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Shamli News: गढ़ी हसनपुर में हैंडपंप घोटाले की शिकायत पर जांच, पंचायत भवन में हंगामा
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चौसाना क्षेत्र के गांव गढ़ी हसनपुर में जांच करने अधिकारी । संवाद
झिंझाना। क्षेत्र के ग्राम गढ़ी हसनपुर के लोगों द्वारा तहसील दिवस में हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर के नाम पर घोटाले का आरोप लगाते हुए शिकायत के बाद मंगलवार को पंचायत भवन में खुली बैठक आयोजित की गई। मामले की जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों के सामने ग्रामीणों ने विरोध दर्ज कराते हुए ग्राम प्रधान पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए।
ग्रामीण राजेश कुमार, रमेश चंद, गुरविंदर, संजीव, नीरज, धर्म सिंह, शुभम कुमार, संदीप चौधरी आदि ने बताया कि गांव में करीब 102 हैंडपंप हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत हैंडपंपों पर ग्रामीणों ने खुद की व्यवस्था से निजी सबमर्सिबल मोटर लगवा रखीं हैं, जिनकी मरम्मत भी वे स्वयं कराते हैं। इसके बावजूद ग्राम प्रधान द्वारा इन हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी फंड से भुगतान दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक ही नल की मरम्मत अलग-अलग लोगों के नाम से दिखाकर कई बार भुगतान लिया गया है।
शुभम कुमार ने बताया कि उन्होंने आठ महीने पहले ग्राम सचिव अंकुर मालिक के खिलाफ सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश के बावजूद आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया।
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यह बोले अधिकारी
बीडीओ ऊन उमाकांत मुद्गल का कहना है कि सभी प्राप्त शिकायतों के आधार पर ग्राम पंचायत में जांच के लिए पहुंचे। पंचायत भवन में खुली बैठक की गई, जिसमें दोनों पक्षों के लोगों के अलावा उन कारीगरों को भी बुलाया गया जो रिबोर और मरम्मत का कार्य कर चुके हैं। जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेजों और बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि लगाए गए अधिकतर आरोप निराधार हैं। हालांकि लगभग पांच प्रतिशत कार्यों में कुछ कमियां जरूर मिली हैं, जिनकी आगे अलग से जांच कराई जाएगी।
ग्राम प्रधान पति रविंद्र चौधरी का कहना है कि ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक हैं, इसीलिए हमें बदनाम करने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी प्रकार का वित्तीय घोटाला नहीं किया गया है। सभी कार्य नियमानुसार, पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कराए गए हैं।
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ग्रामीण राजेश कुमार, रमेश चंद, गुरविंदर, संजीव, नीरज, धर्म सिंह, शुभम कुमार, संदीप चौधरी आदि ने बताया कि गांव में करीब 102 हैंडपंप हैं। इनमें से लगभग 50 प्रतिशत हैंडपंपों पर ग्रामीणों ने खुद की व्यवस्था से निजी सबमर्सिबल मोटर लगवा रखीं हैं, जिनकी मरम्मत भी वे स्वयं कराते हैं। इसके बावजूद ग्राम प्रधान द्वारा इन हैंडपंपों की मरम्मत और रिबोर के नाम पर फर्जी तरीके से सरकारी फंड से भुगतान दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एक ही नल की मरम्मत अलग-अलग लोगों के नाम से दिखाकर कई बार भुगतान लिया गया है।
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शुभम कुमार ने बताया कि उन्होंने आठ महीने पहले ग्राम सचिव अंकुर मालिक के खिलाफ सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के निर्देश के बावजूद आरटीआई का जवाब नहीं दिया गया।
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यह बोले अधिकारी
बीडीओ ऊन उमाकांत मुद्गल का कहना है कि सभी प्राप्त शिकायतों के आधार पर ग्राम पंचायत में जांच के लिए पहुंचे। पंचायत भवन में खुली बैठक की गई, जिसमें दोनों पक्षों के लोगों के अलावा उन कारीगरों को भी बुलाया गया जो रिबोर और मरम्मत का कार्य कर चुके हैं। जांच के दौरान प्राप्त दस्तावेजों और बयानों के आधार पर यह स्पष्ट हुआ कि लगाए गए अधिकतर आरोप निराधार हैं। हालांकि लगभग पांच प्रतिशत कार्यों में कुछ कमियां जरूर मिली हैं, जिनकी आगे अलग से जांच कराई जाएगी।
ग्राम प्रधान पति रविंद्र चौधरी का कहना है कि ग्राम पंचायत चुनाव नजदीक हैं, इसीलिए हमें बदनाम करने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्राम पंचायत द्वारा किसी भी प्रकार का वित्तीय घोटाला नहीं किया गया है। सभी कार्य नियमानुसार, पारदर्शी प्रक्रिया के तहत कराए गए हैं।