{"_id":"5ceecc98bdec22075c117e40","slug":"jaanleva-jaam-se-har-koi-halkaan","type":"story","status":"publish","title_hn":"जानलेवा जाम, हर कोई हलाकान, व्यवस्था बेलगाम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जानलेवा जाम, हर कोई हलाकान, व्यवस्था बेलगाम
Wed, 29 May 2019 11:47 PM IST
NAVEEN GUPTA
amarujala
amarujala
Published by: NAVEEN GUPTA
Updated Wed, 29 May 2019 11:47 PM IST
विज्ञापन
file
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
शामली चीनी मिल में गन्ना लेकर आने वाले वाहनों से पिछले करीब एक माह से शहर की यातायात व्यवस्था चरमराई हुई है, लेकिन प्रशासन पूरी तरह उदासीन है। आए दिन एंबुलेंस जाम में फंस रही हैं। मरीज तड़पते रहते हैं। मंगलवार रात समय से उपचार नहीं मिलने से एक किशोरी की मौत हो गई। स्कूलों की छुट्टी की समय स्कूली वाहन जाम में फंस जाते हैं, उनमें सवार बच्चे भीषण गर्मी में बिलबिलाते रहते हैं। व्यापारी हो या आम लोग हर कोई जाम से परेशान है। सबका एक ही सवाल इस जाम क्या नहीं है कोई समाधान।
शामली शहर में पिछले करीब एक माह से गन्ना लदे वाहनों के जाम से हर कोई हलाकान है। कई दिन से लगातार लोगों को गन्ना वाहनों का जाम झेलना पड़ रहा है। जाम की प्रमुख वजह क्षमता से अधिक गन्ने का अधिक इंडेंट जारी करना बताया गया है। गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियों और भैंसा बुग्गी मिल रोड से लेकर अस्पताल रोड, हनुमान रोड, वीवी इंटर कालेज रोड, धीमानपुरा और बुढ़ाना बस अड्डे तक खड़ी रहती हैं। इससे शहर में चारों तरफ जाम लगा रहता है। इन मार्गों पर जाम के कारण ई रिक्शा, दो पहिया वाहन गली-मोहल्लों और बाजारों से निकलने के कारण वहां भी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्कूल और कोचिंग जाने वाले छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर जाम से जैसे तैसे निकलने को मजबूर है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण करीब एक हजार मरीजों का रोजाना आना-जाना होता है। मरीज जैसे तैसे अस्पताल तक पहुंच पाते है।
मिल बंद होने के इंतजार में चुप्पी साधे हैं अफसर
शामली। शामली चीनी मिल का पेराई सत्र अंतिम चरण में चल रहा है। पेराई सत्र की समाप्ति की जल्दी में गन्ने का इंडेंट अधिक जारी कर दिया गया। एक दो दिन जाम हटते ही फिर अधिक इंडेंट भेज दिया जाता है। करीब एक माह से ऐसे ही हो रहा है। अधिकारी भी मिल बंद होने के इंतजार में है। शायद इसी के चलते अभी तक जाम को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पाए।
विज्ञापन
डीएम की चेतावनी भी बेअसर
शामली। डीएम अखिलेश सिंह ने करीब 15 दिन पहले जाम की समस्या को देखते हुए कलक्ट्रेट में मिल अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर मिल की तरफ से इंडेंट अधिक जारी हो जाता है या मिल में कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो गन्ने को शहर के बाहर रोकने की व्यवस्था की जाए। शहर के अंदर इतना ही गन्ना लाया जाए जिससे कि शहर में जाम न लगे और यातायात व्यवस्था न बिगड़े। डीएम की चेतावनी का मिल प्रबंधन पर शायद कोई असर नहीं हुआ।
आधे घंटे का सफर, दो घंटे में सीएचसी पहुंची किशोरी
शामली। सहारनपुर रोड पर स्थित आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव गोमतीपुर से शामली सीएचसी की दूरी करीब 10 किमी है। यह दूरी गाड़ी से आराम से आधा घंटे में तय की जा सकती है, लेकिन मंगलवार रात को जाम के कारण आग में झुलसी किशोरी को सीएचसी तक गाड़ी से पहुंचने में करीब दो घंटे लगे। मृतक किशोरी के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि करीब नौ बजे वे बेटी को गाड़ी से लेकर शामली सीएचसी के लिए चले थे। शामली में रेलवे फाटक धीमानपुरा में गन्ने के जाम में फंस गए। करीब एक घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहने के कारण करीब पौने 11 बजे सीएचसी पर पहुंचे। इसके बाद एंबुलेंस के जाम में फंसने के कारण रात में करीब दो बजे दिल्ली अस्पताल में पहुंचे थे।
10वीं पास थी शिवानी
शामली। आग में झुलसी शिवानी ने इसी साल आरडी इंटर कालेज सिक्का से 10वीं की परीक्षा पास की थी। मजदूरी कर परिवार पालने वाले प्रेम सिंह ने घर की देेखभाल और आर्थिक तंगी के चलते आगे कालेज में एडमिशन नहीं दिलाया था। प्रेम सिंह ने बताया कि शिवानी दूसरे नंबर की बेटी थी। सबसे बड़ी बेटी सोनिया की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर की बेटी लक्ष्मी कक्षा सात में गांव के प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है जबकि सबसे छोटी बेटी वंशिका कक्षा दो में पढ़ती है। प्रेम सिंह को कोई बेटा नहीं है। प्रेम सिंह ने बताया कि मंगलवार रात वे पत्नी के साथ घर से थोड़ी दूरी पर घेर में पशुओं को चारा करने गए थे। शिवानी को खाना बनाने के लिए कहकर गए थे जबकि संध्या अपनी बड़ी बहन के यहां सैदपुरा गई थी। उन्होंने तो बेटी शिवानी की चीख सुनी तो वे दौड़कर पहुंचे और उसे आग में घिरे हुए पाया। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी इस तरह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चली जाएगी। किशोरी की मौत पर मां और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
फोन रिसीव करने से बच रहे मिल अधिकारी
शामली। जाम के संबंध में मिल अधिकारियों से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी। जीएम केन कुलदीप पिलानिया का फोन मिलाया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया। एजीएम केन नरेश कुमार का फोन मिलाया तो अवेलेबल नहीं होना पाया गया। सीनियर केन मैनेजर दीपक राणा के फोन पर पहले रिंग गई, उसके बाद नंबर अमान्य बताया जाने लगा।
मिल अधिकारियों को जाम के समाधान के लिए पहले भी दिशा निर्देश दिए जा चुके है। मिल प्रबंधन अगर जाम की समस्या का समाधान नहीं करता तो कार्रवाई की जाएगी। आग में झुलसी किशोरी को दिल्ली ले जाने के लिए एंबुलेंस के जाम में फंसने का मामला जानकारी में नहीं आया है। इसकी जानकारी की जाएगी। - आनंद कुमार शुक्ल प्रभारी डीएम/एडीएम वित्त एवं राजस्व।
गन्ने के जाम की वजह से अस्पताल में मरीजों को आने जाने में रोज परेशानी हो रही है। एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहती है। जिलाधिकारी ने जाम को लेकर मिल अधिकारियों की मीटिंग भी ली थी, इसके बाद भी जाम का कोई समाधान नहीं हुआ। जाम में एंबुलेंस फंसने की वजह से पीड़ित किशोरी को दिल्ली ले जाने में हुई देरी की जानकारी की जाएगी। - डॉक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।
विज्ञापन
शामली शहर में पिछले करीब एक माह से गन्ना लदे वाहनों के जाम से हर कोई हलाकान है। कई दिन से लगातार लोगों को गन्ना वाहनों का जाम झेलना पड़ रहा है। जाम की प्रमुख वजह क्षमता से अधिक गन्ने का अधिक इंडेंट जारी करना बताया गया है। गन्ने से लदी ट्रैक्टर-ट्रालियों और भैंसा बुग्गी मिल रोड से लेकर अस्पताल रोड, हनुमान रोड, वीवी इंटर कालेज रोड, धीमानपुरा और बुढ़ाना बस अड्डे तक खड़ी रहती हैं। इससे शहर में चारों तरफ जाम लगा रहता है। इन मार्गों पर जाम के कारण ई रिक्शा, दो पहिया वाहन गली-मोहल्लों और बाजारों से निकलने के कारण वहां भी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्कूल और कोचिंग जाने वाले छात्र-छात्राएं जान जोखिम में डालकर जाम से जैसे तैसे निकलने को मजबूर है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र होने के कारण करीब एक हजार मरीजों का रोजाना आना-जाना होता है। मरीज जैसे तैसे अस्पताल तक पहुंच पाते है।
विज्ञापन
मिल बंद होने के इंतजार में चुप्पी साधे हैं अफसर
शामली। शामली चीनी मिल का पेराई सत्र अंतिम चरण में चल रहा है। पेराई सत्र की समाप्ति की जल्दी में गन्ने का इंडेंट अधिक जारी कर दिया गया। एक दो दिन जाम हटते ही फिर अधिक इंडेंट भेज दिया जाता है। करीब एक माह से ऐसे ही हो रहा है। अधिकारी भी मिल बंद होने के इंतजार में है। शायद इसी के चलते अभी तक जाम को लेकर कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पाए।
विज्ञापन
डीएम की चेतावनी भी बेअसर
शामली। डीएम अखिलेश सिंह ने करीब 15 दिन पहले जाम की समस्या को देखते हुए कलक्ट्रेट में मिल अधिकारियों की बैठक लेकर स्पष्ट चेतावनी दी थी कि अगर मिल की तरफ से इंडेंट अधिक जारी हो जाता है या मिल में कोई तकनीकी खराबी आ जाए तो गन्ने को शहर के बाहर रोकने की व्यवस्था की जाए। शहर के अंदर इतना ही गन्ना लाया जाए जिससे कि शहर में जाम न लगे और यातायात व्यवस्था न बिगड़े। डीएम की चेतावनी का मिल प्रबंधन पर शायद कोई असर नहीं हुआ।
आधे घंटे का सफर, दो घंटे में सीएचसी पहुंची किशोरी
शामली। सहारनपुर रोड पर स्थित आदर्श मंडी थानाक्षेत्र के गांव गोमतीपुर से शामली सीएचसी की दूरी करीब 10 किमी है। यह दूरी गाड़ी से आराम से आधा घंटे में तय की जा सकती है, लेकिन मंगलवार रात को जाम के कारण आग में झुलसी किशोरी को सीएचसी तक गाड़ी से पहुंचने में करीब दो घंटे लगे। मृतक किशोरी के पिता प्रेम सिंह ने बताया कि करीब नौ बजे वे बेटी को गाड़ी से लेकर शामली सीएचसी के लिए चले थे। शामली में रेलवे फाटक धीमानपुरा में गन्ने के जाम में फंस गए। करीब एक घंटे से अधिक समय तक जाम में फंसे रहने के कारण करीब पौने 11 बजे सीएचसी पर पहुंचे। इसके बाद एंबुलेंस के जाम में फंसने के कारण रात में करीब दो बजे दिल्ली अस्पताल में पहुंचे थे।
10वीं पास थी शिवानी
शामली। आग में झुलसी शिवानी ने इसी साल आरडी इंटर कालेज सिक्का से 10वीं की परीक्षा पास की थी। मजदूरी कर परिवार पालने वाले प्रेम सिंह ने घर की देेखभाल और आर्थिक तंगी के चलते आगे कालेज में एडमिशन नहीं दिलाया था। प्रेम सिंह ने बताया कि शिवानी दूसरे नंबर की बेटी थी। सबसे बड़ी बेटी सोनिया की शादी हो चुकी है। तीसरे नंबर की बेटी लक्ष्मी कक्षा सात में गांव के प्राइवेट स्कूल में पढ़ती है जबकि सबसे छोटी बेटी वंशिका कक्षा दो में पढ़ती है। प्रेम सिंह को कोई बेटा नहीं है। प्रेम सिंह ने बताया कि मंगलवार रात वे पत्नी के साथ घर से थोड़ी दूरी पर घेर में पशुओं को चारा करने गए थे। शिवानी को खाना बनाने के लिए कहकर गए थे जबकि संध्या अपनी बड़ी बहन के यहां सैदपुरा गई थी। उन्होंने तो बेटी शिवानी की चीख सुनी तो वे दौड़कर पहुंचे और उसे आग में घिरे हुए पाया। उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी बेटी इस तरह उन्हें हमेशा के लिए छोड़कर चली जाएगी। किशोरी की मौत पर मां और तीनों बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
फोन रिसीव करने से बच रहे मिल अधिकारी
शामली। जाम के संबंध में मिल अधिकारियों से फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी से बात नहीं हो सकी। जीएम केन कुलदीप पिलानिया का फोन मिलाया तो उन्होंने रिसीव नहीं किया। एजीएम केन नरेश कुमार का फोन मिलाया तो अवेलेबल नहीं होना पाया गया। सीनियर केन मैनेजर दीपक राणा के फोन पर पहले रिंग गई, उसके बाद नंबर अमान्य बताया जाने लगा।
मिल अधिकारियों को जाम के समाधान के लिए पहले भी दिशा निर्देश दिए जा चुके है। मिल प्रबंधन अगर जाम की समस्या का समाधान नहीं करता तो कार्रवाई की जाएगी। आग में झुलसी किशोरी को दिल्ली ले जाने के लिए एंबुलेंस के जाम में फंसने का मामला जानकारी में नहीं आया है। इसकी जानकारी की जाएगी। - आनंद कुमार शुक्ल प्रभारी डीएम/एडीएम वित्त एवं राजस्व।
गन्ने के जाम की वजह से अस्पताल में मरीजों को आने जाने में रोज परेशानी हो रही है। एंबुलेंस भी जाम में फंसी रहती है। जिलाधिकारी ने जाम को लेकर मिल अधिकारियों की मीटिंग भी ली थी, इसके बाद भी जाम का कोई समाधान नहीं हुआ। जाम में एंबुलेंस फंसने की वजह से पीड़ित किशोरी को दिल्ली ले जाने में हुई देरी की जानकारी की जाएगी। - डॉक्टर संजय भटनागर, सीएमओ।