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Shamli News: प्रोजेक्ट ऑफिसर की नौकरी छोड़ गाय के गोबर से मूर्तियां बना रहा अंकित
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थाना भवन क्षेत्र के गांव कुतुबगढ में गोवंश से बानाई गयी आकर्षक मूर्तियां
गोवंशों को बचाने की अनूठी पहल...
- 35 महिलाओंं को दिया हुआ है रोजगार, कई राज्यों कर रहा सप्लाई
- गोबर से बनी मूर्तियां विसर्जित करने से पर्यावरण प्रदूषित होने का भी खतरा नहीं
- पांच साल से चलाई हुई है मुहिम, अन्य लोगों को भी किया जा रहा जागरूक
फोटो समाचार
अनिल अग्रवाल
थाना भवन। एमएससी एग्रीकल्चर के बाद प्रोजेक्ट ऑफिसर की नौकरी छोड़कर क्षेत्र के गांव कुतुबगढ़ निवासी अंकित कुमार रोड़ ने गोवंश को बचाने की अनूठी मुहिम चलाई हुई है। पिछले पांच साल से अंकित बेसहारा घूमने वाले गोवंश को जहां सहारा दे रहे हैं वहीं, गोवंश के गोबर से भगवान की मूर्तियोंं से लेकर गिफ्ट आइटम तैयार कराकर शामली के अलावा, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड़ के विभिन्न स्थानों पर ऑनलाइन और ऑफलाइन बेच रहे हैं। यही नहीं क्षेत्र की 35 महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है। लोगों से भी अपील करते हैं कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए गोवंश के गोबर से तैयार गिफ्ट का प्रयोग करें तथा गोवंशों को बचाने में आगे आएं।
मां से प्रेरित होकर शुरू की थी मुहिम
अंकित रोड़ ने बताया रामपुर से एमएससी एग्रीकल्चर के बाद उत्तराखंड में वर्ष 2017 में प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। नौकरी अभी चल रही थी, लेकिन माता श्यामो देवी ने उन्हें गो सेवा के लिये प्रेरित किया। माता के आदेश पर नौकरी छोड़ कर गांव में आ गया तथा करीब पांच साल पहले गोवंश के गोबर से मूर्तियां व गिफ्ट आइटम बनाने का काम शुरू किया । अंकित सैनी द्वारा निर्मित गोबर से बनी मूर्तियां व दूसरे आइटम शुद्ध ही नहीं बल्कि इको फ्रेंडली भी होते हैं। मूर्तियोंं को गोबर के माध्यम से ही तैयार कराया जाता है। इसके बाद पेंट से उसे सुंदर रूप दिया जाता है।
30 रुपये किलो में खरीदते हैं गोवंश का गोबर
अंकित ने बताया कि शुरूआत में उसे दिक्कत भी आई। उसने 30 रुपये किलो में गोबर से बने उपले और गोबर खरीदना शुरू कर दिया। उपलों के माध्यम से ही मूर्तियां, गिफ्ट आइटम ट्राॅफी, मोमेंटो, होली के रंग, दीपक आदि बनाकर देशभर में सप्लाई करते हैं। सभी ऑर्डर ऑनलाइन मिलते हैं और पार्सल के जरिए खरीदारों को सामान पहुंचाते हैं ।
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गोवंशों को भी देते हैं सहारा
अंकित ने बताया कि यदि दूध देने के बाद कोई गोवंश को छोड़ देता है तो वह ऐसी गोवंश को भी सहारा देते हैं। गोमूत्र से कीटनाशक बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू कर दिया है। गो पालकों को गाय के गोबर व गो मूत्र के दाम मिलने लगेंगे तो फिर लोग गो धन को बेसहारा छोड़ने के स्थान पर पालने लगेंगे। लोगों को भी गोवंश के गोबर से आइटम बनाकर बिक्री के प्रति जागरूक करते हैं। बताया कि हर साल कई लाख रुपये कमा लेते हैं।
मूर्तियां विसर्जित करने पर भी पर्यावरण नहीं होगा प्रदूषित
अंकित द्वारा तैयार मूर्तियां इको फ्रेंडली होती है। यदि इन तैयार मूर्तियों का विसर्जन भी किया जाता है तो इससे पर्यावरण के प्रदूषित होने का खतरा नहीं रहता है।
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- 35 महिलाओंं को दिया हुआ है रोजगार, कई राज्यों कर रहा सप्लाई
- गोबर से बनी मूर्तियां विसर्जित करने से पर्यावरण प्रदूषित होने का भी खतरा नहीं
- पांच साल से चलाई हुई है मुहिम, अन्य लोगों को भी किया जा रहा जागरूक
फोटो समाचार
अनिल अग्रवाल
थाना भवन। एमएससी एग्रीकल्चर के बाद प्रोजेक्ट ऑफिसर की नौकरी छोड़कर क्षेत्र के गांव कुतुबगढ़ निवासी अंकित कुमार रोड़ ने गोवंश को बचाने की अनूठी मुहिम चलाई हुई है। पिछले पांच साल से अंकित बेसहारा घूमने वाले गोवंश को जहां सहारा दे रहे हैं वहीं, गोवंश के गोबर से भगवान की मूर्तियोंं से लेकर गिफ्ट आइटम तैयार कराकर शामली के अलावा, हरियाणा, झारखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड़ के विभिन्न स्थानों पर ऑनलाइन और ऑफलाइन बेच रहे हैं। यही नहीं क्षेत्र की 35 महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है। लोगों से भी अपील करते हैं कि पर्यावरण को प्रदूषित होने से बचाने के लिए गोवंश के गोबर से तैयार गिफ्ट का प्रयोग करें तथा गोवंशों को बचाने में आगे आएं।
मां से प्रेरित होकर शुरू की थी मुहिम
अंकित रोड़ ने बताया रामपुर से एमएससी एग्रीकल्चर के बाद उत्तराखंड में वर्ष 2017 में प्रोजेक्ट ऑफिसर के पद पर उनकी नियुक्ति हो गई। नौकरी अभी चल रही थी, लेकिन माता श्यामो देवी ने उन्हें गो सेवा के लिये प्रेरित किया। माता के आदेश पर नौकरी छोड़ कर गांव में आ गया तथा करीब पांच साल पहले गोवंश के गोबर से मूर्तियां व गिफ्ट आइटम बनाने का काम शुरू किया । अंकित सैनी द्वारा निर्मित गोबर से बनी मूर्तियां व दूसरे आइटम शुद्ध ही नहीं बल्कि इको फ्रेंडली भी होते हैं। मूर्तियोंं को गोबर के माध्यम से ही तैयार कराया जाता है। इसके बाद पेंट से उसे सुंदर रूप दिया जाता है।
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30 रुपये किलो में खरीदते हैं गोवंश का गोबर
अंकित ने बताया कि शुरूआत में उसे दिक्कत भी आई। उसने 30 रुपये किलो में गोबर से बने उपले और गोबर खरीदना शुरू कर दिया। उपलों के माध्यम से ही मूर्तियां, गिफ्ट आइटम ट्राॅफी, मोमेंटो, होली के रंग, दीपक आदि बनाकर देशभर में सप्लाई करते हैं। सभी ऑर्डर ऑनलाइन मिलते हैं और पार्सल के जरिए खरीदारों को सामान पहुंचाते हैं ।
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गोवंशों को भी देते हैं सहारा
अंकित ने बताया कि यदि दूध देने के बाद कोई गोवंश को छोड़ देता है तो वह ऐसी गोवंश को भी सहारा देते हैं। गोमूत्र से कीटनाशक बनाने के प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू कर दिया है। गो पालकों को गाय के गोबर व गो मूत्र के दाम मिलने लगेंगे तो फिर लोग गो धन को बेसहारा छोड़ने के स्थान पर पालने लगेंगे। लोगों को भी गोवंश के गोबर से आइटम बनाकर बिक्री के प्रति जागरूक करते हैं। बताया कि हर साल कई लाख रुपये कमा लेते हैं।
मूर्तियां विसर्जित करने पर भी पर्यावरण नहीं होगा प्रदूषित
अंकित द्वारा तैयार मूर्तियां इको फ्रेंडली होती है। यदि इन तैयार मूर्तियों का विसर्जन भी किया जाता है तो इससे पर्यावरण के प्रदूषित होने का खतरा नहीं रहता है।

थाना भवन क्षेत्र के गांव कुतुबगढ में गोवंश से बानाई गयी आकर्षक मूर्तियां

थाना भवन क्षेत्र के गांव कुतुबगढ में गोवंश से बानाई गयी आकर्षक मूर्तियां

थाना भवन क्षेत्र के गांव कुतुबगढ में गोवंश से बानाई गयी आकर्षक मूर्तियां