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Shamli News: ईसा काल का है इस्सोपुरटील, करोड़ों रुपये की लागत से हो रहा सुंदरीकरण
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कांधला। जिले की सीमा पर यमुना नदी किनारे प्राचीन और ऐतिहासिक गांव इस्सोपुरटील बसा है। यमुना नदी के एक तरफ शामली जिले का यह गांव बस है तो दूसरी तरफ हरियाणा है। यमुना किनारे यह सैकड़ों साल पुराना उबड़ खाबड़ प्राचीन टीला है। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद मुख्यमंत्री विकास पर्यटन योजना के तहत इस्सोपुरटील को विकसित करने के लिए काम किया जा रहा है।
कांधला कस्बे से 12 किलोमीटर की दूरी पर गांव इसोपुरटील बसा है। इसोपुर गांव का नाम यमुना नदी के किनारे मिट्टी के टीले से प्रसिद्ध है। वहां पहले प्राचीन बस्ती थी। युग परिवर्तन के समय बस्ती उजड़ गई और यमुना नदी किनारे सिर्फ मिट्टी का टीला रह गया। इतिहासकार इस्सोपुर टील को ईसा काल का मान कर चल रहे हैं। दूसरे कुछ लोग मुगल साम्राज्य इतिहास से जोड़कर चल रहे हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति एवं आरके पीजी काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डा़ रणधीर सिंह और शामली के डाक्टर उमर सेफ ने 2002 में इस्सोेपुर टील का दौरा किया। यमुना नदी के किनारे इस्सोपुर टीले के दौरे के दौरान मिट्टी के बर्तन प्राचीन अवशेष भांड और जीव जंतुओं के अवशेष मिले थे। उन्होंने यहां का इतिहास ईसा काल का मानकर भारत सरकार के केंद्रीय पुरात्व विभाग से टीले की खुदाई की मांग उठाई।
मिट्टी के टीले पर सैकड़ों साल पुराना यहां शिव मंदिर स्थित है। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद मराठा कालीन ऐतिहासिक मंदिरों को मुख्यमंत्री पर्यटन योजना में इस्सोपुर टील को शामिल किया गया। मुख्यमंत्री पर्यटन योजना में इस्सोपुर टील को विकसित करने के लिए 50 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई। इससे इस्सोपुर टील का सुंदरीकरण किया गया। मंदिर स्थल पर जाने के लिए सीसी रोड, शिव मंदिर का सुंदरीकरण, गोशाला का निर्माण हो चुका है। भाजपा के एमएलसी वीरेंद्र सिंह ने इस्सोपुरटील को विकसित करने के लिए एक करोड़ रुपये के विकास कार्यो की योजना का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पेश किया था। शासन से 76 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसमें विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
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इस्सोपुर टील में हुए महत्व पूर्ण कार्य-
-एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बनी है गोशाला
-मुख्यमंत्री सर्वधन पर्यटन योजना, चार दीवारी, टायल्स कार्य, जीर्णाेद्धार
- यमुना नदी तक जाने के लिए जिला पंचायत की ओर से सीसी रोड, अंतेष्टी स्थल
-टीले पर जाने के लिए सीसी रोड क्षेत्र पंचायत की ओर से
-क्या कहते हैं ग्रामीण
इस्सोपुरटील निवासी हनुमान व अजीत सिंह का कहना है कि इस्सोपुरटील प्राचीन ऐतिहासिक टीला है। इस टीले का महाभारत कालीन भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा कार्य कराए जा रहे है। गांव की कस्तूरी देवी पत्नी नेत्रपाल, रामोदेवी व हरिमोहन ऊर्फ मोनू गुर्जर व पडित योगेद्र शर्मा का कहना है कि भगवान शिव, राधा-कृष्ण, गोशाला, श्मशान घाट आदि बने हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को पयर्टन योजना में इस क्षेत्र को विकसित करना चाहिए।
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कांधला कस्बे से 12 किलोमीटर की दूरी पर गांव इसोपुरटील बसा है। इसोपुर गांव का नाम यमुना नदी के किनारे मिट्टी के टीले से प्रसिद्ध है। वहां पहले प्राचीन बस्ती थी। युग परिवर्तन के समय बस्ती उजड़ गई और यमुना नदी किनारे सिर्फ मिट्टी का टीला रह गया। इतिहासकार इस्सोपुर टील को ईसा काल का मान कर चल रहे हैं। दूसरे कुछ लोग मुगल साम्राज्य इतिहास से जोड़कर चल रहे हैं। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व उपकुलपति एवं आरके पीजी काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डा़ रणधीर सिंह और शामली के डाक्टर उमर सेफ ने 2002 में इस्सोेपुर टील का दौरा किया। यमुना नदी के किनारे इस्सोपुर टीले के दौरे के दौरान मिट्टी के बर्तन प्राचीन अवशेष भांड और जीव जंतुओं के अवशेष मिले थे। उन्होंने यहां का इतिहास ईसा काल का मानकर भारत सरकार के केंद्रीय पुरात्व विभाग से टीले की खुदाई की मांग उठाई।
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मिट्टी के टीले पर सैकड़ों साल पुराना यहां शिव मंदिर स्थित है। वर्ष 2017 में योगी आदित्यनाथ के प्रदेश के मुख्यमंत्री की कमान संभालने के बाद मराठा कालीन ऐतिहासिक मंदिरों को मुख्यमंत्री पर्यटन योजना में इस्सोपुर टील को शामिल किया गया। मुख्यमंत्री पर्यटन योजना में इस्सोपुर टील को विकसित करने के लिए 50 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई। इससे इस्सोपुर टील का सुंदरीकरण किया गया। मंदिर स्थल पर जाने के लिए सीसी रोड, शिव मंदिर का सुंदरीकरण, गोशाला का निर्माण हो चुका है। भाजपा के एमएलसी वीरेंद्र सिंह ने इस्सोपुरटील को विकसित करने के लिए एक करोड़ रुपये के विकास कार्यो की योजना का प्रस्ताव मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलकर पेश किया था। शासन से 76 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई है। इसमें विकास कार्य कराए जा रहे हैं।
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इस्सोपुर टील में हुए महत्व पूर्ण कार्य-
-एक करोड़ 20 लाख रुपये की लागत से बनी है गोशाला
-मुख्यमंत्री सर्वधन पर्यटन योजना, चार दीवारी, टायल्स कार्य, जीर्णाेद्धार
- यमुना नदी तक जाने के लिए जिला पंचायत की ओर से सीसी रोड, अंतेष्टी स्थल
-टीले पर जाने के लिए सीसी रोड क्षेत्र पंचायत की ओर से
-क्या कहते हैं ग्रामीण
इस्सोपुरटील निवासी हनुमान व अजीत सिंह का कहना है कि इस्सोपुरटील प्राचीन ऐतिहासिक टीला है। इस टीले का महाभारत कालीन भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। सुंदरीकरण के लिए पर्यटन विभाग द्वारा कार्य कराए जा रहे है। गांव की कस्तूरी देवी पत्नी नेत्रपाल, रामोदेवी व हरिमोहन ऊर्फ मोनू गुर्जर व पडित योगेद्र शर्मा का कहना है कि भगवान शिव, राधा-कृष्ण, गोशाला, श्मशान घाट आदि बने हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को पयर्टन योजना में इस क्षेत्र को विकसित करना चाहिए।