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बेलपत्र अर्पित करने से प्रसन्न होते हैं भगवान शिव, कष्ट करते हैं दूर
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संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि भगवान शिव इतने भोले हैं कि बेलपत्र अर्पित करने मात्र से ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर देते है।
शहर के मोहल्ला रेलपार में सिद्धपीठ प्राचीन सदाशिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने तारकासुर वध की कथा सुनाई। श्रद्धालु शिवभक्ति मे लीन हो गए। उन्होंने कहा कि माता सती के राजा दक्ष के यज्ञ में प्राण आहुति दिए जाने के बाद भगवान शिव समाधि में लीन हो गए। तारकासुर ने घोर तपस्या करके ताकतवर बन गया। तारकासुर को वरदान था कि शिवपुत्र ही उसका वध कर सकता है। भगवान शिव समाधि में लीन होने से देव-दानवों का यह ज्ञात नहीं था कि शिव का विवाह और पुत्र कब होगा। इसलिए तारकासुर को अभिमान हो गया कि वह तो अमर हो गया। उसने देवताओं, ऋषियों-मुनियो को परेशान कर दिया।
तारकासुर के वध के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु-ब्रहमा की पूजा आराधना की। जगत पिता ब्रह्मा, भगवान विष्णु समेत सभी देवताओं ने भगवान भोलेनाथ को समाधि से जगाने के लिए उनकी प्रार्थना की। भगवान शिव समाधि छोड़कर विश्व कल्याण में जुट जाते हैं। भगवान शिव से विवाह करने के लिए पार्वती घोर तपस्या करती है। धूमधाम से दोनों का विवाह होता है। शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनकर श्रद्धालु बोल बम बम का जयघोष करते रहे। शिवपुत्र कार्तिकेय तारकासुर का वध करके देवताओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस मौके पर पंडित रविपाठक निशात पाठक ने मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी, शभूनाथ रे भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को नाचने को मजबूर कर दिया। मुख्य यजमान के रुप में मुकेश गर्ग और माया गर्ग मौजूद रहे। संचालन डॉ. हरिओम पाठक ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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शामली। शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने कहा कि भगवान शिव इतने भोले हैं कि बेलपत्र अर्पित करने मात्र से ही वह प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान भोलेनाथ अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर देते है।
शहर के मोहल्ला रेलपार में सिद्धपीठ प्राचीन सदाशिव मंदिर के वार्षिकोत्सव के मौके पर आयोजित शिवपुराण कथा में कथा व्यास पंडित दिनेश पाठक ने तारकासुर वध की कथा सुनाई। श्रद्धालु शिवभक्ति मे लीन हो गए। उन्होंने कहा कि माता सती के राजा दक्ष के यज्ञ में प्राण आहुति दिए जाने के बाद भगवान शिव समाधि में लीन हो गए। तारकासुर ने घोर तपस्या करके ताकतवर बन गया। तारकासुर को वरदान था कि शिवपुत्र ही उसका वध कर सकता है। भगवान शिव समाधि में लीन होने से देव-दानवों का यह ज्ञात नहीं था कि शिव का विवाह और पुत्र कब होगा। इसलिए तारकासुर को अभिमान हो गया कि वह तो अमर हो गया। उसने देवताओं, ऋषियों-मुनियो को परेशान कर दिया।
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तारकासुर के वध के लिए देवताओं ने भगवान विष्णु-ब्रहमा की पूजा आराधना की। जगत पिता ब्रह्मा, भगवान विष्णु समेत सभी देवताओं ने भगवान भोलेनाथ को समाधि से जगाने के लिए उनकी प्रार्थना की। भगवान शिव समाधि छोड़कर विश्व कल्याण में जुट जाते हैं। भगवान शिव से विवाह करने के लिए पार्वती घोर तपस्या करती है। धूमधाम से दोनों का विवाह होता है। शिव-पार्वती विवाह की कथा सुनकर श्रद्धालु बोल बम बम का जयघोष करते रहे। शिवपुत्र कार्तिकेय तारकासुर का वध करके देवताओं को सुरक्षा प्रदान करते हैं। इस मौके पर पंडित रविपाठक निशात पाठक ने मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी, शभूनाथ रे भजन सुनाकर श्रद्धालुओं को नाचने को मजबूर कर दिया। मुख्य यजमान के रुप में मुकेश गर्ग और माया गर्ग मौजूद रहे। संचालन डॉ. हरिओम पाठक ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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