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उद्योगों की स्थिति सुधरने में लगेगा समय

Thu, 03 Jun 2021 12:13 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jun 2021 12:13 AM IST
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It will take time to improve the condition of industries
उद्योगों की स्थिति सुधरने में लगेगा वक्त
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शामली। कोरोना कर्फ्यू के कारण बंद हुईं या धीमी चल रहीं फैक्टरियों के संचालन में सुधार की उम्मीद जगी है। कोरोना कर्फ्यू में छूट मिलने के बाद अब मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसलिए फैक्टरी संचालकों ने घरों को गए मजदूरों और कारीगरों को वापस बुलाना शुरू कर दिया है। हालांकि उद्यमियों का कहना है कि अभी उद्योग जगत को पटरी पर आने में समय लगेगा, लेकिन धीरे-धीरे मांग बढ़ने की उम्मीद है।
शामली जिले में पेपर मिलों के अलावा डिस्पोजेबल गिलास, लकड़ी की चम्मच, बर्तन और रिम-धुरा बनाने की फैक्टरियां हैं। ये सभी उद्योग कोरोना कर्फ्यू के कारण प्रभावित हुए हैं। मांग नहीं होने तथा कच्चे माल की आपूर्ति नहीं होने के कारण इनमें से करीब 20 प्रतिशत फैक्टरियां बंद करनी पड़ी, जबकि अन्य में भी काम धीमा था। इस कारण फैक्टरी प्रबंधन ने कम कर्मचारियों को बुलाना शुरू कर दिया था तथा कुछ श्रमिक खुद ही अपने घरों को चले गए थे।
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आईआईए शामली के अध्यक्ष अशोक मित्तल बताते हैं कि कोरोना कर्फ्यू में फैक्टरियों के संचालन पर रोक तो नहीं थी, लेकिन मांग नहीं होने तथा कच्चा माल नहीं मिलने से करीब 20 प्रतिशत उद्योग बंद थे। इन्हें अब शुरू किया जा रहा है। इन उद्योगों में काम करने वाले श्रमिक एवं कारीगरों को बुलाया जा रहा है। वह बताते हैं कि उद्योगों को अभी पटरी पर आने में समय लगेगा। क्योंकि बाजार में अभी मांग नहीं बढ़ी है। आईआईए सचिव अनुज गर्ग का कहना है कि जिले में डिस्पोजेबल क्राकरी बनाने की फैक्टरियां काफी संख्या में हैं। जो शादियों और होटलों पर निर्भर हैं। शादियों में कम लोगों की अनुमति मिली है इसलिए खपत कम है। होटल, रेस्टोरेंट भी अभी पूरी तरह नहीं खुले हैं। इसलिए इस तरह के उद्योगों को उबरने में समय लगेगा। शायमा के अध्यक्ष अंकित गोयल बताते हैं कि कोरोना कर्फ्यू में जो उद्योग प्रभावित हुए हैं, उन्हें पटरी पर आने में समय लगेगा। काम बढ़ने के साथ ही अपने घरों को गए श्रमिक और कारीगरों को बुलाया जाएगा।
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जिले में 1.31 लाख श्रमिक, पंजीकरण 31 हजार का
शामली। जिले में कुल श्रमिकों की संख्या 1.31 लाख के आसपास है, जबकि श्रम विभाग में 30 अप्रैल तक पंजीकरण मात्र 31 हजार श्रमिकों का ही हुआ था। पंजीकृत श्रमिकों में रेहड़ी -ठेला संचालकों, रिक्शा, ई- रिक्शा चालकों, कुली पल्लेदारों, हलवाई, राजमिस्त्री और रोज कमाने वाले कामगार शामिल है। इसके अलावा बड़ी संख्या में श्रमिक जिले की फैक्टरियों में काम करते हैं।
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