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इंसानियत का धर्म है इस्लाम
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इंसानियत का धर्म है इस्लाम
कैराना।
कस्बे के मोहल्ला अंसारियान स्थित इमामबारगाह कला में सोमवार की रात आयोजित कार्यक्रम में मौलाना जफर अब्बास ने हजरत अली के जन्मदिन पर केक काटा। इसके बाद महफिल में मौलाना जफर अब्बास ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हजरत अली का जन्म मक्का में हुआ था। वह शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। हजरत अली ने लोगों को दुश्मनों से भी प्रेम करने की सलाह दी थी। उनका मानना था जो आज तुम्हारा दुश्मन है वह एक न एक दिन दोस्त जरूर बन जाएगा, इसलिए किसी से भी भेदभाव और मनमुटाव नहीं रखना चाहिए। उनका मानना था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है।
मौलाना ने हजरत अली के पांच खास संदेश सुनाते हुए कहा उनका मानना था कि व्यक्ति को हमेशा सोच समझकर बोलना चाहिए । बोलने से पहले शब्द आपके गुलाम होते हैं, लेकिन बोलने के बाद आप लफ्जों के गुलाम बन जाते हैं। हजरत अली भीख मांगने के सख्त खिलाफ थे। मौलाना ने आगे बताया कि अपनी सोच को पानी के बूंदों से भी ज्यादा साफ रखो, क्योंकि जिस तरह बूंदों से दरिया बनता है उसी तरह सोच से ईमान बनता है। मौलाना जफर अब्बास ने अंत में कहा कि हजरत अली किसी की चुगली के भी खिलाफ थे। उनका मानना था कि चुगली करना उसका काम होता है, जो अपने आपको बेहतर बनाने में असमर्थ होता है। हमेशा समझौता करना सीखना चाहिए , क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी रिश्ते का हमेशा के लिए टूट जाने से बेहतर है। मास्टर वसी हैदर साकी, हुसैन हैदर, बाबर हुसैन, गुलजार, रवीश व शारिब हुसैनी आदि ने महफिल को संबोधित किया। इस अवसर पर शबी हैदर, मेहरबान अली, शाहनवाज हुसैन, डॉक्टर फरहत हुसैन, मोहम्मद अली, जाफर, बुद्धन हुसैन, सरदार अली, नासिर हुसैन, अख्तर हुसैन, जावेद रजा जैदी व मास्टर सदाकत हुसैन आदि मौजूद रहे।
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कैराना।
कस्बे के मोहल्ला अंसारियान स्थित इमामबारगाह कला में सोमवार की रात आयोजित कार्यक्रम में मौलाना जफर अब्बास ने हजरत अली के जन्मदिन पर केक काटा। इसके बाद महफिल में मौलाना जफर अब्बास ने हजरत अली के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हजरत अली का जन्म मक्का में हुआ था। वह शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। हजरत अली ने लोगों को दुश्मनों से भी प्रेम करने की सलाह दी थी। उनका मानना था जो आज तुम्हारा दुश्मन है वह एक न एक दिन दोस्त जरूर बन जाएगा, इसलिए किसी से भी भेदभाव और मनमुटाव नहीं रखना चाहिए। उनका मानना था कि इस्लाम इंसानियत का धर्म है।
मौलाना ने हजरत अली के पांच खास संदेश सुनाते हुए कहा उनका मानना था कि व्यक्ति को हमेशा सोच समझकर बोलना चाहिए । बोलने से पहले शब्द आपके गुलाम होते हैं, लेकिन बोलने के बाद आप लफ्जों के गुलाम बन जाते हैं। हजरत अली भीख मांगने के सख्त खिलाफ थे। मौलाना ने आगे बताया कि अपनी सोच को पानी के बूंदों से भी ज्यादा साफ रखो, क्योंकि जिस तरह बूंदों से दरिया बनता है उसी तरह सोच से ईमान बनता है। मौलाना जफर अब्बास ने अंत में कहा कि हजरत अली किसी की चुगली के भी खिलाफ थे। उनका मानना था कि चुगली करना उसका काम होता है, जो अपने आपको बेहतर बनाने में असमर्थ होता है। हमेशा समझौता करना सीखना चाहिए , क्योंकि थोड़ा सा झुक जाना किसी रिश्ते का हमेशा के लिए टूट जाने से बेहतर है। मास्टर वसी हैदर साकी, हुसैन हैदर, बाबर हुसैन, गुलजार, रवीश व शारिब हुसैनी आदि ने महफिल को संबोधित किया। इस अवसर पर शबी हैदर, मेहरबान अली, शाहनवाज हुसैन, डॉक्टर फरहत हुसैन, मोहम्मद अली, जाफर, बुद्धन हुसैन, सरदार अली, नासिर हुसैन, अख्तर हुसैन, जावेद रजा जैदी व मास्टर सदाकत हुसैन आदि मौजूद रहे।
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