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धार्मिक मामलों में हुकूमत की दखलंदाजी नामुनासिब
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धार्मिक मामलों में हुकूमत की दखलंदाजी उचित नहीं
शामली/कैराना/कांधला। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक कानून पास होने के बाद मिलीजुली प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। मौलाना ने कहा कि वह अपने मुल्क के कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक मामलों में हुकूमत की दखलंदाजी ठीक नहीं है। हालांकि महिलाओं ने इसे महिला सुरक्षा के लिए अच्छा कानून बताया है।
महिलाओं के जहन से निकलेगा तीन तलाक का डर
समाजसेवी और ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्या वीना अग्रवाल कहती हैं कि ब्यूरो में आने वाले कई पारिवारिक मामलों की सुनवाई में भी कुछ पीड़ित महिलाएं ये बताती हैं कि पति उसे बार बार तीन तलाक की धमकी देता है। यदि तीन तलाक कानून बन गया तो कम से कम महिलाओं के जहन से ये डर तो निकल जाएगा। इस कानून को मजहब के तौर पर ना देखा जाए, क्योंकि जो कानून बनेगा वो सभी पर लागू होगा। इसलिए ये कानून महिलाओं की हिफाजत के लिए अच्छा कानून है।
देवबंद का फैसला ही मान्य होगा
कैराना कस्बे के पानीपत रोड स्थित मदरसा अरबिया इशातुल इस्लाम के प्रबंधक मौलाना बरकतउल्ला अमीनी ने बताया कि वह इस्लाम धर्म के साथ साथ अपने देश के कानून का सम्मान करते हैं। तीन तलाक मसले में देवबंद से जो बात कही जाएगी वहीं मान्य होगी।
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यह धार्मिक मामला है
कैराना के मदरसा अहसन उल उलूम के मोहतमिम मौलाना मोहम्मद मुनव्वर ने बताया कि यह धार्मिक मसला है। हम अपने देश के कानून का सम्मान करते हैं। मगर धार्मिक मसलों में हुकूमत की दखलंदाजी नामुनासिब है।
फिर से विचार करे सरकार
मौलाना मेहराज कांधलवी ने बताया कि हिंदुस्तान का कानून अपनी जगह पर है उनकी अपनी अहमियत है। हम उनको मानते हैं। मुल्क के प्रत्येक आदमी को इसका सम्मान करना चाहिए। संविधान ने प्रत्येक मजहब में आजादी दी है जो सभी अपने अपने तौर पर सब मानते हैं। तीन तलाक शरीयत और कानून दोनों की इजाजत संविधान हमें देता है। इसमें दखलंदाजी सही नहीं है। इसमें सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए। ये मजहबी मसला है। उधर, कांधला के मौलाना राशिद कांधलवी ने बताया कि ये मजहबी मसला है। इसमें सरकार को दखल नहीं देना था। इसके अलावा कांधला के मौलाना ओसामा कहते हैं कि इसको मुसलमान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हम इसका पुरजोर विरोध करते है।
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शामली/कैराना/कांधला। लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी तीन तलाक कानून पास होने के बाद मिलीजुली प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। मौलाना ने कहा कि वह अपने मुल्क के कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन धार्मिक मामलों में हुकूमत की दखलंदाजी ठीक नहीं है। हालांकि महिलाओं ने इसे महिला सुरक्षा के लिए अच्छा कानून बताया है।
महिलाओं के जहन से निकलेगा तीन तलाक का डर
समाजसेवी और ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्या वीना अग्रवाल कहती हैं कि ब्यूरो में आने वाले कई पारिवारिक मामलों की सुनवाई में भी कुछ पीड़ित महिलाएं ये बताती हैं कि पति उसे बार बार तीन तलाक की धमकी देता है। यदि तीन तलाक कानून बन गया तो कम से कम महिलाओं के जहन से ये डर तो निकल जाएगा। इस कानून को मजहब के तौर पर ना देखा जाए, क्योंकि जो कानून बनेगा वो सभी पर लागू होगा। इसलिए ये कानून महिलाओं की हिफाजत के लिए अच्छा कानून है।
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देवबंद का फैसला ही मान्य होगा
कैराना कस्बे के पानीपत रोड स्थित मदरसा अरबिया इशातुल इस्लाम के प्रबंधक मौलाना बरकतउल्ला अमीनी ने बताया कि वह इस्लाम धर्म के साथ साथ अपने देश के कानून का सम्मान करते हैं। तीन तलाक मसले में देवबंद से जो बात कही जाएगी वहीं मान्य होगी।
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यह धार्मिक मामला है
कैराना के मदरसा अहसन उल उलूम के मोहतमिम मौलाना मोहम्मद मुनव्वर ने बताया कि यह धार्मिक मसला है। हम अपने देश के कानून का सम्मान करते हैं। मगर धार्मिक मसलों में हुकूमत की दखलंदाजी नामुनासिब है।
फिर से विचार करे सरकार
मौलाना मेहराज कांधलवी ने बताया कि हिंदुस्तान का कानून अपनी जगह पर है उनकी अपनी अहमियत है। हम उनको मानते हैं। मुल्क के प्रत्येक आदमी को इसका सम्मान करना चाहिए। संविधान ने प्रत्येक मजहब में आजादी दी है जो सभी अपने अपने तौर पर सब मानते हैं। तीन तलाक शरीयत और कानून दोनों की इजाजत संविधान हमें देता है। इसमें दखलंदाजी सही नहीं है। इसमें सरकार को एक बार फिर से सोचना चाहिए। ये मजहबी मसला है। उधर, कांधला के मौलाना राशिद कांधलवी ने बताया कि ये मजहबी मसला है। इसमें सरकार को दखल नहीं देना था। इसके अलावा कांधला के मौलाना ओसामा कहते हैं कि इसको मुसलमान किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं कर सकता है। हम इसका पुरजोर विरोध करते है।