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गर्भ में पल रहे शिशु को मारना बड़ा पाप : मुनि
Tue, 11 Feb 2025 11:45 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
संवाद न्यूज एजेंसी, शामली
Updated Tue, 11 Feb 2025 11:45 PM IST
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वीवी इंटर कॉलेज में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन मौजूद श्रद्धालु। सौजन्य- आयोजककर
शामली। आचार्य 108 सौरभ सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन गर्भ कल्याणक पूजा अर्चना की गई। इस अवसर पर जैन आचार्य ने कहा कि भ्रूण हत्या पूरी तरह से बंद होनी चाहिए। गर्भ में पल रहे शिशु को मारना बहुत बड़ा पाप है।
वीवी इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मंगलवार को आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि हिंसा न करो, अहिंसा करो। हॉस्पिटल भी कत्लखाने बन गए हैं, जो शिशु को मारते हैं। लाखों की संख्या में भ्रूण हत्या की जा रही है, इसको हमें रोकना है। परमात्मा गर्भकल्याणक तक एक यात्रा है। जैन धर्म जैन दर्शन अहिंसा की पद्धतियां सबसे पहले स्वीकार करता है। जैन धर्म को कोई भी अपनाते हैं। जन्म से जैन होना कोई बात नहीं। जैन की पद्धति पर चलना जैन माना जाता है।
उन्होंने कहा जैन धर्म अहिंसा, संयम, तपस्या का विस्तार है। पैर के नीचे जीव हिंसा नहीं करनी चाहिए। घर परिवार में हमें हिंसा को रोकना हैं। जैन कुल में में जन्म लेने से 50 प्रतिशत हिंसा छूट जाती है। उन्होंने कहा जैन धर्म में किसी को पीड़ा पहुंचाने की पद्धति नहीं है।
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इससे पूर्व जिन अभिषेक एवं योग मंडल शेष पूजा आदि किया गया। पंडित कोमलचंद जैन ने दीप प्रज्ज्वलित किया।
इस अवसर पर श्री श्री मज्जिनेंद्र मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति एवं श्री 1008 पार्श्वनाथ अतिशय दिगंबर जैन मंदिर कमेटी शामली के पदाधिकारियों के अलावा अमित जैन, प्रवीण जैन, राजेश जैन, सलेकचंद जैन, नवीन जैन, अंकित जैन, सुनील जैन, राजीव जैन, विनय जैन आदि मौजूद रहे।
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वीवी इंटर कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में मंगलवार को आचार्य सौरभ सागर महाराज ने कहा कि हिंसा न करो, अहिंसा करो। हॉस्पिटल भी कत्लखाने बन गए हैं, जो शिशु को मारते हैं। लाखों की संख्या में भ्रूण हत्या की जा रही है, इसको हमें रोकना है। परमात्मा गर्भकल्याणक तक एक यात्रा है। जैन धर्म जैन दर्शन अहिंसा की पद्धतियां सबसे पहले स्वीकार करता है। जैन धर्म को कोई भी अपनाते हैं। जन्म से जैन होना कोई बात नहीं। जैन की पद्धति पर चलना जैन माना जाता है।
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उन्होंने कहा जैन धर्म अहिंसा, संयम, तपस्या का विस्तार है। पैर के नीचे जीव हिंसा नहीं करनी चाहिए। घर परिवार में हमें हिंसा को रोकना हैं। जैन कुल में में जन्म लेने से 50 प्रतिशत हिंसा छूट जाती है। उन्होंने कहा जैन धर्म में किसी को पीड़ा पहुंचाने की पद्धति नहीं है।
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इससे पूर्व जिन अभिषेक एवं योग मंडल शेष पूजा आदि किया गया। पंडित कोमलचंद जैन ने दीप प्रज्ज्वलित किया।
इस अवसर पर श्री श्री मज्जिनेंद्र मुनिसुव्रतनाथ पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव समिति एवं श्री 1008 पार्श्वनाथ अतिशय दिगंबर जैन मंदिर कमेटी शामली के पदाधिकारियों के अलावा अमित जैन, प्रवीण जैन, राजेश जैन, सलेकचंद जैन, नवीन जैन, अंकित जैन, सुनील जैन, राजीव जैन, विनय जैन आदि मौजूद रहे।

वीवी इंटर कॉलेज में पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के दूसरे दिन मौजूद श्रद्धालु। सौजन्य- आयोजककर