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Shamli News: मामौर झील का हो रहा कायाकल्प, इको-टूरिज्म के रूप में बदलेगी तस्वीर
Sun, 21 Jun 2026 11:59 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 21 Jun 2026 11:59 PM IST
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कैराना में मामौर झील के सुंदरीकरण के लिए खोदी गई नींव-ग्रामीण
कैराना। वर्षों से गंदे पानी के जलाशय और किसानों की परेशानी का कारण बनी मामौर झील अब नई पहचान की ओर बढ़ रही है। पर्यटन विभाग द्वारा इसे इको-टूरिज्म हब के रूप में विकसित करने की दिशा में सुंदरीकरण और विकास कार्य तेजी से शुरू कर दिए गए हैं।
बृहस्पतिवार को आवास विकास सहारनपुर के अधिकारियों ने झील क्षेत्र का निरीक्षण किया और प्रवेश द्वार एवं चाहरदीवारी निर्माण के लिए नींव की खुदाई का कार्य प्रारंभ कराया। करीब 2 करोड़ 51 लाख 75 हजार रुपये की लागत से चल रही इस परियोजना के तहत झील परिसर को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।
परियोजना के अंतर्गत गेट, सुलभ शौचालय, कैंटीन, बैठने के लिए बेंच, पक्की पगडंडी, हरियाली विकास और पौधारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। झील को प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन सुविधाओं से युक्त एक आकर्षक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
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तहसीलदार अर्जुन चौहान ने बताया कि झील क्षेत्र में किए गए कुछ अवैध कब्जों को हटाकर भूमि को विकास कार्य के लिए खाली कराया गया है, जिससे परियोजना को गति मिल सके।
56 करोड़ से तैयार हुआ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
वर्षों से चली आ रही जलभराव और गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए पहले ही 78 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है, जिससे झील का पानी शुद्ध कर यमुना नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि मामौर झील जल्द ही क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होगी और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ नई पहचान बनाएगी।
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बृहस्पतिवार को आवास विकास सहारनपुर के अधिकारियों ने झील क्षेत्र का निरीक्षण किया और प्रवेश द्वार एवं चाहरदीवारी निर्माण के लिए नींव की खुदाई का कार्य प्रारंभ कराया। करीब 2 करोड़ 51 लाख 75 हजार रुपये की लागत से चल रही इस परियोजना के तहत झील परिसर को आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा।
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परियोजना के अंतर्गत गेट, सुलभ शौचालय, कैंटीन, बैठने के लिए बेंच, पक्की पगडंडी, हरियाली विकास और पौधारोपण जैसे कार्य किए जाएंगे। झील को प्राकृतिक सुंदरता और पर्यटन सुविधाओं से युक्त एक आकर्षक स्थल के रूप में विकसित करने की योजना है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
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तहसीलदार अर्जुन चौहान ने बताया कि झील क्षेत्र में किए गए कुछ अवैध कब्जों को हटाकर भूमि को विकास कार्य के लिए खाली कराया गया है, जिससे परियोजना को गति मिल सके।
56 करोड़ से तैयार हुआ सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
वर्षों से चली आ रही जलभराव और गंदे पानी की समस्या के समाधान के लिए पहले ही 78 करोड़ रुपये की लागत से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा चुका है, जिससे झील का पानी शुद्ध कर यमुना नदी में प्रवाहित किया जा रहा है। पर्यटन विभाग की इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि मामौर झील जल्द ही क्षेत्र के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल होगी और अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ नई पहचान बनाएगी।