{"_id":"5de3fe408ebc3e54761784e8","slug":"justice-is-not-available-on-time-due-to-rusty-system-shamli-news-mrt4565227187","type":"story","status":"publish","title_hn":"जंग लगी व्यवस्था के कारण समय पर नहीं मिलता इंसाफ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जंग लगी व्यवस्था के कारण समय पर नहीं मिलता इंसाफ
विज्ञापन
सीएमओ डॉ संजय भटनागर।
- फोटो : SHAMLI
जंग लगी व्यवस्था के कारण समय पर नहीं मिलता इंसाफ
शामली। जंग लगी व्यवस्था के कारण ही पीड़ित परिजनों को वक्त पर इंसाफ नहीं मिल पाता। नियम कानून के फेर में वर्षों पीड़ितों को अफसरों के चौखट पर ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ता है। जिले में विसरा रिपोर्ट के इंतजार में कई लोगों की मौत के राज से पर्दा नहीं उठ सका। जनपद में ऐसे 12 मामले हैं, जिनकी महीनों बाद भी प्रयोगशाला से अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट नहीं आने के कारण मौत की गुत्थी अनसुलझी पहले बनी हुई है।
हादसे में किसी व्यक्ति के मौत होने के बाद पुलिस उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती है। अधिकतर मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट हो जाता है। कई मामलों में कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में चिकित्सक शव का विसरा लेकर उन्हें बोतल में सुरक्षित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच कराने के लिए पुलिस को सौंप देते हैं। जनपद में सुरक्षित किए जाने वाले विसरा परीक्षण के लिए गाजियाबाद स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाते है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जनपद में 12 मामलों में विसरा परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनमें अधिकतर विसरा तीन से छह माह पहले भेजे गए थे, जिनकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। विसरा जांच रिपोर्ट न आने से मौत का राज बोतलों में बंद है।
जांच में देरी से विसरा रिपोर्ट हो सकती है प्रभावित
जनपद में पोस्टमार्टम के दौरान शव से लिए जाने वाले विसरा को सुरक्षित रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। डाक्टर विसरा को बोतल में सुरक्षित कर पुलिस को सौंप देते हैं। ऐसे में जांच में देरी से जांच रिपोर्ट भी प्रभावित हो सकती है।
विज्ञापन
जनपद में थानावार विसरा रिपोर्ट की स्थिति
थाना विसरा संख्या
शामली कोतवाली - 0
आदर्श मंडी - 03
बाबरी - 0
थानाभवन - 01
गढ़ीपुख्ता - 0
झिंझाना - 02
कैराना - 02
कांधला - 04
कुल - 12
विसरा स्लाइम सोल्यूशन के साथ बोतल (जार) में सीलबंद कर पुलिस को दिया जाता है। पुलिस जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजती है। जब तक बोतल पर सील लगी रहती है, तब तक विसरा खराब होने की संभावना कम रहती है। प्रयोगशाला में जांच के समय ही सील खोली जाती है। -डा. संजय भटनागर, सीएमओ।
विसरा रिपोर्ट देरी से आने का लाभ सीधे आरोपियों को मिलता है। पहले तो विसरा जांच रिपोर्ट नहीं आने के कारण पुलिस कार्रवाई से बचती है। पुलिस ने आरोपियों का चालान भी कर दिया तो विसरा रिपोर्ट नहीं आने का लाभ उठाकर आरोपी जमानत पा लेता है। विसरा रिपोर्ट आने पर आरोपियों को बचने का मौका नहीं मिलता। - नसीम अहमद, महासचिव बार एसोसिएशन कैराना।
जिले मेें विसरा को समय पर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिया जाता है। जांच रिपोर्ट के लिए विवेचकों द्वारा समय-समय पर रिमांइडर भेजा जाता है। - अजय कुमार, एसपी।
केस एक: सात माह से विसरा रिपोर्ट की इंतजार में उलझा पुन्नालाल का इंसाफ
थानाभवन। मोहल्ला खैल व हाल निवासी मुजफ्फरनगर अशोक ने 18 फरवरी को थाने में शिकायत करते हुए बताया था कि उनके पिता पुन्नालाल (61) संदिग्ध हालत में लापता हो गए। पीड़ित ने 20 अप्रैल को दोबारा थाने में शिकायत करते हुए पिता की बरामदगी की मांग की थी। पुलिस ने वृद्ध की तलाश शुरू की। इस दौरान पुलिस ने पुन्नालाल वे साथ कस्बे में रहने वाली उसकी पौत्री लता व दूसरे बेटे सुनील को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने पुन्नालाल का शव उसी के बंद पड़े घर से बरामद किया था। पुलिस ने उसी समय विसरा रिपोर्ट प्रयोगशाला भेज दी थी, लेकिन सात माह बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। थाना प्रभारी संदीप बालियान ने बताया कि विसरा रिपोर्ट के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
केस दो: पांच माह बाद भी नहीं खुला आरिफ की मौत का राज
कैराना। कस्बा कैराना के मोहल्ला इस्लामनगर में करीब पांच माह पहले 30 जून को रात में 26 वर्षीय आरिफ शव घर में ही चारपाई पर मिला था। पुलिस ने प्रथम दृष्टया जहर से युवक की मौत होना माना था। पुलिस ने विसरा रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए और कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर मृतक के भतीजे की तरफ से एक सितंबर को मृतक की पत्नी सब्बो, रिश्तेदार नोशी, गुलजार, अनवरी, यूसुफ और यूनुस के खिलाफ जहर देकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कोतवाली प्रभारी यशपाल धामा का कहना है कि विसरा परीक्षण रिपोर्ट आने में कुछ समय लगता है। जैसे ही रिपोर्ट आती है, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
शामली। जंग लगी व्यवस्था के कारण ही पीड़ित परिजनों को वक्त पर इंसाफ नहीं मिल पाता। नियम कानून के फेर में वर्षों पीड़ितों को अफसरों के चौखट पर ठोकरें खाने को मजबूर होना पड़ता है। जिले में विसरा रिपोर्ट के इंतजार में कई लोगों की मौत के राज से पर्दा नहीं उठ सका। जनपद में ऐसे 12 मामले हैं, जिनकी महीनों बाद भी प्रयोगशाला से अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट नहीं आने के कारण मौत की गुत्थी अनसुलझी पहले बनी हुई है।
हादसे में किसी व्यक्ति के मौत होने के बाद पुलिस उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजती है। अधिकतर मामलों में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण स्पष्ट हो जाता है। कई मामलों में कारण स्पष्ट नहीं हो पाता। ऐसे मामलों में चिकित्सक शव का विसरा लेकर उन्हें बोतल में सुरक्षित कर विधि विज्ञान प्रयोगशाला में जांच कराने के लिए पुलिस को सौंप देते हैं। जनपद में सुरक्षित किए जाने वाले विसरा परीक्षण के लिए गाजियाबाद स्थित विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजे जाते है। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक जनपद में 12 मामलों में विसरा परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इनमें अधिकतर विसरा तीन से छह माह पहले भेजे गए थे, जिनकी अभी तक रिपोर्ट नहीं आई है। विसरा जांच रिपोर्ट न आने से मौत का राज बोतलों में बंद है।
विज्ञापन
जांच में देरी से विसरा रिपोर्ट हो सकती है प्रभावित
जनपद में पोस्टमार्टम के दौरान शव से लिए जाने वाले विसरा को सुरक्षित रखने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। डाक्टर विसरा को बोतल में सुरक्षित कर पुलिस को सौंप देते हैं। ऐसे में जांच में देरी से जांच रिपोर्ट भी प्रभावित हो सकती है।
विज्ञापन
जनपद में थानावार विसरा रिपोर्ट की स्थिति
थाना विसरा संख्या
शामली कोतवाली - 0
आदर्श मंडी - 03
बाबरी - 0
थानाभवन - 01
गढ़ीपुख्ता - 0
झिंझाना - 02
कैराना - 02
कांधला - 04
कुल - 12
विसरा स्लाइम सोल्यूशन के साथ बोतल (जार) में सीलबंद कर पुलिस को दिया जाता है। पुलिस जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजती है। जब तक बोतल पर सील लगी रहती है, तब तक विसरा खराब होने की संभावना कम रहती है। प्रयोगशाला में जांच के समय ही सील खोली जाती है। -डा. संजय भटनागर, सीएमओ।
विसरा रिपोर्ट देरी से आने का लाभ सीधे आरोपियों को मिलता है। पहले तो विसरा जांच रिपोर्ट नहीं आने के कारण पुलिस कार्रवाई से बचती है। पुलिस ने आरोपियों का चालान भी कर दिया तो विसरा रिपोर्ट नहीं आने का लाभ उठाकर आरोपी जमानत पा लेता है। विसरा रिपोर्ट आने पर आरोपियों को बचने का मौका नहीं मिलता। - नसीम अहमद, महासचिव बार एसोसिएशन कैराना।
जिले मेें विसरा को समय पर प्रयोगशाला में जांच के लिए भेज दिया जाता है। जांच रिपोर्ट के लिए विवेचकों द्वारा समय-समय पर रिमांइडर भेजा जाता है। - अजय कुमार, एसपी।
केस एक: सात माह से विसरा रिपोर्ट की इंतजार में उलझा पुन्नालाल का इंसाफ
थानाभवन। मोहल्ला खैल व हाल निवासी मुजफ्फरनगर अशोक ने 18 फरवरी को थाने में शिकायत करते हुए बताया था कि उनके पिता पुन्नालाल (61) संदिग्ध हालत में लापता हो गए। पीड़ित ने 20 अप्रैल को दोबारा थाने में शिकायत करते हुए पिता की बरामदगी की मांग की थी। पुलिस ने वृद्ध की तलाश शुरू की। इस दौरान पुलिस ने पुन्नालाल वे साथ कस्बे में रहने वाली उसकी पौत्री लता व दूसरे बेटे सुनील को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसके बाद दोनों की निशानदेही पर पुलिस ने पुन्नालाल का शव उसी के बंद पड़े घर से बरामद किया था। पुलिस ने उसी समय विसरा रिपोर्ट प्रयोगशाला भेज दी थी, लेकिन सात माह बाद भी जांच रिपोर्ट नहीं आई है। थाना प्रभारी संदीप बालियान ने बताया कि विसरा रिपोर्ट के लिए संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया। रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे।
केस दो: पांच माह बाद भी नहीं खुला आरिफ की मौत का राज
कैराना। कस्बा कैराना के मोहल्ला इस्लामनगर में करीब पांच माह पहले 30 जून को रात में 26 वर्षीय आरिफ शव घर में ही चारपाई पर मिला था। पुलिस ने प्रथम दृष्टया जहर से युवक की मौत होना माना था। पुलिस ने विसरा रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई करने की बात कही थी, लेकिन परिजन इससे संतुष्ट नहीं हुए और कोर्ट का सहारा लिया। कोर्ट के आदेश पर मृतक के भतीजे की तरफ से एक सितंबर को मृतक की पत्नी सब्बो, रिश्तेदार नोशी, गुलजार, अनवरी, यूसुफ और यूनुस के खिलाफ जहर देकर हत्या करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। कोतवाली प्रभारी यशपाल धामा का कहना है कि विसरा परीक्षण रिपोर्ट आने में कुछ समय लगता है। जैसे ही रिपोर्ट आती है, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।