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लकड़ी और उपले जलाकर चूल्हे पर पकाया जा रहा मिड-डे मील
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चौसाना।रेडा माजरा के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील का खाना बनाती रसोई माताएं
- फोटो : SHAMLI
चौसाना (शामली)। मुजफ्फरनगर में एक सप्ताह पहले मिड-डे मील में मरा हुआ चूूहा मिलने के बाद भी अधिकारी और शिक्षक सबक लेने को तैयार नहीं है। जनपद के विद्यालयों में मिड-डे मील को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। चौसाना क्षेत्र के गांव रेड़ा में एक परिसर में संचालित प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में नियमों को ताक पर रख कर खुले में उपले जलाकर चूल्हे पर मिड-डे मील पकाया जा रहा है, जिससे बच्चों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।
ऊन ब्लाक के गांव रेड़ा में प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित है। प्राथमिक में 74 बच्चे और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 29 बच्चे पंजीकृत है। दोनों विद्यालयों के कुल पंजीकृत 103 बच्चों का मिड-डे मील एक ही जगह पकाया जाता है। प्राथमिक विद्यालय में तीन शिक्षक और पूर्व माध्यमिक में दो शिक्षा मित्रों की नियुक्ति है। विद्यालय में मिड-डे मील को रसोई में गैस चूल्हे पर न पकाकर खुले में उपले जलाकर चूल्हे पर तैयार किया जाता है। बृहस्पतिवार को मेन्यू के अनुसार बच्चों को मिड-डे मील में दिया जाने वाली दाल और रोटी खुले में चूल्हे पर लकड़ी और उपले जलाकर बनाई जा रही थी। बच्चों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि कई महीने से चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता है।
- मुजफ्फरनगर की घटना से नहीं लिया सबक
हाल ही में जनपद मुजफ्फरनगर में मिड-डे मील में मरा हुआ चूहा निकला था। खुले में मिड-डे मील बनाने से यह खतरा है कि ध्यान भटकने पर मुजफ्फरनगर जैसी घटना हो सकती है, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। विद्यालय परिसर में धुएं के कारण भी बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक विरेंद्र धीमान का कहना है कि मिड-डे मील में खर्च अधिक आता है, जबकि विभाग से इतना पैसा नहीं आता, जिस कारण चूल्हे पर खाना पकाया जाता है। उधर, ग्राम प्रधान ओमपाल का कहना है कि स्कूल में बच्चे अधिक हैं। खाना जल्दी बन सके, इसलिए गैस चूल्हे व उपले जलाकर चूल्हे दोनों पर खाना पकाया जाता है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी संजय डबराल ने कहा कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। इस मामले में ग्राम प्रधान से बात की जा रही है। इसका जल्द समाधान कराया जाएगा।
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कोट
विद्यालयों में रसोई में और गैस चूल्हे पर मिड-डे मील बनाए जाने के निर्देश दिए गए है। खुले में लकड़ी जलाकर चूल्हे पर मिड-डे मील बनाए जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। - गीता वर्मा, बीएसए।
नियमानुसार खुले में लकड़ी जलाकर चूल्हे पर मिड-डे मील नहीं बनाया जा सकता। यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। - जितेंद्र कुमार, जिला समन्वयक मिड-डे मील।
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ऊन ब्लाक के गांव रेड़ा में प्राथमिक विद्यालय और पूर्व माध्यमिक विद्यालय एक ही परिसर में संचालित है। प्राथमिक में 74 बच्चे और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में 29 बच्चे पंजीकृत है। दोनों विद्यालयों के कुल पंजीकृत 103 बच्चों का मिड-डे मील एक ही जगह पकाया जाता है। प्राथमिक विद्यालय में तीन शिक्षक और पूर्व माध्यमिक में दो शिक्षा मित्रों की नियुक्ति है। विद्यालय में मिड-डे मील को रसोई में गैस चूल्हे पर न पकाकर खुले में उपले जलाकर चूल्हे पर तैयार किया जाता है। बृहस्पतिवार को मेन्यू के अनुसार बच्चों को मिड-डे मील में दिया जाने वाली दाल और रोटी खुले में चूल्हे पर लकड़ी और उपले जलाकर बनाई जा रही थी। बच्चों से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि कई महीने से चूल्हे पर ही खाना पकाया जाता है।
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- मुजफ्फरनगर की घटना से नहीं लिया सबक
हाल ही में जनपद मुजफ्फरनगर में मिड-डे मील में मरा हुआ चूहा निकला था। खुले में मिड-डे मील बनाने से यह खतरा है कि ध्यान भटकने पर मुजफ्फरनगर जैसी घटना हो सकती है, जिससे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। विद्यालय परिसर में धुएं के कारण भी बच्चों का स्वास्थ्य खराब हो सकता है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक विरेंद्र धीमान का कहना है कि मिड-डे मील में खर्च अधिक आता है, जबकि विभाग से इतना पैसा नहीं आता, जिस कारण चूल्हे पर खाना पकाया जाता है। उधर, ग्राम प्रधान ओमपाल का कहना है कि स्कूल में बच्चे अधिक हैं। खाना जल्दी बन सके, इसलिए गैस चूल्हे व उपले जलाकर चूल्हे दोनों पर खाना पकाया जाता है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी संजय डबराल ने कहा कि यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। इस मामले में ग्राम प्रधान से बात की जा रही है। इसका जल्द समाधान कराया जाएगा।
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विद्यालयों में रसोई में और गैस चूल्हे पर मिड-डे मील बनाए जाने के निर्देश दिए गए है। खुले में लकड़ी जलाकर चूल्हे पर मिड-डे मील बनाए जाने की उन्हें जानकारी नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। - गीता वर्मा, बीएसए।
नियमानुसार खुले में लकड़ी जलाकर चूल्हे पर मिड-डे मील नहीं बनाया जा सकता। यह मामला उनकी जानकारी में नहीं है। इसकी जांच कराई जाएगी। - जितेंद्र कुमार, जिला समन्वयक मिड-डे मील।

चौसाना।रेडा माजरा के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील का खाना बनाती रसोई माताएं- फोटो : SHAMLI

चौसाना।रेडा माजरा के प्राथमिक स्कूल में मिड डे मील का खाना खाते बच्चे- फोटो : SHAMLI