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Shamli News: सिद्धपीठ शाकंभरी देवी जाना होगा आसान
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शाकंभरी। पश्चिमी उप्र के प्रसिद्ध सिद्धपीठ श्री शाकंभरी देवी मंदिर में अब जाना आसान होगा। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुल निर्माण का सीमांकन कार्य प्रारंभ हो गया है। सेतु निगम द्वारा 46.78 करोड़ रुपये की लागत से पुल का निर्माण कराया जाएगा। इससे बरसाती नदी में आने वाले उफान से होने वाली परेशानी से श्रद्धालुओं को मुक्ति मिलेगी।
बता दें, कि माता शाकंभरी देवी मंदिर में बरसात के मौसम में बरसाती नदी में जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जो अब साकार होने जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद श्रद्धालु बिना किसी बाधा के माता शाकंभरी देवी के दर्शन कर सकेंगे, जिससे मंदिर क्षेत्र के आसपास में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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सेतु निगम के सहायक अभियंता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वन विभाग से आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य करने के लिए भी सहमति अंतिम दौर में है। अभी पुल के लिए सीमांकन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। भूरादेव मंदिर पर जहां सड़क समाप्त होती है, वहां से आगे 180-180 मीटर के दो पुल और 687 मीटर सड़कों का निर्माण होना है। इनमें तीन एप्रोच सड़कें भी शामिल हैं।
अखिल भारतीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी भैरव तंत्राचार्य संत सहजानंद महाराज का कहना है कि सिद्धपीठ में पुल बनने से बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय दुकानदारों एवं संतों को भी भारी सुविधा होगी।
बता दें, कि माता शाकंभरी देवी मंदिर में बरसात के मौसम में बरसाती नदी में जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। श्रद्धालुओं को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ती है।
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पुल निर्माण की मांग लंबे समय से की जा रही थी, जो अब साकार होने जा रही है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद श्रद्धालु बिना किसी बाधा के माता शाकंभरी देवी के दर्शन कर सकेंगे, जिससे मंदिर क्षेत्र के आसपास में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।
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सेतु निगम के सहायक अभियंता सुरेंद्र कुमार ने बताया कि वन विभाग से आरक्षित वन क्षेत्र में कार्य करने के लिए भी सहमति अंतिम दौर में है। अभी पुल के लिए सीमांकन का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। भूरादेव मंदिर पर जहां सड़क समाप्त होती है, वहां से आगे 180-180 मीटर के दो पुल और 687 मीटर सड़कों का निर्माण होना है। इनमें तीन एप्रोच सड़कें भी शामिल हैं।
अखिल भारतीय संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं शंकराचार्य आश्रम प्रभारी भैरव तंत्राचार्य संत सहजानंद महाराज का कहना है कि सिद्धपीठ में पुल बनने से बरसात के मौसम में श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय दुकानदारों एवं संतों को भी भारी सुविधा होगी।