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मौसम की मार से मासूम हुए बीमार

Sat, 04 May 2019 11:11 PM IST
NAVEEN GUPTA अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: NAVEEN GUPTA Updated Sat, 04 May 2019 11:11 PM IST
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mausam ki maar, maasoom ho rahe beemaar
file photo - फोटो : amarujala
चिलचिलाती धूप और लू का असर बच्चों पर पड़ने लगा है। सरकारी और निजी अस्पतालों में टाइफाइड और डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 15 दिन में इन मरीजों की संख्या लगभग दुगनी हो गई है। इसे देखते हुए चिकित्सकों ने सावधानी और बचाव की बेहद जरूरत बताया है।
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अप्रैल माह शुरू होते ही गर्मी ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया था। लगातार गर्मी बढ़ने के साथ ही गर्म हवा लू भी चलने लगी है। करीब 15 दिन से लू के थपेड़ों और गर्मी अधिक बढ़ गई है। मौसम के इस बदलाव का असर वैसे तो सभी उम्र के लोगों पर पड़ रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा बच्चे प्रभावित हो रहे है। इस मौसम में वायरल बुखार का असर लगभग खत्म हो गया है, लेकिन टाइफाइड और डायरिया की मरीज लगातार बढ़ रहे है। सरकारी और निजी अस्पतालों में इन दोनों रोगों के मरीजों की संख्या सबसे अधिक है। चिकित्सकों का कहना है कि इस मौसम में होने वाली बीमारियां गंदा पानी पीने, रखा हुआ भोजन करने और बाजार में कटे हुए फल और खुले में जूस का सेवन करने से पेट की पाचन क्रिया बिगड़ जाती है। इस मौसम में खानपान और साफसफाई का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है।
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शामली के डाक्टर अनुपम सक्सेना ने बताया कि टाइफाइड और डायरिया से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ी है। साथ ही लू चलने से हीट स्ट्रोक के केस भी सामने आने लगे है। बाल रोग चिकित्सक डाक्टर वेदभानू मलिक ने बताया कि दिनभर में कुल मरीजों में आधे से अधिक बच्चे टाइफाइड और डायरिया के आ रहे है। इन रोगों से बचाव के लिए सावधानी और बचाव करने की जरूरत है। ऐसी स्थिति में जरा सही लापरवाही जिंदगी के लिए खतरा बन सकता है।
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शरीर में पानी की कमी न होने दे
डाक्टर वेदभानू मलिक का कहना है कि डायरिया से पीड़ित बच्चे में पानी की कमी बिल्कुल न होने दें। अगर उपलब्ध हो सके तो ओआरएस का घोल तत्काल पिलाना शुरू करें। अगर ओआरएस न हो तो घर पर ही नमक चीनी का घोल पिलाएं। शरीर में पानी की मात्रा लगातार बनी रहे तो तीन से पांच दिन में डायरिया स्वत: भी ठीक हो सकता है।


अस्पताल में टाइफाइड, डायरिया से पीड़ित बच्चे
शहर के निजी अस्पताल में उमेर निवासी अंबेहटा पांच दिन से भर्ती है। इसी तरह आहाद निवासी थल सात दिन से, जैद निवासी राझड़ छह दिन से, कार्तिक निवासी झाड़वन तीन दिन से, सारिक निवासी कांधला दो दिन से, इब्राहिम और रहीम निवासी कैराना तीन दिन से और कुणाल निवासी गागौर आठ दिन से भर्ती है, जहां उनका उपचार चल रहा है।

टाइफाइड व डायरिया के लक्षण
- सिर दर्द और उल्टी की शिकायत होना।
- पानी की अधिक प्यास लगना।
- गफलत या बैचेनी होना।
- पेेेशाब कम आना।
- खाल का सिकुड़ना।
ऐसे करें बचाव
- बासी खाना न खाए, साफ एवं ताजा खाना खाए।
- कटे हुए फलों का सेवन न करें।
- पानी और तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
- बाजार में खुला जूस और गन्ने का रस का सेवन न करें।
- घर पर बनी मट्ठा, नींबू की शिकंजी का सेवन करें।
- बेल पर लगने वाले फल खीरा, ककड़ी, तरबूज और खरबूजा आदि का सेवन करें।
- बच्चों को बोतल का दूध न पिलाएं, मां का दूूध पिलाएं।
- बहुत जरूरी न हो तो शाम पांच बजे के बाद घर से निकले।
- सूती कपड़ों का अधिक इस्तेमाल करें, धूप से बचने को सिर पर ढककर चले।
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