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Kanwar Yatra: बम-बम भोले का है शोर, डूबने वालों की जान बचा रहे मुस्लिम गोताखोर, बने सौहार्द की मिसाल

Sun, 09 Jul 2023 11:14 AM IST
Dimple Sirohi महबूब अली, अमर उजाला, शामली
महबूब अली, अमर उजाला, शामली Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 09 Jul 2023 11:14 AM IST
सार

कांवड़ यात्रा के दौरान मुस्लिम गोताखोर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश कर रहे हैं। शामली में यमुना पर तैनात 25 गोताखोर यमुना में डूबने वालों की जान बचा रहे हैं। 10 वर्षों में अब तक 90 लोगों की जान इन गोताखोरों द्वारा बचाई जा चुकी है।

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Kanwar Yatra: Muslim divers saving the lives of drowning in Shamli, every house has a swimmer
गोताखोर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कांवड़ यात्रा के दौरान एक बार फिर मुस्लिम गोताखोर इंसानियत का धर्म निभाते हुए यमुना तट पर तैनात हो चुके हैं। मजहबी दीवारों को तोड़कर एक दशक से शिवभक्तों को डूबने से बचाने वाले इन गोताखारों पर जिले को नाज है। वह यूपी ही नहीं, हरियाणा, मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान हर राज्य के कांवड़ियों को डूबने से बचाते हैं। इनका मकसद सिर्फ इंसान की जान बचाना होता है, जिसमें कोई धर्म आड़े नहीं आता है।
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कांवड़ यात्रा के दौरान 25 गोताखोर तैनात हैं, और ये सभी मुस्लिम धर्म से हैं। हर साल की तरह इस बार भी ये गोताखोर भोले के भक्तों को बचाने के लिए यमुना तट पर तैनात हो चुके हैं। पिछले दस साल में अब तक 90 से अधिक शिवभक्तों को सकुशल निकालकर सौहार्द की मिसाल कायम कर चुके हैं। पिछले आठ दिन से सभी गोताखोर कैराना पुल के अलावा शामली नहर, बडाैली पुल के पास तैनात होकर पानी में डूबने वालों को बचाने के लिए डटे हुए हैं।
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Kanwar Yatra: Muslim divers saving the lives of drowning in Shamli, every house has a swimmer
गोताखोर जाहिद - फोटो : Amar Ujala
प्रशासन ने अभी ये 25 गोताखोर तैनात किए हुए है, लेकिन इनके अलावा गांव के ही 25 और गोताखोरों को अलर्ट किया गया है। जो सूचना मिलते ही आसपास डूबने वाले लोगों को निकालने के लिए पहुंच जाते हैं। खास बात यह है कि सभी गोताखोर मुस्लिम हैं और शामली के मवी अहतमाल तिमाली गांव के रहने वाले हैं। 

गांव की आबादी करीब तीन हजार, हर घर में तैराक
ग्राम प्रधान पति जाहिद हसन कि मवी अहतमाल तिमाली गांव की आबादी करीब तीन हजार है। यहां पर 285 से अधिक मकान होंगे। खास बात यह है कि हर घर में कोई न कोई गोताखोर हैं। एक घर में तीन से चार सदस्य भी तैरना जानते हैं। क्योंकि गांव यमुना किनारे है और बचपन में ही सभी तैरना सीख लेते हैं।
 

Kanwar Yatra: Muslim divers saving the lives of drowning in Shamli, every house has a swimmer
गोताखोर नौशाद - फोटो : Amar Ujala
शामली से होकर गुजरते हैं छह प्रदेशों के शिवभक्त
शाामली से कांवड़ लेकर, मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और शामली, बागपत, गाजियाबाद आदि से शिवभक्त गुजरते हैं। कई बार यमुना नदी में स्नान करने के दौरान शिवभक्त डूब जाते हैं, जिसके कारण यहां पर अलग से गोताखोरों की टीम को तैनात किया जाता है।

डूबते को जीवित निकालने पर होने वाली खुशी शब्दों से बयां नहीं होती
गोताखोर जाहिद, नौशाद, बिल्लू का कहना है कि पिछले कई साल से शिवभक्तों को बचाने के लिए जुटे हैं। दस सालों में करीब 90 से अधिक को जिंदा बाहर निकाला है, जबकि कुछ मौत के मुंह में समा गए। लोगों को जिंदा निकालने पर मन को जो खुशी होती है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यदि किसी को बचाने में कामयाब नहीं हो पाते रात को गम में खाना तक नहीं खाते। जब तक जीवित रहेंगे, लोगों की जान बचाने का कार्य जारी रहेगा।
 
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गोताखोर बिल्लू - फोटो : Amar Ujala
प्रशासन से मिलती है सिर्फ मदद, इंसानियत के नाते बचा रहे जान
नौशाद और बिल्लू ने बताया कि कांवड़ यात्रा के दौरान उन्हें प्रशासन से सिर्फ 400 रुपये मदद के नाम पर मिलते हैं। जिसमें गुजारा करना संभव नहीं है। मगर वे सभी इंसानियत के नाते शिवभक्तों की जान बचा रहे हैं। अन्य दिनों में सभी मजदूरी और खेतीबाड़ी कर परिवार का पालन पोषण करते हैं।

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गोताखोर - फोटो : Amar Ujala
सौहार्द की मिसाल कायम कर रहे गोताखोर
एएसपी ओपी सिंह का कहना है कि सभी गोताखोरों की शिफ्टों में ड्यूटी लगाई गई है। सभी आपसी प्यार और सौहार्द की भी मिसाल कायम कर रहे हैं। जबकि हर समय गोताखोरों की जान जोखिम में रहती है। अन्य को भी इनसे प्रेरणा लेनी चाहिए। ग्राम प्रधान पति जाहिद हसन का कहना है कि गांव के अन्य लोग भी बिना किसी पारिश्रमिक के डूबे लोगों को निकालने में आगे रहते हैं। सभी को अलर्ट किया गया है।
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