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लॉकडाउन ने तोड़ी कमर, किस्त नहीं दे पा रहे ऋण धारक
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लॉकडाउन ने तोड़ी कमर, किस्त नहीं चुका पा रहे ऋण धारक
शामली। लॉकडाउन में प्रभावित हुए कारोबार, छूट चुकी नौकरी और सैलरी की कटौती ने होम लोन धारकों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। 31 अगस्त के बाद से किस्त अदा करने के लिए बैंकों का दबाव बढ़ने लगा है। कुछ बैंकों ने तो खातों से रकम काट भी ली है। इससे ऋण धारकों की बचत भी चली गई। अब उनके सामने इकट्ठा हो चुकी किस्त चुकाने की चुनौती है।
प्राइवेट नौकरी करने वाले रेलपार निवासी आशुतोष शर्मा प्रतिमाह होम लोन की 15 हजार की किस्त दे रहे थे। लॉकडाउन में कंपनी ने उनके वेतन में कटौती कर दी जिससे वह मार्च के बाद किस्त नहीं दे पाए। उनकी छह किस्तें बकाया हो गईं। बैंक प्रबंधक किस्त चुकाने के लिए कह रहे हैं। वह बताते हैं कि वह 15 हजार रुपये प्रतिमाह ही मुश्किल से दे पा रहे थे, अब इकट्ठे 90 हजार कहां से दें। रेस्टोरेंट चलाने वाले प्रवीण गर्ग की भी यही स्थिति है। उन्होंने लॉकडाउन के बाद तीन किस्तें तो चुका दी हैं लेकिन तीन बकाया हैं। कहते हैं कि हर महीने देनदारी बढ़ रही है, काम चल नहीं रहा तो किस्त कहां से भरें। ये तो केवल उदाहरण मात्र हैं। जिले में 1553 होम लोन धारक इसी संकट से जूझ रहे हैं। इन पर 105.12 करोड़ का लोन है। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक खातों को एनपीए घोषित नहीं करने के आदेश दिए हैं।
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दोबारा करा सकते हैं किस्त का निर्धारण
ऋण धारकों की परेशानी को देखते हुए बैंकों ने टर्म लोन (मियादी ऋण) धारकों को किस्त का दोबारा निर्धारण कराने की सुविधा दी है। ऋण धारक बैंक को प्रार्थना पत्र देकर सकते हैं। इससे उसकी लोन की किस्तों का दोबारा निर्धारण हो जाएगा। मसलन यदि कोई ऋण धारक 15 हजार मासिक की किस्त जमा कर रहा है और उसकी किस्तें बकाया हैं तो उन्हें समाहित कर किस्त की राशि बढ़ाई जा सकती है।
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टर्म लोन में बदल हो सकती हैं बकाया किस्त
यह सुविधा कृषि, एमएसएमई ऋण धारकों के लिए है। लोन धारकों की बकाया किस्तों को टर्म लोन में बदला जा सकता है। मसलन यदि किसी ऋण धारक की 90 हजार रुपये की किस्त बकाया हैं तो उसे नया लोन मान लिया जाएगा तथा उसकी अदायगी किस्तों में होती रहेगी।
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जिले में लोन की स्थिति
कृषि: 1873.57 करोड़
एमएसएमई: 384.25 करोड़
एजुकेशन : 25 करोड़
होम लोन: 105.12 करोड़
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31 मार्च तक एनपीए की स्थिति
ऋण खाते एनपीए रकम
कृषि : 13767---- 217.75 करोड़
एमएसएमई: 4217--- 95.89 करोड़
अन्य: 2114---- 49.8 करोड़
कुल 20098--- 362.73 करोड़
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इन्होंने कहा...
- लॉकडाउन से प्रभावित हुए कामकाज की वजह से हर वर्ग के ऋणधारक किस्तें चुकाने में असमर्थ हैं। सरकार को ऋण धारकों को राहत देनी चाहिए और कम से कम तीन माह के ब्याज की छूट दी जाए। - घनश्यामदास गर्ग, अध्यक्ष, पउप्र संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल।
- ऋण धारक किस्तें चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। खातों में जो थोड़ी-बहुत बचत थी वह भी बैंकों ने काटनी शुरू कर दी है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और कम से कम लॉकडाउन अवधि का ब्याज माफ किया जाना चाहिए। - अंकित गोयल, अध्यक्ष, साइमा।
- सीसी लिमिट में रिस्ट्रक्चर और टर्म लोन में रिशेड्यूल की सुविधा दी जा रही है। ऋण धारक संबंधित बैंक में आवेदन देकर किस्तों का निर्धारण करा सकते हैं। - शैलेश कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक।
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शामली। लॉकडाउन में प्रभावित हुए कारोबार, छूट चुकी नौकरी और सैलरी की कटौती ने होम लोन धारकों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। 31 अगस्त के बाद से किस्त अदा करने के लिए बैंकों का दबाव बढ़ने लगा है। कुछ बैंकों ने तो खातों से रकम काट भी ली है। इससे ऋण धारकों की बचत भी चली गई। अब उनके सामने इकट्ठा हो चुकी किस्त चुकाने की चुनौती है।
प्राइवेट नौकरी करने वाले रेलपार निवासी आशुतोष शर्मा प्रतिमाह होम लोन की 15 हजार की किस्त दे रहे थे। लॉकडाउन में कंपनी ने उनके वेतन में कटौती कर दी जिससे वह मार्च के बाद किस्त नहीं दे पाए। उनकी छह किस्तें बकाया हो गईं। बैंक प्रबंधक किस्त चुकाने के लिए कह रहे हैं। वह बताते हैं कि वह 15 हजार रुपये प्रतिमाह ही मुश्किल से दे पा रहे थे, अब इकट्ठे 90 हजार कहां से दें। रेस्टोरेंट चलाने वाले प्रवीण गर्ग की भी यही स्थिति है। उन्होंने लॉकडाउन के बाद तीन किस्तें तो चुका दी हैं लेकिन तीन बकाया हैं। कहते हैं कि हर महीने देनदारी बढ़ रही है, काम चल नहीं रहा तो किस्त कहां से भरें। ये तो केवल उदाहरण मात्र हैं। जिले में 1553 होम लोन धारक इसी संकट से जूझ रहे हैं। इन पर 105.12 करोड़ का लोन है। सुप्रीम कोर्ट ने अगले आदेश तक खातों को एनपीए घोषित नहीं करने के आदेश दिए हैं।
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दोबारा करा सकते हैं किस्त का निर्धारण
ऋण धारकों की परेशानी को देखते हुए बैंकों ने टर्म लोन (मियादी ऋण) धारकों को किस्त का दोबारा निर्धारण कराने की सुविधा दी है। ऋण धारक बैंक को प्रार्थना पत्र देकर सकते हैं। इससे उसकी लोन की किस्तों का दोबारा निर्धारण हो जाएगा। मसलन यदि कोई ऋण धारक 15 हजार मासिक की किस्त जमा कर रहा है और उसकी किस्तें बकाया हैं तो उन्हें समाहित कर किस्त की राशि बढ़ाई जा सकती है।
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टर्म लोन में बदल हो सकती हैं बकाया किस्त
यह सुविधा कृषि, एमएसएमई ऋण धारकों के लिए है। लोन धारकों की बकाया किस्तों को टर्म लोन में बदला जा सकता है। मसलन यदि किसी ऋण धारक की 90 हजार रुपये की किस्त बकाया हैं तो उसे नया लोन मान लिया जाएगा तथा उसकी अदायगी किस्तों में होती रहेगी।
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जिले में लोन की स्थिति
कृषि: 1873.57 करोड़
एमएसएमई: 384.25 करोड़
एजुकेशन : 25 करोड़
होम लोन: 105.12 करोड़
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31 मार्च तक एनपीए की स्थिति
ऋण खाते एनपीए रकम
कृषि : 13767---- 217.75 करोड़
एमएसएमई: 4217--- 95.89 करोड़
अन्य: 2114---- 49.8 करोड़
कुल 20098--- 362.73 करोड़
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इन्होंने कहा...
- लॉकडाउन से प्रभावित हुए कामकाज की वजह से हर वर्ग के ऋणधारक किस्तें चुकाने में असमर्थ हैं। सरकार को ऋण धारकों को राहत देनी चाहिए और कम से कम तीन माह के ब्याज की छूट दी जाए। - घनश्यामदास गर्ग, अध्यक्ष, पउप्र संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल।
- ऋण धारक किस्तें चुकाने की स्थिति में नहीं हैं। खातों में जो थोड़ी-बहुत बचत थी वह भी बैंकों ने काटनी शुरू कर दी है। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और कम से कम लॉकडाउन अवधि का ब्याज माफ किया जाना चाहिए। - अंकित गोयल, अध्यक्ष, साइमा।
- सीसी लिमिट में रिस्ट्रक्चर और टर्म लोन में रिशेड्यूल की सुविधा दी जा रही है। ऋण धारक संबंधित बैंक में आवेदन देकर किस्तों का निर्धारण करा सकते हैं। - शैलेश कुमार, अग्रणी जिला प्रबंधक।