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भागवत कथा समापन पर हुई महाआरती
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कैराना। सिद्ध पीठ प्राचीन बनखंडी महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा का बुधवार को समापन हो गया। कथा व्यास स्वामी ने बताया कि भगवान सुखदेव ने परीक्षित को बताया कि दत्तात्रेय द्वारा 24 गुरू बनाए थे। कथा के समापन मौके पर महाआरती के बाद प्रसाद वितरण किया गया।
श्री बनखंडी महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा व्यास रजनीश महाराज ने बताया कि एक बाद परीक्षित ने भगवान सुखदेव से पूछा कि दत्तात्रेय ने कौन कौन से गुरू बनाए थे। भगवान सुखदेव ने बताया कि दत्तात्रेय ने सबसे पहले पृथ्वी को गुरू बनाया क्योंकि इससे शिक्षा मिलती है कि पृथ्वी कितनी धैर्यवान व सहनशील है। बताया कि मछली जीभ के चक्कर में काटे में फंस कर मर जाती है। इस प्रकार साधक को शिक्षा लेनी चाहिए कि जीभ पर नियंत्रण रखे। परीक्षित दत्तात्रेय ने इसी प्रकार 24 गुरू बनाए और उनसे सीख ली कि मनुष्यों को इंद्रियों के पांच विषय से दूर रहता चाहिए। पांच विषय गंध, स्पर्श, रस, रूप और शब्द मनुष्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। कथा के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया। इसके पश्चात प्रसाद वितरण तथा श्रद्धालुओं को स्वामी ने आशीर्वाद दिया। मौके पर आचार्य अंकित शर्मा, अनमोल शर्मा, श्रवण कुमार गर्ग, आलोक, संजय, अमित गर्ग, राजेंद्र आदि रहे।
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श्री बनखंडी महादेव मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में वृंदावन से आए कथा व्यास रजनीश महाराज ने बताया कि एक बाद परीक्षित ने भगवान सुखदेव से पूछा कि दत्तात्रेय ने कौन कौन से गुरू बनाए थे। भगवान सुखदेव ने बताया कि दत्तात्रेय ने सबसे पहले पृथ्वी को गुरू बनाया क्योंकि इससे शिक्षा मिलती है कि पृथ्वी कितनी धैर्यवान व सहनशील है। बताया कि मछली जीभ के चक्कर में काटे में फंस कर मर जाती है। इस प्रकार साधक को शिक्षा लेनी चाहिए कि जीभ पर नियंत्रण रखे। परीक्षित दत्तात्रेय ने इसी प्रकार 24 गुरू बनाए और उनसे सीख ली कि मनुष्यों को इंद्रियों के पांच विषय से दूर रहता चाहिए। पांच विषय गंध, स्पर्श, रस, रूप और शब्द मनुष्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। कथा के समापन पर महाआरती का आयोजन किया गया। इसके पश्चात प्रसाद वितरण तथा श्रद्धालुओं को स्वामी ने आशीर्वाद दिया। मौके पर आचार्य अंकित शर्मा, अनमोल शर्मा, श्रवण कुमार गर्ग, आलोक, संजय, अमित गर्ग, राजेंद्र आदि रहे।
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