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39 ग्राम पंचायतों में खंडहर बन गए मिनी सचिवालय
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शामली। जिले की 230 ग्राम पंचायतों में से कई गांवों में सचिवालय का कार्य पूरा नहीं हुआ है। जबकि 30 मिनी सचिवालय खंडहर में तब्दील हो गए हैं। जिनमें कोई कार्य नहीं होता है। ऐसे में सरकार की ग्रामीणों को एक छत के नीचे सुविधाएं देने की मंशा पूरी होती नहीं दिख रही है। ऐसे ही हालात रहे तो ग्रामीण क्षेत्र के विकास का सपना भला कैसे पूरा होगा।
सरकार की ओर से ग्रामीण विकास के उद्देश्य की पूर्ति के लिए गांवों में ग्रामीण सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। जिससे ग्राम पंचायत के कार्यालयों में एक ही जगह पर ग्राम पंचायत की बैठकों के साथ-साथ ग्राम पंचायत अधिकारी की मौजूदगी, ग्राम विकास से संबंधित दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता रहेगी। एक ही छत के नीचे सरकार की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके लिए सरकार लाखों रुपये खर्च करके गांव में प्राथमिकता के साथ निर्माण करा रही है, लेकिन जिले की स्थिति कुछ अलग है। यहां जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद 39 सचिवालय खंडहर बन गए हैं। जबकि कुछ ग्राम पंचायतों में अभी तक इनका निर्माण पूरा नहीं हुआ है।
किवाना के मिनी सचिवालय में मिला गोबर
किवाना और रामपुर खेड़ी गांव में मिनी सचिवालय खंडहर हो चुके हैं। किवाना में तो सचिवालय के अंदर गोबर फैला मिला। जिससे लग रहा था कि ग्रामीण यहां पशु बांधते हैं। दोनों ही गांवों में मिनी सचिवालय न होने से ग्रामीणों को अपने कार्यों को भटकना पड़ता है।
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गांव में मिनी सचिवालय निर्माणाधीन
बाबरी क्षेत्र के गांव कैडी में मंदिर के पास मिनी सचिवालय का कार्य निर्माणाधीन है। ग्राम प्रधान पति प्रतिनिधि ठाकुर योगेंद्र सिंह पुंडीर ने बताया 28 लाख रुपए लागत से बन रहा है। अगले माह तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। बाबरी क्षेत्र के गांव बुटराड़ा में मिनी सचिवालय टंकी परिसर के पास स्थित है। सचिवालय में सहायक कंप्यूटर ऑपरेटर अभिजीत जावला तैनात मिला। इस दौरान गांव निवासी सुनील जांगिड़ प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन कराया। ग्राम प्रधान अनुज उर्फ बिल्लू ने बताया कि ग्रामीणों का कार्य आसानी से सचिवालय पर हो रहा है।
वर्जन :
39 मिनी सचिवालय जर्जर हालत में हैं। इनका पुनर्निर्माण कराया जाएगा। करीब 200 मिनी सचिवालयों में पंचायत सहायक बैठ रहे हैं। जहां ग्रामीणों को सभी सुविधाएं मिल रही हैं। - नंदलाल, डीपीआरओ
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सरकार की ओर से ग्रामीण विकास के उद्देश्य की पूर्ति के लिए गांवों में ग्रामीण सचिवालय का निर्माण कराया जा रहा है। जिससे ग्राम पंचायत के कार्यालयों में एक ही जगह पर ग्राम पंचायत की बैठकों के साथ-साथ ग्राम पंचायत अधिकारी की मौजूदगी, ग्राम विकास से संबंधित दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव, कंप्यूटर आदि की उपलब्धता रहेगी। एक ही छत के नीचे सरकार की योजनाओं की जानकारी उपलब्ध हो सके। इसके लिए सरकार लाखों रुपये खर्च करके गांव में प्राथमिकता के साथ निर्माण करा रही है, लेकिन जिले की स्थिति कुछ अलग है। यहां जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते लाखों रुपये खर्च होने के बावजूद 39 सचिवालय खंडहर बन गए हैं। जबकि कुछ ग्राम पंचायतों में अभी तक इनका निर्माण पूरा नहीं हुआ है।
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किवाना के मिनी सचिवालय में मिला गोबर
किवाना और रामपुर खेड़ी गांव में मिनी सचिवालय खंडहर हो चुके हैं। किवाना में तो सचिवालय के अंदर गोबर फैला मिला। जिससे लग रहा था कि ग्रामीण यहां पशु बांधते हैं। दोनों ही गांवों में मिनी सचिवालय न होने से ग्रामीणों को अपने कार्यों को भटकना पड़ता है।
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गांव में मिनी सचिवालय निर्माणाधीन
बाबरी क्षेत्र के गांव कैडी में मंदिर के पास मिनी सचिवालय का कार्य निर्माणाधीन है। ग्राम प्रधान पति प्रतिनिधि ठाकुर योगेंद्र सिंह पुंडीर ने बताया 28 लाख रुपए लागत से बन रहा है। अगले माह तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा। बाबरी क्षेत्र के गांव बुटराड़ा में मिनी सचिवालय टंकी परिसर के पास स्थित है। सचिवालय में सहायक कंप्यूटर ऑपरेटर अभिजीत जावला तैनात मिला। इस दौरान गांव निवासी सुनील जांगिड़ प्रमाण पत्र बनवाने के लिए आवेदन कराया। ग्राम प्रधान अनुज उर्फ बिल्लू ने बताया कि ग्रामीणों का कार्य आसानी से सचिवालय पर हो रहा है।
वर्जन :
39 मिनी सचिवालय जर्जर हालत में हैं। इनका पुनर्निर्माण कराया जाएगा। करीब 200 मिनी सचिवालयों में पंचायत सहायक बैठ रहे हैं। जहां ग्रामीणों को सभी सुविधाएं मिल रही हैं। - नंदलाल, डीपीआरओ