा की झांकी लेकर पहुंचे। नौ से दस लाख रुपये का खर्च होगा, जिसे सभी युवक आपस में मिलकर वहन करेंगे। कांधे पर भगवान शिव, गणेश की झांकी लेकर पैदल चल रहे हरियाणा के हिसार से सावन ने बताया कि उसने भगवान से झांकी पैदल लाने का वायदा किया था। झांकी को घर में स्थापित करुंगा। करनाल के महेश और उनके साथियों ने डीजे कांवड़ पर 15 लाख रुपये खर्च होने की बात कहीं।
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डीजे वाली कांवड़ लाने वालों में होता है कड़ा मुकाबला
इस बार डीजे वाली कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों में मुकाबला भी हो रहा है। खाली स्थान पर सड़क पर तेज आवाज में भजन बजाने को लेकर डीजे वाली कांवड़ में पंद्रह से बीस मिनट तक मुकाबला होता है।
इस बार 101 से लेकर 200 किलो तक कलश में जा रहे शिवभक्त
शामली के रहने वाले सुमित, करनाल के रहने वाले बलबीर समेत अन्य लोग 101 और 200 किलो जल हरिद्वार से कलश में लेकर पहुंचे। इनके अलावा इस बार अन्य शिवभक्तों में भी कलश में जल लाने को लेकर क्रेज रहा।
बीस साल पहले तक इन कांवड़ का था अधिक क्रेज
बुजुर्ग कांवड़िया मनोज कुमार और बिल्लू के अनुसार पूर्व में बैठी कांवड़, झूली कांवड़ और खड़ी कांवड़ का अधिक क्रेज था।
बैठी कांवड़ : हरिद्वार से कांवड़ लाने पर बीच रास्ते में भी कांवड़िया कांवड़ को रास्ते में रखकर आराम कर लेता था।
झूली कांवड़ : इस कांवड़ को शिवभक्त जमीन पर नहीं रखते। पेड़ या फिर बल्लियों पर कांवड़ को लटकाकर ही शिवभक्त आराम करते हैं।
खड़ी कांवड़ : खड़ी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। उसे लेकर ही चलना होता है। यदि आराम करना है तो किसी दूसरे को कांवड़ देनी पड़ती है, इसके बाद ही कांवड़िया आराम कर पाता है।
पहले कांच की शीशियों में लाया जाता था जल
बुजुर्ग कांवड़िया मनोज कुमार और बिल्लू बताते हैं कि समय के साथ सब कुछ बदल रहा है। 20 से 30 साल पहले तक कांवड़ लाने के लिए कांच की छोटी शीशियों का प्रयोग होता था। एक कांवड़ में एक बड़ी और 50 से अधिक छोटी शीशियां होती थी। शिवभक्त 51, 101 या फिर 21 शीशियों में जल लेकर आते थे। उस समय लेजर डीजे, झांकी, डाक कांवड़ का क्रेज नहीं था। झांकी कांवड़ कम लोग ही लेकर आते थे।
अब इन कांवड़ के बारे में भी जानिए...
डीजे कांवड़ : इसमें शिवभक्त डीजे के साथ-साथ मनमोहक झांकियां लेकर गंतव्य के लिए रवाना होते हैं। लाइट, डीजे सेट पर लगी होती है। टोली में 20 से 30 युवा होते हैं। इस कांवड़ में 40 से लेकर 48 तक बेस लगे होते हैं।
झांकी कांवड़ : इस कांवड़ में भगवान शिव, पार्वती, गणेश या फिर अन्य की झांकी शिवभक्त किसी वाहन के सहारे या फिर खीचंकर लाते हैं। 5 से 6 लोगों का ग्रुप इस कांवड़ को ला रहा है।
कलश वाली कांवड़ : इस कांवड़ में 21, 51, 101, 200 किलो जल लटकाकर कांवड़िये हरिद्वार से चलते हैं। यह सबसे कठिन मानी जाती है।
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डीजे और झांकी कांवड़ लेकर पहुंचे पानीपत के सिंभालखा निवासी सोहनवीर, राधे, बलराम, शेखर आदि ने बताया कि उन्होंने एक माह पहले ही कांवड़ यात्रा लाने के लिए तैयारी शुरू कर दी थी। उनकी 30 लोगों की टोली है। डाक कांवड़ में वे बिना रुके अपनी यात्रा को दौड़कर पूरी करते हैं। उनके पास जनरेटर से लेकर डीजे का पूरा सेटअप है। बताया कि अत्याधुनिक डीजे पौने दो लाख रुपये के किराये पर है, यात्रा पर 8 लाख से अधिक रुपये खर्च हो होंगे।
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फतेहाबाद के जाखल निवासी सोनू ने अपने साथी सुमित, बब्लू, विक्की, सोनू कुमार, संदीप, मोहित, राहुल, नीतिश, सागर, रवि आदि के साथ झांकी और लेजर डीजे के साथ कांवड़ लेकर पहुंचे। बताया कि वे अमरनाथ की बर्फानी वाली गुफा की झांकी लेकर पहुंचे। नौ से दस लाख रुपये का खर्च होगा, जिसे सभी युवक आपस में मिलकर वहन करेंगे। कांधे पर भगवान शिव, गणेश की झांकी लेकर पैदल चल रहे हरियाणा के हिसार से सावन ने बताया कि उसने भगवान से झांकी पैदल लाने का वायदा किया था। झांकी को घर में स्थापित करुंगा। करनाल के महेश और उनके साथियों ने डीजे कांवड़ पर 15 लाख रुपये खर्च होने की बात कहीं।
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डीजे वाली कांवड़ लाने वालों में होता है कड़ा मुकाबला
इस बार डीजे वाली कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों में मुकाबला भी हो रहा है। खाली स्थान पर सड़क पर तेज आवाज में भजन बजाने को लेकर डीजे वाली कांवड़ में पंद्रह से बीस मिनट तक मुकाबला होता है।
इस बार 101 से लेकर 200 किलो तक कलश में जा रहे शिवभक्त
शामली के रहने वाले सुमित, करनाल के रहने वाले बलबीर समेत अन्य लोग 101 और 200 किलो जल हरिद्वार से कलश में लेकर पहुंचे। इनके अलावा इस बार अन्य शिवभक्तों में भी कलश में जल लाने को लेकर क्रेज रहा।
बीस साल पहले तक इन कांवड़ का था अधिक क्रेज
बुजुर्ग कांवड़िया मनोज कुमार और बिल्लू के अनुसार पूर्व में बैठी कांवड़, झूली कांवड़ और खड़ी कांवड़ का अधिक क्रेज था।
बैठी कांवड़ : हरिद्वार से कांवड़ लाने पर बीच रास्ते में भी कांवड़िया कांवड़ को रास्ते में रखकर आराम कर लेता था।
झूली कांवड़ : इस कांवड़ को शिवभक्त जमीन पर नहीं रखते। पेड़ या फिर बल्लियों पर कांवड़ को लटकाकर ही शिवभक्त आराम करते हैं।
खड़ी कांवड़ : खड़ी कांवड़ को जमीन पर नहीं रखा जाता। उसे लेकर ही चलना होता है। यदि आराम करना है तो किसी दूसरे को कांवड़ देनी पड़ती है, इसके बाद ही कांवड़िया आराम कर पाता है।
पहले कांच की शीशियों में लाया जाता था जल
बुजुर्ग कांवड़िया मनोज कुमार और बिल्लू बताते हैं कि समय के साथ सब कुछ बदल रहा है। 20 से 30 साल पहले तक कांवड़ लाने के लिए कांच की छोटी शीशियों का प्रयोग होता था। एक कांवड़ में एक बड़ी और 50 से अधिक छोटी शीशियां होती थी। शिवभक्त 51, 101 या फिर 21 शीशियों में जल लेकर आते थे। उस समय लेजर डीजे, झांकी, डाक कांवड़ का क्रेज नहीं था। झांकी कांवड़ कम लोग ही लेकर आते थे।
अब इन कांवड़ के बारे में भी जानिए...
डीजे कांवड़ : इसमें शिवभक्त डीजे के साथ-साथ मनमोहक झांकियां लेकर गंतव्य के लिए रवाना होते हैं। लाइट, डीजे सेट पर लगी होती है। टोली में 20 से 30 युवा होते हैं। इस कांवड़ में 40 से लेकर 48 तक बेस लगे होते हैं।
झांकी कांवड़ : इस कांवड़ में भगवान शिव, पार्वती, गणेश या फिर अन्य की झांकी शिवभक्त किसी वाहन के सहारे या फिर खीचंकर लाते हैं। 5 से 6 लोगों का ग्रुप इस कांवड़ को ला रहा है।
कलश वाली कांवड़ : इस कांवड़ में 21, 51, 101, 200 किलो जल लटकाकर कांवड़िये हरिद्वार से चलते हैं। यह सबसे कठिन मानी जाती है।

सजी कांवड लेकर जाते शिव भक्त

सजी कांवड लेकर जाते शिव भक्त