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गंदेवड़ा संगम की तर्ज पर विकसित होगा इस्सोपुरटील

Fri, 24 Sep 2021 12:20 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 24 Sep 2021 12:20 AM IST
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Isopurtil will be developed on the lines of Gandewada Sangam
कांधला का इस्सोपुरटील - फोटो : SHAMLI
शामली। यमुना नदी के किनारे स्थित कांधला क्षेत्र का इस्सोपुरटील भी गंदेवड़ा संगम की तर्ज पर विकसित होगा। जहां स्नानघाट और सीढ़ियां बनाई जाएंगी। यहां प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्धार करके श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच और प्रकाश व्यवस्था की तैयारी है।
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बागपत और शामली जिले की सीमा पर यमुना किनारे इस्सोपुरटील सैकड़ों साल पुराना है। कांधला से करीब 12 किमी दूर बसे इस्सोपुरटील में यमुना के किनारे मिट्टी के ऊंचे टीले हैं। इस्सोपुरटील महाभारत काल में भी महत्वपूर्ण स्थान रहा है। पूर्व मंत्री, निवर्तमान एमएलसी वीरेंद्र सिंह के अथक प्रयास से इस्सोपुरटील को विकसित करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्द्धन योजना में शामिल किया था। योजना में शासन से प्रथम किस्त के रूप में 24.95 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त हो गई है। कार्य कराने के लिए लघु उद्योग विकास निगम (सिडको) को निर्माण एजेंसी नामित किया था।
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सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि इस्सोपुरटील में यमुना किनारे स्नानघाट सीढ़ियां बनाने के लिए सिंचाई-ड्रेनेज खंड की ओर से इस्टीमेट बनाया जा रहा है। इस्टीमेट बनाकर शासन को भेजा जाएगा। पिछले एक माह पूर्व इस्सोपुरटील में पर्यटन कार्य कराने के लिए शासन ने सिडको को निर्माण एजेंसी नामित कराया गया है। शासन से 24.95 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त हो गई है।
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इस्सोपुरटील को पर्यटक के रुप में विकसित करने के लिए विधान परिषद निधि से सीसी रोड का निर्माण हो चुका है। यहां पर अंत्येष्टि स्थल का निर्माण चल रहा जा रहा है। गोशाला भवन प्रस्तावित है। प्राचीन शिव मंदिर का जीर्णोद्घार किया जाएगा। - वीरेंद्र सिंह, पूर्व मंत्री
चहारदीवारी गिराने के बाद विवाद में इस्सोपुरटील
इस्सोपुरटील में मुख्यमंत्री पर्यटन संवर्धन योजना में 24.95 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त होने के बाद पर्यटन का कार्य शुरू हो गया था। निर्माण एजेंसी ने कार्य करने के लिए चहारदीवारी का गिरा दिया था। जिस पर पूर्व मंत्री वीरेंद्र सिंह ने ठेकेदार से कार्य रुकवा दिया। उनका कहना था कि निर्माण एजेंसी के ठेकेदार ने इस्सोपुरटील की चहारदीवारी को गिरा दिया है, जबकि योजना में प्रस्तावित कार्य पर अमल नहीं किया गया। सीडीओ शंभूनाथ तिवारी ने बताया कि इस्सोपुरटील में पर्यटन कार्य कराने के लिए निवर्तमान एमएलसी वीरेंद्र सिंह से मिलकर वार्ता करेंगे। सिडको के अधिशासी अभियंता अरविंद कुमार निर्मल ने बताया कि इस्सोपुरटील में 117 मीटर में चहारदीवारी निर्माण का प्रस्ताव है। पूर्व चहारदीवारी मिट्टी की चिनाई की बनाई गई थी। इसलिए चहारदीवारी गिराई गई है।

इस्सोपुरटील का 3200 साल का रहा है इतिहास
इस्सोपुरटील का करीब 3200 साल पहले इतिहास रहा है। लौह युगीन सभ्यता के दौरान यमुना जलमार्ग से आवागमन होता था, तब यह स्थान काफी महत्वपूर्ण रहा है। वर्ष 2002 में चौधरी चरणसिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. रणधीर सिंह एवं शामली निवासी डॉ. उमर सैफ ने इस स्थान पर जांच की थी। खोदाई के दौरान यहां पर चित्रित धूसर मृदभांड मिले थे। इन पर ब्राह्मी लिपि में लिखा हुआ था।
मुख्यमंत्री संवर्द्धन पर्यटन योजना में ये होंगे विकास कार्य
- 117 मीटर लंबाई की चहारदीवारी, मुख्य गेट
- 12 सोलर लाइट, 19 कूड़ादान, 20 बेंच
- मंदिर परिसर में कोटा स्टोन लगाने का कार्य
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