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Shamli News: 24 घंटे के बाद कराई मामौर झील की मरम्मत
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कैराना में मामौर झील की पोकलेन द्वारा लगायी गई मेड
- बारिश से ओवरफ्लो होकर टूट गई थी मामौर झील की मेड
संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। लगातार बारिश के कारण एक दिन पहले शाम के समय मामौर झील की मेड टूट गई थी। प्रशासन द्वारा 24 घंटे बाद झील की मेड की मरम्मत कराई, लेकिन तब तक करीब एक दर्जन किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
पिछले दो दिन से लगातार कैराना क्षेत्र में बारिश होने का सिलसिला जारी हैं। शनिवार की शाम करीब सात बजे बारिश के कारण मामौर झील ओवरफ्लो हो गई थी। जिसके बाद झील के किनारे पर लगाई गई मिट्टी की मेड पानी के दबाव के कारण टूट गई। झील टूटने के बाद गंदा पानी किसानों की धान की फसलों में भर गया। झील की मिट्टी की मेढ़ टूटने की सूचना के बाद तहसीलदार गौरव सांगवान ने रात करीब एक बजे हरियाणा से पोकलेन मशीन मंगवाई। लेकिन रात में बारिश के कारण पोकलेन मशीन से झील की मरम्मत का कार्य नहीं हो सका।
रविवार सुबह करीब सात बजे पोकलेन मशीन से क्षतिग्रस्त झील की मरम्मत कराई गई, लेकिन तब तक गांव मामौर निवासी किसान शराफत की 5 बीघा, फुरकान की 5 बीघा, जाबिर की 5 बीघा, सुखबीर की 25 बीघा, खैरून की 20 बीघा, मनोज की 20 बीघा, सतीश की 15 बीघा, शाहदीन की 5 बीघा, हाशिम की 5 बीघा धान की फसल व इस्लाम की 20 बीघा मूली की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
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किसानों ने बताया कि उन्होंने मंडियों व्यापारियों से कर्ज लेकर धान की फसल उगाई थी, लेकिन झील ने उनकी मेहनत की कमाई पर पूरी तरह पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से उचित मुआवजा दिलाए जाने की गुहार लगाई हैं। तहसीलदार गौरव सांगवान ने बताया कि मामौर झील की मरम्मत कराने के लिए रात में ही पोकलेन मशीन मंगाई गई थी। सुबह तक झील की मरम्मत करा दी गई हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
कैराना। लगातार बारिश के कारण एक दिन पहले शाम के समय मामौर झील की मेड टूट गई थी। प्रशासन द्वारा 24 घंटे बाद झील की मेड की मरम्मत कराई, लेकिन तब तक करीब एक दर्जन किसानों की सैकड़ों बीघा धान की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
पिछले दो दिन से लगातार कैराना क्षेत्र में बारिश होने का सिलसिला जारी हैं। शनिवार की शाम करीब सात बजे बारिश के कारण मामौर झील ओवरफ्लो हो गई थी। जिसके बाद झील के किनारे पर लगाई गई मिट्टी की मेड पानी के दबाव के कारण टूट गई। झील टूटने के बाद गंदा पानी किसानों की धान की फसलों में भर गया। झील की मिट्टी की मेढ़ टूटने की सूचना के बाद तहसीलदार गौरव सांगवान ने रात करीब एक बजे हरियाणा से पोकलेन मशीन मंगवाई। लेकिन रात में बारिश के कारण पोकलेन मशीन से झील की मरम्मत का कार्य नहीं हो सका।
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रविवार सुबह करीब सात बजे पोकलेन मशीन से क्षतिग्रस्त झील की मरम्मत कराई गई, लेकिन तब तक गांव मामौर निवासी किसान शराफत की 5 बीघा, फुरकान की 5 बीघा, जाबिर की 5 बीघा, सुखबीर की 25 बीघा, खैरून की 20 बीघा, मनोज की 20 बीघा, सतीश की 15 बीघा, शाहदीन की 5 बीघा, हाशिम की 5 बीघा धान की फसल व इस्लाम की 20 बीघा मूली की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई।
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किसानों ने बताया कि उन्होंने मंडियों व्यापारियों से कर्ज लेकर धान की फसल उगाई थी, लेकिन झील ने उनकी मेहनत की कमाई पर पूरी तरह पानी फेर दिया। किसानों ने प्रशासन से उचित मुआवजा दिलाए जाने की गुहार लगाई हैं। तहसीलदार गौरव सांगवान ने बताया कि मामौर झील की मरम्मत कराने के लिए रात में ही पोकलेन मशीन मंगाई गई थी। सुबह तक झील की मरम्मत करा दी गई हैं।