शामली। आज भी ऐसे लोगों की कमी नहीं जो अपने माता-पिता और बुजुर्ग की सेवा के लिए अपना तन मन धन सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार रहते हैं। जिले में रविवार को कांवड़ यात्रा के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला। पानीपत निवासी चार भाई अपने माता-पिता को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से गंगाजल लेकर पहुंचे हैं। इन भाइयों के सेवाभाव और हिम्मत की हर कोई दाद दे रहा है।
हरियाणा के पानीपत शहर के विद्याराम कालोनी निवासी सुक्खन के पांच बेटे सतेंद्र (40), निरंजन (32), पप्पन (40), तेजवीर (37), जितेंद्र पानीपत में रूई-धागा गाड़ी लोड करने के कारोबार से जुड़े हैं। सभी भाइयों की अपने मां-बाप को हरिद्वार से पैदल कांवड़ यात्रा कराने की इच्छा हुई। 19 जुलाई को पांचों भाई अपने माता पिता को साथ हरिद्वार पहुंच गए। हरिद्वार हर की पैडी पर सभी पांचों भाइयों ने कांवड़ बनाई। कांवड़ में दोनों ओर मां-बाप को बैठाने के लिए चौकी की व्यवस्था की। अपने मां-बाप को कांवड़ में हरिद्वार से चल दिए। रविवार को शामली पूर्वी यमुना नहर पुल के पास वह थोड़ी देकर के लिए रुके। पानीपत शहर के विद्याराम कालोनी निवासी सुक्खन का बेटा पप्पन ने बताया कि रविवार रात में कैराना यमुना नदी के पुल पर विश्राम करके सोमवार को पानीपत के लिए रवाना होंगे। वे घर की खुशहाली के लिए मां बाप को कांवड़ में लाए है। कांवड़ यात्रा में पप्पन के भाई के पुत्र राजन सात साल और रवि चार साल मौजूद रहे।