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Shamli News: भगवान का तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया
Sun, 03 Dec 2023 11:47 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Sun, 03 Dec 2023 11:47 PM IST
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कांधला में पंचकल्याणक़ महोत्सव के दौरान पालकी यात्रा में झुमती महिलाएं
कांधला। आचार्य विशुद्ध सागर जी महाराज ससंघ के सानिध्य में कस्बे के दिगंबर जैन समाज समिति के तत्वावधान में चल रहे छह दिवसीय पंचकल्याणक महोत्सव के चौथे दिन भगवान का तप कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया गया।
नगर के रामलीला मैदान कैराना रोड पर अयोध्या नगरी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह के समय जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, जन्मकल्याणक पूजन, नवग्रह शांति यज्ञ के कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इसके बाद महाराज श्री के मंगल प्रवचन हुए जिसके बाद तप कल्याणक के अंतर्गत बालक आदिकुमार से राजा बने भगवान ने मनुष्यों को असि, मसि, कृषि, शिल्प, वाणिज्य और कला की शिक्षाएं आमजन की जीवन यापन के लिए प्रदान की । उन्होंने लोगों को ईमानदारी, अनुशासन व धर्म परायण में रहते हुए जीवन बिताने का संदेश दिया।
राजा को दरबार में नीलांजना का नृत्य देखकर वैराग्य उत्पन्न हुआ और दीक्षा लेने के लिए वन की ओर चल दिए। इसको देखकर माता मरु देवी अश्रुपूरित नेत्रों से भगवान को रोकने का प्रयास करती है। यह दृश्य देखकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वैराग्य के दृश्य से महिलाओं के नेत्रों से अश्रुधारा बहने लगी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को तप का महत्व समझाते हुए कहा कि तप कल्याण के समय भगवान आदिकुमार की पालकी को उठाने को लेकर देवताओं और मनुष्यों में विवाद हो गया। दोनों वर्ग पालकी उठाना चाहते थे। देवता लोग संयम धारण नहीं कर सकते । अतः ये अधिकार मनुष्यों का है। इसलिए मनुष्यों को अपने जीवन की श्रेष्ठता को समझते हुए श्रेष्ठ तप द्वारा जीवन को सार्थक बनाना चाहिये। दोपहर में 32000 मांडलिक राजाओं की भव्य राज दरबार लगा और भगवान आदिकुमार का राज्याभिषेक किया गया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए
भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रभु के वैराग्य दृश्यों का मंचन किया गया। किस प्रकार से राजा आदि कुमार को वैराग्य उत्पत्ति होती है और वह सांसारिक सुख को त्याग कर राजपाट को त्याग कर वन विहार कर लेते हैं कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री दिगंबर जैन समाज के साथ साथ श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के समस्त पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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नगर के रामलीला मैदान कैराना रोड पर अयोध्या नगरी में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव में सुबह के समय जाप्यानुष्ठान, अभिषेक, शांतिधारा, नित्य नियम पूजन, जन्मकल्याणक पूजन, नवग्रह शांति यज्ञ के कार्यक्रम सम्पन्न हुए। इसके बाद महाराज श्री के मंगल प्रवचन हुए जिसके बाद तप कल्याणक के अंतर्गत बालक आदिकुमार से राजा बने भगवान ने मनुष्यों को असि, मसि, कृषि, शिल्प, वाणिज्य और कला की शिक्षाएं आमजन की जीवन यापन के लिए प्रदान की । उन्होंने लोगों को ईमानदारी, अनुशासन व धर्म परायण में रहते हुए जीवन बिताने का संदेश दिया।
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राजा को दरबार में नीलांजना का नृत्य देखकर वैराग्य उत्पन्न हुआ और दीक्षा लेने के लिए वन की ओर चल दिए। इसको देखकर माता मरु देवी अश्रुपूरित नेत्रों से भगवान को रोकने का प्रयास करती है। यह दृश्य देखकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। वैराग्य के दृश्य से महिलाओं के नेत्रों से अश्रुधारा बहने लगी। आचार्य श्री विशुद्ध सागर जी महाराज ने श्रावक-श्राविकाओं को तप का महत्व समझाते हुए कहा कि तप कल्याण के समय भगवान आदिकुमार की पालकी को उठाने को लेकर देवताओं और मनुष्यों में विवाद हो गया। दोनों वर्ग पालकी उठाना चाहते थे। देवता लोग संयम धारण नहीं कर सकते । अतः ये अधिकार मनुष्यों का है। इसलिए मनुष्यों को अपने जीवन की श्रेष्ठता को समझते हुए श्रेष्ठ तप द्वारा जीवन को सार्थक बनाना चाहिये। दोपहर में 32000 मांडलिक राजाओं की भव्य राज दरबार लगा और भगवान आदिकुमार का राज्याभिषेक किया गया।
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सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए
भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ प्रभु के वैराग्य दृश्यों का मंचन किया गया। किस प्रकार से राजा आदि कुमार को वैराग्य उत्पत्ति होती है और वह सांसारिक सुख को त्याग कर राजपाट को त्याग कर वन विहार कर लेते हैं कार्यक्रम को सफल बनाने में श्री दिगंबर जैन समाज के साथ साथ श्री दिगंबर जैन साधु सेवा समिति के समस्त पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।

कांधला में पंचकल्याणक़ महोत्सव के दौरान पालकी यात्रा में झुमती महिलाएं